Dhanbad: गजलीटांड़ हादसे का रहस्य आज भी इतिहास के पन्नों में

गजलीटांड़ हादसे के 26 सितंबर को 26 वां साल बीत गई इसकी भौगोलिक सामाजिक व आर्थिक स्थितियां भी बदल गई। भूमिगत खदान से लेकर आउटसोर्सिंग में चले ओपेन कास्ट माइंस से लेकर वर्तमान में बंदी की मार झेल रहे गजलीटांड़ में कुछ नहीं बदला ।

Atul SinghSat, 25 Sep 2021 05:49 PM (IST)
कुछ नहीं बदला तो वो सिर्फ इतने बड़े हादसे के कारणों के खुलासे का इंतजार।

संवाद सहयोगी, कतरास: गजलीटांड़ हादसे के 26 सितंबर को 26 वां साल बीत गई, इसकी भौगोलिक, सामाजिक व आर्थिक स्थितियां भी बदल गई। भूमिगत खदान से लेकर आउटसोर्सिंग में चले ओपेन कास्ट माइंस से लेकर वर्तमान में बंदी की मार झेल रहे गजलीटांड़ में कुछ नहीं बदला तो वो सिर्फ इतने बड़े हादसे के कारणों के खुलासे का इंतजार।

25 सितंबर 1995 की काली रात

गजलीटांड कोलियरी सहित बीसीसीएल के लिए प्रलयंकारी रात बन कर आई थी। गजलीटांड़ सहित 79 कोल कर्मी काल कवलित हुए थे। अकेले गजलीटांड़ कोलियरी के छह नंबर भूमिगत खदान में 64 श्रमिकों ने जल समाधि ली थी। विदिद हो कि कतरास के कतरी नदी की तट बंध टूटने से छह नंबर भूमिगत खदान के 10 सिम में कार्य कर रहे 64 मजदूर काल के गाल में समा गए थे। 331 मिली मीटर उस दिन बारिस हुई थी। नदी में पानी पूरे उफान पर था। इतनी बड़ी घटना की सूचना पर तत्कालीन कोयला मंत्री जगदीश टाइटलर, पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, जगन्नाथ मिश्रा, तत्कालीन सीएमडी जीसी मृग सहित कई जनप्रतिनिधि पहुंचे थे। 26 सितंबर की सुबह गजलीटांड़ में हाहाकार मच गयी। जस्टिस एस. मुख़र्जी की अध्यक्षता में मुखर्जी कमिशन / कोर्ट आफ इंक्वाइरी का गठन हुआ था। जिसके एससेर इंटर के तत्कालीन महामंत्री स्व राजेंद्र प्रसाद सिंह और भारतीय खनिज विद्या पीठ के प्रोफेसर एस. मजूमदार बनाए गए थे। लंबी अवधि कार्रवाई चली लेकिन अंतिम नतीजा आज तक सामने नहीं आ सका और घटना का रहस्य इतिहास के पन्नों में दब कर रह गया। शहीद कर्मियों के याद में स्थानीय लोगों के द्वारा प्रत्येक वर्ष फुटबाल टूर्नामेंट का आयोजन कराया जाता है। 26 सितंबर की सुबह से कुरान व गीता की पाठ के साथ सर्वधर्म प्रार्थना सभा किया जाता है जहां श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। बीसीसीएल के वरीय अधिकारियों, यूनियन प्रतिनिधि, समाजसेवी के अलावा जनप्रतिनिधियों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। शहीद स्तंभ पर शहीद के परिजनों के अलावा अन्य लोग भी श्रद्धाजलि दी जाती है। इसके अलावा चैतुडीह खदान में भी उसी रात चार कर्मी, साउथ गोविंदपुर में तीन, बेरा कोलियरी तीन, निचितपुर कोलियरी दो, केसलपुर कोलियरी एक सहित 79 श्रमिकों ने भी जल समाधि ली थी। जल समाधि लिये श्रमिकों के आश्रितों तत्काल नियोजन, कंपनी सभी प्रकार वित्तीय सहायता के अलावा केंद्र व राज्य सरकार की ओर से सहायता सहित आपदा राहत कोष व सामाजिक संगठनों द्वारा सहयोगी की गई थी।

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