CMPFO: 800 कर्मियों को प्रमोशन देने में सीएमपीएफ के पूर्व आयुक्त समेत 12 फंसे, पांच को चार्जशीट; बीके पांडा को मेमो

CMPFO डिर्पाटमेंट ऑफ प्रमोशन कमेटी ने कई कर्मचारियों को एक सप्ताह में दो-दो प्रमोशन की अनुमति दे दी। ऐसे दर्जनों मामले पकड़ में आए। ग्रुप (ए) के दो डीपीसी पैनल के चेयरमैन बीके पांडा ही थे जो वर्तमान में कोलकाता के फॉल्टा में आयुक्त हैं।

MritunjaySat, 19 Jun 2021 12:58 PM (IST)
कोयला खान भविष्य निधि संगठन ( फाइल फोटो)।

धनबाद [ आशीष अंबष्ठ ]। कोल माइंस भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफ) के कर्मियों के कैडर रिव्यू (पदोन्नति) के मामले में कोयला मंत्रालय ने गड़बड़ी पकड़ी है। यहां के आठ सौ कर्मचारियों की साल 2017 में कोयला मंत्रालय से बिना अनुमति लिए पदोन्नति की प्रक्रिया की गई। इस मामले में तत्कालीन सीएमपीएफ आयुक्त बीके पांडा समेत 13 अधिकारी व कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। पांच को चार्जशीट दी गई है। पांडा समेत अन्य को मेमो दिया गया है। मेमो का जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर मंत्रालय ने इनको भी चार्जशीट देने की तैयारी की है।

8 के खिलाफ विजिलेंस टीम जांच में जुटी

सूत्रों ने बताया कि कोयला मंत्रालय के आदेश पर विजिलेंस विभाग ने सेवानिवृत्त रीजनल आयुक्त एके सिंह, हरिद्वार पाठक, एमई अली, उपेंद्र पांडा व सेवानिवृत्त प्रवर्तन अधिकारी विनोद तिवारी के विरुद्ध चार्जशीट की है। इसका जवाब इन्होंने हाल में दिया है। अन्य आठ के खिलाफ कोयला मंत्रालय की विजिलेंस टीम जांच में जुट गई है। 

एक सप्ताह में दो प्रमोशन

डिर्पाटमेंट ऑफ प्रमोशन कमेटी ने कई कर्मचारियों को एक सप्ताह में दो-दो प्रमोशन की अनुमति दे दी। ऐसे दर्जनों मामले पकड़ में आए। दरअसल, ग्रुप (ए) के दो डीपीसी पैनल के चेयरमैन बीके पांडा ही थे जो वर्तमान में कोलकाता के फॉल्टा में आयुक्त हैं। मालूम हो कि सीएमपीएफ के 23 क्षेत्रीय कार्यालय के कर्मचारियों को इसका लाभ मिला था। इस मामले में कर्मचारी यूनियन ने कार्ट में भी याचिका दायर की है। कैडर रिव्यू मामले में अंतरिम रोक भी लगी है, मगर कोयला मंत्रालय अपनी विभागीय जांच कर रहा है।

सीबीआइ भी कर सकती जांच

सीएमपीएफ प्रबंधन मामले में सीबीआइ जांच को लेकर भी विचार कर रहा है। कोयला मंत्रालय से भी राय ली जा रही है। सीवीसी से दिशा निर्देश मिलते ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

इनके खिलाफ मंत्रालय ने जारी किया मेमो

कोयला मंत्रालय तत्कालीन आयुक्त बीके पांडा, रीजनल आयुक्त एसके सिन्हा, एके सिंह, पीके चौधरी, प्रेम कुमार पीके, मनीष, कन्हैया नारायण देव, रजत चौबे।

पीएफ इंस्पेक्टर की शिकायत पर हुई कार्रवाई

सीएमपीएफ के एक पीएफ इंस्पेक्टर ने सीएमपीएफ विजिलेंस व कोयला मंत्रालय से शिकायत की थी। मालूम हो कि कैडर रिव्यू का मामला सामने आने के बाद बीके पांडा को सीएमपीएफ आयुक्त पद से हटाकर कोयला मंत्रालय के अर्थिक सलाहकार अनिमेष भारती को आयुक्त बनाया था। तब झारखंड सरकार की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को भी उनको कुर्सी से हटाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा था।

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