Jharkhand Home Guard: डीजी के आदेश के खिलाफ चल रही झारखंड गृह रक्षा वाहिनी धनबाद

झारखंड गृह रक्षा वाहिनी धनबाद में डीजी के आदेश का खिलाफ काम किया जा रहा है। आदेश का बावजूद भी ड्यूटी रोस्टर जारी नही किया गया और एक ही जगह पर पहले से कार्य कर रहे जवानों को फिर से वहीं ड्यूटी दे दी गई है।

Atul SinghWed, 16 Jun 2021 01:36 PM (IST)
झारखंड गृह रक्षा वाहिनी धनबाद में डीजी के आदेश का खिलाफ काम किया जा रहा है। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वरी)

धनबाद, जेएनएन : झारखंड गृह रक्षा वाहिनी धनबाद में डीजी के आदेश का खिलाफ काम किया जा रहा है। आदेश का बावजूद भी ड्यूटी रोस्टर जारी नही किया गया और एक ही जगह पर पहले से कार्य कर रहे जवानों को फिर से वहीं ड्यूटी दे दी गई है। वहीं इस मामले पर झारखंड होमेगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन ने कड़ा एतराज जताया है। 

एसोसिएशन ने झारखंड गृह रक्षा वाहिनी कार्यालय धनबाद के कर्तव्य पदाधिकारी ध्रुव तिवारी पर मनमानी करने का आरोप लगाया है। बताया कि इस कारण सैकड़ों की संख्या में गृह रक्षक इस लॉकडाउन में ड्यूटी से वंचित हैं । एक माह पूर्व से ही गृह रक्षकों का नाम रोस्टर पर नहीं लाया जा रहा है और जो जवान पूर्व से प्रतिनियुक्त हैं चार माह पूरा हो जाने के बाद भी उनसे अतिरिक्त ड्यूटी ली गई है। जो डीजी एवं सरकार के स्थाई आदेश का सख्त उल्लंघन है।

2012 के स्थाई आदेश में स्पष्ट रूप से यह कहा गया है कि चार माह की ड्यूटी पूर्ण होने पर उन गृह रक्षकों को ड्यूटी से हटाया जाए जो एक पोस्ट पर बने हुए हैं। उनके स्थान पर अन्य गृह रक्षकों को रोस्टर पर लाया जाए। परंतु ऐसा कार्य नहीं हो रहा है। साथ ही यह भी आदेश है कि यदि ड्यूटी एक ही स्थान पर लगातार दी जाती है तो इस पर महा समादेष्टा सह महानिदेशक का आदेश लेना अनिवार्य होगा। महानिदेशक के आदेश के बगैर ही ड्यूटी ऑफिसर के द्वारा मनमाने तरीके से ड्यूटी को जारी रखा गया है। इससे करीब 150 जवानों को कार्य नही मिल पा रहा है और वे चार माह से बिना वेतन के हैं।

संघ अध्यक्ष रवि मुखर्जी ने कहा कि कर्तव्य पदाधिकारी से कोई जवान संपर्क भी नही कर सकता। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक नही किया है, जबकि वाहिनी के सभी अधिकारियों का नंबर जारी किया गया है। इस कारण सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले जवानों को मुख्यालय एना पड़ता है। इससे उन्हें काफी परेशानी होती है। लॉक डाउन के कारण वाहनों का परिचालन बंद है। इससे भी मुख्यालय आने में जवानों को परेशानी होती है।

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