DMC: अधिकारियों की अफसरशाही से लटक रही नगर निगम की योजनाएं, स्थल चयन में नहीं रख रहे सावधानी

धनबाद नगर निगम बनाते समय स्थानीय नागरिकों की इच्छाओं को जानकर जब उनका क्रियान्वयन करती हैं तो विरोध की गुंजाईश कम हो जाती है। लेकिन जब उनकी आकांक्षाओं को दरकिनार कर काम कराने पर तुल जाती हैं तो कई तरह की अवरोधक शक्तियां अड़ंगा लगाने को उठ खड़ी होती हैं।

MritunjaySun, 29 Aug 2021 11:53 AM (IST)
धनबाद नगर निगम का विरोध करते नागरिक ( सांकेतिक फोटो)।

जागरण संवाददाता, धनबाद। किसी भी बस्ती के बड़े शहर में बदलाव के लिए विकास के कई काम किए जाते हैं। इसके लिए नगर इकाईयां योजनाओं को बनाते समय स्थानीय नागरिकों की इच्छाओं को जानकर जब उनका क्रियान्वयन करती हैं तो विरोध की गुंजाईश कम हो जाती है। लेकिन जब उनकी आकांक्षाओं को दरकिनार कर काम कराने पर तुल जाती हैं, तो कई तरह की अवरोधक शक्तियां अड़ंगा लगाने को उठ खड़ी होती हैं। कुछ ऐसा ही हो रहा है धनबाद नगर निगम के साथ। जिसके अधिकारी बेलगाम घोड़ों की तरह योजनाओं को लागू करने पर आमादा हैं। जिससे विकास की योजनाओं को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इसकी बानगी हैं गोविंदपुर में लगनेवाले सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट या फिर शास्त्रीनगर में लगाया जानेवाला कम्पैक्टर मशीन। जिनके लगने से पहले ही विरोध के स्वर बुलंद होने लगे हैं। इसको लेकर जहां राजनैतिक शक्तियां इन अवसरों का इस्तेमाल कर लोगों को भड़का कर अपना उल्लू साध रही हैं, वहीं सुविधाओं को लेकर करदाता आम आदमी परेशान हो रहा है। उनका मानना है कि अधिकारियों की इच्छा काम पूरी करने से ज्यादा उसको लटका कर रखने में है। ताकि समय समय पर योजनाओं की घोषणा कर वे काम होते रहने का एहसास कराते रहे।

हीरापुर के संतोष कहते हैं कि वह पिछले कई सालों से निगम की कार्यशैली को देख रहे हैं। उनका मानना है कि जिस काम को निगम नहीं कराना चाहता उसके किसी ना किसी विवाद में फंसा कर लटका कर रखना चाहता है। और इसका सबसे आसान तरीका है कि योजनाओं को इस तरह क्रियान्वित किया जाए कि लोग विरोध प्रदर्शन करने लगें। निगम की कई इस तरह की कार्यशैली की शिकायत करते हुए पुलिस लाइन के सामने रहनेवाले कुंदन कहते हैं कि कंपैक्टर प्लांट अभी घनी बस्ती में बना हुआ है। इसको हटाने को कई बार आवेदन लोगों ने जिला प्रशासन और निगम के अधिकारियों को दिया गया। लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब एक घनी आबादी से हटा कर दुसरी घनी आबादी में लगाने का क्या औचित्य।

वहीं शास्त्रीनगर में लग रहे इस प्लांट का विरोध करने के लिए बने नागरिक पर्षद के संयोजक अरविंद गुप्ता कहते हैं कि इसको लेकर ना तो जिला और निगम प्रशासन के सक्षम पदाधिकारी ने स्थानीय लोगों से रायशुमारी की और ना ही पहले से कोई नोटिश दिया गया। वे कहते हैं कि चुंकि यह घनी आबादी वाला रिहायशी क्षेत्र है। इस तरीके के निर्माण से यहाँ का वातावरण काफी प्रदूषित हो जायेगा। नतीजतन स्थानीय निवासियों को सांस लेने में मुश्किल तो होगी ही, साथ ही बीमारी का प्रकोप बढ़ जायेगा। नगर निगम का काम लोगों को बीमारी से बचाना है, साफ़ सफाई की वयवस्था रखना है, लेकिन इस प्रकार के निर्माण से वस्तुस्थिति एकदम विपरीत होगी। गुप्ता ने कहा कि इस कम्पैक्टर मशीन को शहरी आबादी से दूर किसी सरकारी जमीन पर लगाने से किसी को भी नुकसान नहीं होगा। पर्षद ने पहले भी इसको लेकर विभिन्न जिम्मेवार अधिकारियों को ज्ञापन सौंप अपना विरोध दर्ज कराया था। लेकिन किसी ने भी इसका संज्ञान नहीं लिया। मजबूरन उनको विरोध का यह रास्ता अख्तियार करना पड़ा है।

यह कोई पहला नजीर नहीं है कि निगम को किसी योजना को लेकर विराेध सहना पड़ा है। अभी एक महीना पहले ही गोविंदपुर इलाके में एसटीपी लगाने के दौरान उग्र विरोध का सामना करना पड़ा था।

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