Dhanbad Police गुंडे-माफिया के सामने शरणागत ! शहीद के भाई सीआरपीएफ जवान को पिटकर दिखाई ताकत

पिटाई करने के बाद पुलिस ने हाजत में बंद कर दिया ( प्रतीकात्मक फोटो)।

राजस्थान में तैनात सीआरपीएफ जवान श्रीकांत पांडेय शनिवार की रात अपने घर के पास सड़क किनार खड़े थे। वह अपने चालक को ऑटो पकड़ाने के लिए घर से बाहर निकल थे। इसी बीच जोरापोखर थाने की पेट्रोलिंग पार्टी पुहंच गई।

MritunjaySun, 28 Feb 2021 09:36 AM (IST)

धनबाद/ जामाडोबा, जेएनएन। धनबाद पुलिस का जोड़ और जवाब नहीं है ! चोर, माफिया, गुंडे, बाहुबली और गैंग्स के गुर्गे सामने पड़ जाए तो पानी भरती नजर आती है। दूसरी तरफ सज्जनों और निर्बल के साथ ऐसे पेश आती है जैसे दुनिया के सबसे बड़े गुनाहगार हों। अब शनिवार रात की बी बात है। जोड़ापोखर थाना की पुलिस ने शहीद शशिकांत पांडेय के भाई सीआरपीएफ जवान श्रीकांड पाडेय की जमकर पिटाई की। इससे भी मन नहीं भरा तो थाने में ले जाकर हाजत में डाल दिया। कसूर सिर्फ इतना था कि वह पेट्रोलिंग पार्टी को रात ग्यारह बजे सड़क पर दिख गए।

नए दारोगा ने दिखाया प्रशिक्षण का तरीका

जोड़ापोखर थाना  क्षेत्र के जेलगोड़ा के रहने वाले सीआरपीएफ जवान श्रीकांत पांडेय की राजस्थान में पोस्टिंग है। वह शनिवार की रात अपने चालक बलवंत सिंह को ऑटो पकड़ाने के लिए झरिया-सिंदरी मुख्य मार्ग पर खड़े थे। तभी पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी पहुंची। पांडेय से पूछताछ करने लगी। इसी बीच जोरापोखर थाना का एक प्रशिक्षु दारोगा बाइक से पहुंची। उसने यह कहते हुए एक थप्पड़ जड़ दिया कि रात में सड़क पर मटरगस्ती करते हो। इसके बाद पांडेय ने अपना परिचय दिया। इसके बाद भी प्रशिक्षु दारोगा ने प्रशिक्षण का अपना तरीका दिखाया। पांडेय अड़ गए तो दारोगा ने पेट्रोलिंग पार्टी के साथ मिलकर जमकर पिटाई की। इसके बाद जोरापोखर थाना में ले जाकर हाजत में बंद कर दिया। यह सब बताते हुए श्रीकांत के पिता राजेश्वर पाण्डेय ने बताया कि पूरी बात बताने के बाद भी पुलिस कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी।

सीआरपीएफ जवान का परिचय

सीआरपीएफ जवान श्रीकांत पांडेय शहीद शशिकांत पांडेय के बड़े भाई हैं। वर्ष 2016 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दाैरान सेना के जवान शशिकांत पांडेय शहीद हुए थे। सीआरपीएफ जवान श्रीकांत की पहले धनबाद के बलियापुर में ही पोस्टिंग थी। अब राजस्थान में पोस्टिंग है।

थाना प्रभारी ने नहीं किया फोन रिसीव

इस पूरे प्रकरण में पुलिस का पक्ष जानने के लिए जोरापोखर थाना प्रभारी को कई बार मोबाइल फोन किया गया। उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

 

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