Jagran Impact: सामने आई फुटबॉलर आशा की मुफलिसी की कहानी तो सरकार ने ली सुध, डीसी ने बढ़ाया हौसला

Jagran Impact: सामने आई फुटबॉलर आशा की मुफलिसी की कहानी तो सरकार ने ली सुध, डीसी ने बढ़ाया हौसला

लक्ष्मीपुर गांव की 20 वर्षीय आशा और उसकी 17 वर्षीय बहन ललिता फुटबॉल के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं। दोनों राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं।

Publish Date:Sun, 14 Jun 2020 03:48 PM (IST) Author: Mritunjay

धनबाद, जेएनएन। राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी गोमो के लक्ष्मीपुर गांव की फुटबॉल खिलाड़ी आर्थिक मदद के अभाव में अपने को सपने को पूरा नहीं कर पा रही है। वह चाहती तो है फुटबॉल के खेल में नाम कमाना लेकिन मजबूरन खेतों में पसीना बहाती है। उसकी मुफलिसी की कहानी सार्वजनिक होने के बाद धनबाद जिला प्रशासन ने सुध ली है। उपायुक्त अमित कुमार ने रविवार को आशा को बुलाकर फुटबॉल के क्षेत्र में उसकी महत्वाकांक्षी की जानकारी प्राप्त की। साथ ही 15 हजार रुपये की आर्थिक मदद की। 

उपायुक्त ने दिया 15 हजार का चेक

धनबाद के तोपचांची प्रखंड के लक्ष्मीपुर गांव की 20 वर्षीय आशा और उसकी 17 वर्षीय बहन ललिता फुटबॉल के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं। दोनों राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं। लेकिन आर्थिक स्थिति के अभाव में खेतों में काम करने को मजबूर हैं। आशा और ललिता की कहानी Jagran.com पर शनिवार को प्रसारित हुई। इसके बाद धनबाद जिला प्रशासन ने सुध ली है। गोमो के लक्ष्मीपुर ग्राम की फुटबॉल खिलाड़ी आशा कुमारी को उपायुक्त अमित कुमार ने अपने आवासीय कार्यालय में रविवार को 15000 रुपये का चेक प्रदान किया। चेक प्रदान करने के बाद उपायुक्त ने आशा कुमारी की उपलब्धियों को जानकर कहा कि आप बहुत ही प्रतिभावान खिलाड़ी हैं। नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का लक्ष्य रखें। भविष्य में भी आवश्यकता पड़ने पर हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। उपायुक्त ने आशा कुमारी के कोच उदय मिश्रा की भी सराहना की।

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पिता ने दिखाया फुटबॉल खिलाड़ी बनने का सपना

उपायुक्त ने आशा कुमारी से उनके परिवार के बारे में चर्चा की। आशा कुमारी ने बताया कि उनकी मां आंगनबाड़ी सेविका थी और अब काम नहीं करती है। पिताजी दिलु राम महतो भी फुटबॉल खिलाड़ी थे। वर्ष 2002 में उनका निधन हो गया। उपायुक्त ने जब पूछा कि मां को विधवा पेंशन मिलता है या नहीं, तब आशा कुमारी ने कहा कि मां को विधवा पेंशन मिलता है। चेक मिलने के बाद 20 वर्षीय आशा कुमारी ने कहां की इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और वह लगातार अपना अभ्यास जारी रखेगी। देश की सेवा के लिए लगातार तत्पर रहेगी। साथ ही बताया कि उसके दो भाई एवं तीन बहन भी फुटबॉल खिलाड़ी है।

फुटबॉल के क्षेत्र में आशा का अब तक का प्रदर्शन

आशा ने बताया कि वर्ष 2015 में गोवा, 2016 में नई दिल्ली, उड़ीसा के कटक, 2017 में पंजाब, रांची, कटक तथा भुवनेश्वर, 2018 में भूटान के थिंपू, 2019 में अमृतसर और भुवनेश्वर में आयोजित विभिन्न फुटबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है।  अक्टूबर 2019 में भुवनेश्वर में आयोजित ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी (ईस्ट जोन) प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। वहीं 2017 में भुवनेश्वर में आयोजित ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी (ईस्ट जोन) प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। भूटान, पंजाब एवं रांची की प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त किया था। इस मौके पर भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी, धनबाद के सचिव  कौशलेंद्र कुमार, आशा कुमारी के कोच उदय मिश्रा भी उपस्थित थे।

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