देख तमाशा Coronavirus का ! झारखंड के गोड्डा में जिंदगी की नहीं माैत की हो रही मुकम्मल तैयारी

झारखंड के गोड्डा में युद्धस्तर पर तैयार की जा रही अर्थी ( फोटो जागरण)।

कोरोना संक्रमण से मरने वालों का सम्‍मान से अंतिम संस्‍कार हो और उनके स्‍वजन भी संक्रमण से बचे रहें इसके लिए अर्थियां तैयार हो रही हैं। अप्रैल में ही 10 लोगों की मौत हो चुकी है। इतनी ही संख्या में जिले के बाहर भी लोगों की जान गई है।

MritunjayMon, 19 Apr 2021 09:11 PM (IST)

गोड्डा, जेएनएन। झारखंड के गोड्डा जिले में जानलेवा कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए शासन-प्रशासन कितना संवेदनशील है यह तो वही बता सकता है। कोरोना संक्रमित मरीजों की जान को बचाने के लिए स्वास्थ्य सिस्टम के सपोर्ट को बेहतर बनाने के लिए कोई प्रशंसनीय कार्य होता तो नहीं दिख रहा है। लेकिन एक मामले में प्रशासन काफी संवेदनशील है। माैत को मुकम्मल अंजाम देने के लिए प्रशासन की पूरी तैयारी है। हालांकि यह अलग बात है कि इसे लेकर गोड्डा जिला प्रशासन की भद पिट रही है। गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने ट्वीट कर प्रशासन को निर्लज्ज करार दिया है।

 

अब तक कोरोना से 10 की माैत

कोरोना संक्रमण से मरने वालों का सम्‍मान से अंतिम संस्‍कार हो और उनके स्‍वजन भी संक्रमण से बचे रहें इसके लिए अर्थियां तैयार हो रही हैं। अप्रैल में ही कोरोना से 10 लोगों की मौत हो चुकी है। इतनी ही संख्या में जिले के बाहर भी लोगों की जान गई है। ऐसे भी मौके आए हैं कि शव के अंतिम संस्कार को स्वजन तैयार नहीं होते, तब जिला प्रशासन के समक्ष अंतिम संस्कार करने की जिम्मेदारी आती है। यह देख गोड्डा जिला प्रशासन ने शहर के शिवपुर स्थित हटिया परिसर में रह रहे मोहली परिवारों को अर्थी बनाने का आर्डर दिया है।

माफ करना, अपना धंधा है
मोहली परिवार पारंपारिक रूप से बांस के सामान बना कर बेचते हैं। आर्डर लेने वाले जग्गा मोहली और उनकी पत्नी चांदनी देवी ने बताय कि प्रशासन की ओर से 100 अर्थी बनाने का आर्डर दिया गया है। प्रति अर्थी 1500 रुपये की दर से तैयार किया जा रहा है। सोमवार को जग्गा और चांदनी के बच्चे अर्थी पर ही खेलकूद कर रहे थे। इन मासूमों को नहीं पता कि यह मौत के बाद इंसान की अंतिम यात्रा की सवारी है। चार लोग कांधा देकर इससे शव को श्मशान तक पहुंचाते हैं।  

कोविड प्रोटोकॉल के लिए जरूरी : नप अध्यक्ष
नगर परिषद अध्यक्ष जितेंद्र कुमार का कहना है कि चचरी बनाने का आदेश जिला प्रशासन की ओर से दिया गया है। यह कोविड प्रोटोकॉल के लिए जरूरी भी है। जब किसी की मौत कोरोना संक्रमण से हो जाती है तो कई बार अपने भी उसे छूने से परहेज करते हैं। जो शव ले लेते हैं तो उनको संक्रमण का खतरा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन शव के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए अपनी तैयारी कर रहा है। कोविड प्रोटोकॉल के तहत संक्रमित मरीज की मौत के बाद अंचलाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार होता है।

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