राज्य का पहला ऐसा प्लांट होगा, जहां कचरे से पैदा होगी बिजली

सालिड वेस्ट मेनेजमेंट प्लांट न होने की वजह से धनबाद में ढाई लाख टन कचरे का ढेर लगा चुका है। हर दिन निकलने वाला लगभग 400 टन इस ढेर को और बढ़ाता जा रहा है। अभी तक यहां कचरा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी।

Atul SinghWed, 28 Jul 2021 10:51 AM (IST)
कचरा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी।

आशीष सिंह, धनबाद: सालिड वेस्ट मेनेजमेंट प्लांट न होने की वजह से धनबाद में ढाई लाख टन कचरे का ढेर लगा चुका है। हर दिन निकलने वाला लगभग 400 टन इस ढेर को और बढ़ाता जा रहा है। अभी तक यहां कचरा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। अब जाकर इसका डिस्पोजल होने जा रहा है। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भी ऐसा वैसा नहीं, यह देश का चौथा और राज्य का पहला प्लांट होगा। इससे पहले हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली में इस तरह का प्लांट बन चुका है। इसकी खासियत यह होगी हर तरह के कचरे (गीला-सूखा) का उपयोग तरीके से किया जाएगा। यहां कचरे को तीन तरह से सेग्रीगेट (अलग-अलग) किया जाएगा। कचरा रिसाइकल होगा, कंपोस्ट बनेगा, कचरे से ईंट बनेगी और वेस्ट एनर्जी प्लांट लगाया जाएगा। राज्य का पहला ऐसा प्लांट होगा, जहां कचरे से बिजली पैदा होगी। धनबाद नगर निगम क्षेत्र से 400 टन कचरा हर दिन निकलता है। इतने कचरे से प्रतिदिन सात मेगावाट बिजली पैदा होगी। इसे बेचा जाएगा। यही नहीं कचरे से कंपोस्ट तैयार होगा। आसपास के किसानों को देने के साथ ही आसपास जिलों में इसकी बिक्री भी होगी। 70 करोड़ की लागत से रघुनाथपुर बलियापुर में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट रैमकी एजेंसी बनाएगी। अभी निगम क्षेत्र से कचरा कलेक्शन का काम भी रैमकी ही कर रही है। नगर निगम के साथ हुए एग्रीमेंट में रैमकी को यह प्लांट भी बनाना है। प्लांट से होने वाली आय में नगर निगम को प्राफिट के रूप में पांच फीसद मिलेगा। निगम का मानना है कि प्लांट बन जाने से ढाई हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार का अवसर उपलब्ध होगा। रघुनाथपुर और इसके आसपास का इलाका विकसित होगा। स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। बलियापुर अंचल के रघुनाथपुर मौजा में 20 एकड़ 19 डिसमिल गैर आबाद जमीन सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए चिह्नित की गई है।

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इस तरह का प्लांट अभी तक देश में तीन जगह ही बना है। राज्य का यह पहला प्लांट होगा, जहां कचरे से बिजली, कंपोस्ट बनाया जाएगा। बिजली बेची जाएगी, कंपोस्ट कृषि कार्य में प्रयोग होगा। प्लास्टिक को रिसाइकिल किया जाएगा। प्लांट का काम जल्द शुरू होगा। एक से डेढ़ वर्ष में यह काम करने लगेगा। जो भी गतिरोध है उसे खत्म कर लिया गया है। हैदराबाद से विशेष रूप से मशीनें मंगाई जाएंगी। ये कचरे से कंपोस्ट, ईंट, बिजली बनाने का काम करेंगी। प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल भी किया।

- सत्येंद्र कुमार, नगर आयुक्त

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कहां कितना निकलता है कचरा

- घरेलू कचड़ा 250.41 टन

- होटल-रेस्तरां - 8.28 टन

- विवाह तथा कम्यूनिटी भवन - 5.52 टन

- बाजार - 39.41 टन

- स्ट्रीट शापिंग - 41.7 टन

- कमर्शियल कचड़ा - 9.55 टन

अन्य - 52.55 टन

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