बिना काेई छुट्टी काेविड राेगियाें की देखरेख कर रहे स्वास्थ्यकर्मी; न्यूनतम मजदूरी से भी कम मिल रहा वेतन Dhanbad News

काम तीस दिन का और वेतन 26 दिन का ही दिया जा रहा। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

काम तीस दिन का और वेतन 26 दिन का ही दिया जा रहा। नियम छह घंटे ड्यूटी का लेकिन खटाया जा रहा आठ घंटे। ऐसा फ्रंटलाइन वर्कर्स या काेराेना फाइटर्स जैसे भारी भरकम शब्दजाल में बांधे गए स्वास्थ्यकर्मियाें का हाे रहा है।

Atul SinghMon, 19 Apr 2021 11:22 AM (IST)

धनबाद, जेएनएन:  काम तीस दिन का और वेतन 26 दिन का ही दिया जा रहा। नियम छह घंटे ड्यूटी का लेकिन खटाया जा रहा आठ घंटे। ऐसा फ्रंटलाइन वर्कर्स या काेराेना फाइटर्स जैसे भारी भरकम शब्दजाल में बांधे गए स्वास्थ्यकर्मियाें का हाे रहा है। जिले के सभी काेविड केयर सेंटर में संक्रमिताें की देखभाल करने की जिम्मेदारी इन दिनाें ठेका कर्मियाें पर है। अन्य स्वास्थ्यकर्मी दैनंदिन कार्याें या टीकाकरण में ही व्यस्त हैं। ऐसे में जरूरी है कि भीषण गर्मी में पीपीई किट पहने खटने वाले इन स्वास्थ्यकर्मियाें का खास ख्याल रखा जाए। हालांकि हाे रहा है इसका ठीक उल्टा ये स्वास्थ्यकर्मी भीषण शाेषण के शिकार हाे रहे हैं।

स्वास्थ्यकर्मियाें के मुताबिक पहले एक सप्ताह ड्यूटी के बाद एक सप्ताह क्वारंटाइन करने की व्यवस्था थी। नियमित चिकित्सकाें व चिकित्साकर्मियाें के साथ यह व्यवस्था लागू रहा लेकिन वे लाेग हमेशा से सप्ताह के साताें दिन ड्यूटी करते रहे। अभी भी कर रहे हैं। नियमानुसार उन्हें सप्ताह में एक दिन छुट्टी व महीने में 26 दिन काम करना है पर वे 30 दिन काम कर रहे हैं। वेतन मात्र 26 दिन का मिल रहा है। छह घंटे के बजाए आठ घंटे खटना पड़ रहा है। एसएनएमएमसीएच के पीजी सेंटर में 100 के करीब राेगी हैं। आइसीयू में 30 संक्रमित हैं। सभी की जिम्मेदारी उन्हीं के जिम्मे है।

कर्मियाें के साथ वेतन भी घटाए:  कर्मचारियाें के मुताबिक जब आउटसाेर्सिंग कंपनी ने उनकी बहाली की थी तब पीएमसीएच में काेराेना संक्रमिताें की चिकित्सा में 50 कर्मी लगाए गए थे। इनमें वार्ड ब्वाय, वार्ड गर्ल, नर्सिंग स्टाफ, स्वीपर, टेक्नीशियन, प्लंबर आदि थे। जैसे ही काेराेना संक्रमिताें की संख्या कम हुई लगभग 20 लाेग हटा दिए गए। इतना ही नहीं जाे लाेग रखे गए उनका वेतन भी घटा दिया गया। जिन्हें 13000 रुपये मिलते थे उन्हें 9.5, 10.5 रुपये दिये जाने लगे। अब जबकि संक्रमिताें की संख्या बढ़ी है तब भी घटाया गया वेतन ही दिया जा रहा है। यह काफी कम है। उपायुक्त हमेशा यहां जायजा लेने आते हैं लेकिन हमारे वेतन पर कभी बात नहीं हाेती।

अब तक छह हाे चुके संक्रमित:

आउटसाेर्सिंग का काम फ्रंटलाइन कंपनी काे मिला है। यही कंपनी केंद्रीय अस्पताल, एसएनएमएमसीएच बीजी ब्लॉक, कैथ लैब, निरसा व भूली रेलवे हॉस्पिटल समेत अन्य जगहाें पर भी काेविड पेशेंट्स की देखरेख कर रहे हैं। कंपनी के सुजीत शर्मा के मुताबिक उनके तकरीबन 350 कर्मी हैं जाे इस समय इस कार्य में जुड़े हुए हैं। शर्मा के मुताबिक फिलहाल जाे स्थिति है उसमें काेराेना गाइडलाइन के मुताबिक कर्मचारियाें काे क्वारंटाइन रखना संभव नहीं। हम जिला प्रशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर काेविड के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्हाेंने बताया कि अभी तक छह कर्मी काेविड पॉजिटिव हाे चुके हैं। जाे पॉजिटिव हाेते हैं उन्हें ही रेस्ट दिया जाता है। कम वेतन के बावत पूछने पर शर्मा ने काेई जवाब नहीं दिया।

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