धनबाद-चंदनकिरारी रोड पर बना गोफ, कभी भी हो सकता बड़ा हादसा

धनबाद-चंदनकियारी रोड के नीचे कोयले का खनन हो चुका है। कोलियरी के राष्ट्रीयकरण के पूर्व क्षेत्र में गौरी प्रोजेक्ट नामक निजी कंपनी की कोलियरी संचालित थी। जिसकी खदानों का सुरंग सड़क के नीचे भी अवस्थित है। इसी कारण गोफ बना है।

MritunjaySat, 31 Jul 2021 05:56 PM (IST)
धनबाद-चंदनकियारी रोड पर बने गोफ को देखते लोग।

संवाद सहयोगी, चंदनकियारी। चंदनकियारी-धनबाद राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित सितानाला के समीप शनिवार को अहले सुबह मुख्य सड़क गहरा गोफ बन गया। झरना नीलांचल आश्रम के समीप सड़क पर गिरे पेड़ के कारण शुक्रवार की देर रात से ही आवागमन बाधित होने के कारण यहां बड़ा हादसा टल गया। शनिवार अहले सुबह ही सड़क के बीच में भू-धसान से गोफ होने की जानकारी ग्रामीणों द्वारा अमलाबाद ओपी पुलिस व स्थानीय प्रशासन को देते हुए सड़क पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद करवा दिया। जहां पहुंचे अमलाबाद कोलियरी के परियोजना पदाधिकारी एन प्रसाद, अंचलाधिकारी रामा रविदास, बीडीओ अजय वर्मा की पहल पर बीसीसीएल कोलियरी प्रबंधन व राष्ट्रीय उच्चपथ प्रमंडल बोकारो के प्रयास से हाइवा, जेसीबी व ट्रैक्टर की मदद से सड़क पर बने गोफ को भर दिया गया। इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग चुकी थी।  

कोयले की खदानों में पानी भरने से सुरंग में समाई सड़क

बताया जाता है कि कोलियरी के राष्ट्रीयकरण के पूर्व इस क्षेत्र में गौरी प्रोजेक्ट नामक निजी कंपनी की कोलियरी संचालित थी। जिसकी खदानों का सुरंग उक्त सड़क के नीचे भी अवस्थित है। जो कोलियरी बंद होने के पश्चात भी भराया नहीं जा सका। वहीं कोलियरी बंद होने के बाद यहां कोयले की अवैध खनन को लेकर कई सुरंगे भी बनाई गई। जो उक्त सड़क व अगल-बगल के जमीन के ठीक दो से तीन मीटर ही नीचे है। ऐसे में इन सुरंगों में बारिश का पानी घुसते ही यहां अक्सर ही भू-धसान या गोफ बनने की घटना होती रहती है। बता दें कि वर्ष 2013 में भी सितानाला के समीप ही किनारे की सड़क पर धसान से दरार पैदा हुई थी। वहीं सितानाला स्थित अमलाबाद सड़क के बीचोबीच भी गहरी गोफ भू-धसान के कारण बनी थी।  

बंद खदानों को भरने का हुआ था प्रयास

वर्ष 2013 में ही सितानाला, अमलाबाद, गौरीग्राम व भोजूडीह स्थित कोयले की अवैध सुरंगों को प्रशासनिक स्तर पर भरा जाने का प्रयास हुआ था। जिसमें जिला खनन टास्क फोर्स की मौजूदगी में बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा कई सुरंगों के द्वार को भरा गया था। जबकि उक्त सुरंग अंदर से खोखली ही रह गई। जिसमें बरसात का पानी घुसने के बाद इस प्रकार की तबाही मचती रहती है।

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