Coal India: अब डीजल के बदले एलएनजी से डंपर चलाने की तैयारी, सलाना इतने करोड़ रुपये की होगी बचत

कोल इंडिया लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) से भारी वाहनों के परिचालन की दिशा में काम कर रहा है। गेल और बीईएमएल के साथ मिलकर एमसीएल में एक प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह पायलट प्रोजेक्ट है। इसके सफल होने के बाद भारी वाहनों में डीजल के बदल एलएनजी का प्रयोग होगा।

MritunjayThu, 02 Sep 2021 11:59 AM (IST)
दो डंपरों में एलएनजी किट फिट करने करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।

जागरण संवाददाता, धनबाद। अपना कार्बन फुटप्रिंट कम करने की दिशा में कोल इंडिया लिमिटेड ने बड़ा कदम उठाया है। अपने डंपरों में लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) किट लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे अब डीजल के बजाय एलएनजी से डंपर चलेंगे, जिससे प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। डंपरों का इस्तेमाल कोयला खदानों में कोयला परिवहन में किया जाता है। कोल इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है, जो हर साल चार लाख लीटर से अधिक डीजल का उपभोग करती है। इस पर सालाना 3,500 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च होता है।

गेल और बीईएमएल के साथ मिलकर प्रोजेक्ट पर हो रहा काम

कंपनी ने गेल (इंडिया) लिमिटेड और बीईएमएल लिमिटेड के साथ मिलकर अपनी अनुषंगी कंपनी महानदी कोलफील्डस लिमिटेड (एमसीएल) में कार्यरत 100 टन क्षमता के दो डंपरों में एलएनजी किट फिट करने करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन के लिए सीआइएल ने गेल और बीईएमएल के साथ एमओयू किया। इन डंपरों में एलएनजी किट को सफलतापूर्वक लगाने और उनके परीक्षण के बाद डंपर दोहरी ईंधन प्रणाली (डूअल फ्यूल सिस्टम) के साथ काम कर सकेंगे। एलएनजी के इस्तेमाल से इन डंपरों का संचालन अधिक ईको-फ्रेंडली और कम लागत वाला होगा।

कम होंगे खर्च, डीजल चोरी से मिलेगी मुक्ति

कोल इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनी की ओपनकास्ट खदानों में इस समय 2,500 भारी मशीनें (एचईएमएम) कार्यरत हैं। कंपनी का डंपर बेड़ा कंपनी में होने वाली कुल डीजल खपत का 65 फीसद से 75 फीसद उपभोग करता है। एलएनजी, डीजल का 30 फीसद से 40 फीसद उपभोग कम करेगा। इससे कंपनी की ईंधन लागत में 15 फीसद की कमी होगी। इस कदम से कंपनी के कार्बन उत्सर्जन में खासी कमी आएगी। यदि डंपर सहित कंपनी की सभी मौजूदा हैवी अर्थ मूविंग मशीनों (एचईएमएम) में एलएनजी किट लगा दी जाएं, तो कंपनी के ईंधन खर्च में सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये की बचत होगी। साथ ही डीजल चोरी और मिलावट से भी मुक्ति मिलेगी। इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य विभिन्न लोड एवं संचालन परिस्थितियों में डीजल के एलएनजी से होने वाले रिप्लेसमेंट रेट की निगरानी करना और इंजन परफार्मेंस मानकों एवं साइकिल टाइम सहित डंपर की कार्यप्रणाली में होने वाले वाले परिवर्तनों को चिन्हित करना है।

तीन माह तक चलेगा ट्रायल

डुअल फ्यूल (एलएनजी-डीजल) सिस्टम के साथ अलग-अलग लोड और परिस्थितियों में डंपर संचालन करने का यह ट्रायल 90 दिनों तक चलेगा। ट्रायल के दौरान प्राप्त होने वाले डेटा के आधार पर एक तकनीकी-आर्थिक अध्ययन किया जाएगा, जो सीआइएल की परिस्थितियों में इस सिस्टम की फिजिबिलटी (संभाव्यता) का आकलन करेगा। इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के आधार पर कोल इंडिया बड़ी संख्या में एचईएमएम, खास तौर पर डंपरों में एलएनजी किट फिट करने का निर्णय लेगी। यदि यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो कंपनी अब सिर्फ एलएनजी इंजन वाली एचईएमएम खरीदने की योजना पर काम करेगी।

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