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Chaiti Chhath Puja 2021: चार दिवसीय चैती छठ महापर्व शुरू, जानें नहाय-खाय से लेकर अर्घ्य तक

18 को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा ( फाइल फोटो)।

16 अप्रैल को नहाय- खाय किया जाएगा। नहाय खाय के दिन पूरे घर की साफ- सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चने की सब्जी चावल साग कद्दू खाया जाता है। अगले दिन खरना से व्रत की शुरुआत होती है।

MritunjayFri, 16 Apr 2021 09:58 AM (IST)

धनबाद, जेएनएन। इस बार चैती छठ 16 अप्रैल से आरंभ होकर 19 अप्रैल तक चलेगा। छठ पूजा का पावन पर्व पूरे चार दिनों तक मनाया जाएगा। महिलाएं छठ के दौरान लगभग 36 घंटे का व्रत रखती हैं। नवरात्रि पर्व के दौरान चैती छठ महापर्व शुरू हो रहा है। चैती छठ 16 अप्रैल से आरंभ होकर 19 अप्रैल तक चलेगा। यह पर्व चार दिन तक चलने वाला चैती छठ शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरुआत हो रही है। लोक आस्था का महापर्व छठ साल में दो बार मनाया जाता है। यह पर्व चैत्र माह में और कार्तिक माह में मनाया जाता है। इसमें उगते व डूबते सूर्य की पूजा की जाती है। छठ का व्रत काफी कठिन व नियम के साथ किया जाता है। इस पर्व में सूर्य भगवान की विशेष उपासना की जाती है। खड़ेश्वरी मंदिर के पूजारी राकेश पांडेय के आनुसार चैत्री छठ श्रद्धा भक्ति के साथ करना अत्यंत लाभकारी है। इस पर्व में मुख्यतः सूर्य देव को अर्घ्य देने का सबसे ज्यादा महत्व माना गया है।

पहला दिन- नहाय-खाय

16 अप्रैल को नहाय- खाय किया जाएगा। नहाय खाय के दिन पूरे घर की साफ- सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चने की सब्जी, चावल, साग, कद्दू खाया जाता है। अगले दिन खरना से व्रत की शुरुआत होती है।

दूसरा दिन- लोहंडा व खरना

लोहंडा व खरना छठ पूजा का दूसरा दिन 17 अप्रैल शनिवार को खरना किया जाएगा। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को आम की लकड़ी जलाकर गुड़ वाली खीर का प्रसाद बनाती हैं और फिर सूर्य देव की पूजा करने के बाद यह प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके बाद व्रत का पारणा छठ के समापन के बाद ही किया जाता है।

तीसरा दिन- छठ पूजा संध्या अर्घ्य

18 अप्रैल रविवार को छठ पूजा का मुख्य दिन और चैत्री छठ के तीसरा दिन शाम के समय महिलाएं नदी या तालाब में खड़ी होकर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं। 

चौथा दिन- सूर्योदय अर्घ्य

19 अप्रैल सोमवार को इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले ही नदी या तालाब के पानी में उतरकर सूर्यदेव से प्रार्थना करती हैं। इसके बाद उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पूजा का समापन कर व्रत का पारणा किया जाता है।

बाजार में छठ पूजा की सामग्री  खरीदारी के लिए बढ़ी भीड़

छठ पूजा के लिए बाजार में खरीदारी के लिए हीरापुर बाजार, पुराना बाजार, सरायढ़ेला सहित अन्य बाजारों में भीड़ होने लगी है। प्रसाद रखने के लिए बांस से बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के सूप, लोटा, थाली, पीतल के गिलास, चावल, लाल सिंदूर, धूप, दीपक, पानी वाला नारियल, गन्ना नए वस्त्र जैसे साड़ी-कुर्ता पजामा आदि की खरीदारी की जा रही है।

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