Chhattisgarh Terror Funding Case: धनबाद के पड़ोस में दुर्गापुर से जुड़ा तार, डीपीएस के पूर्व कर्मचारी को ले गई रायपुर पुलिस

Chhattisgarh Terror Funding रायपुर पुलिस राजू को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेगी। दरअसल 2013 खमतराई थाने में आतंकी फंडिंग का यह मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने राजू को यूएपीए एक्ट धोखाधड़ी आइपीसी-419 66 सी आइटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया है।

MritunjayPublish:Tue, 07 Dec 2021 11:58 AM (IST) Updated:Tue, 07 Dec 2021 12:14 PM (IST)
Chhattisgarh Terror Funding Case: धनबाद के पड़ोस में दुर्गापुर से जुड़ा तार, डीपीएस के पूर्व कर्मचारी को ले गई रायपुर पुलिस
Chhattisgarh Terror Funding Case: धनबाद के पड़ोस में दुर्गापुर से जुड़ा तार, डीपीएस के पूर्व कर्मचारी को ले गई रायपुर पुलिस

जागरण संवाददाता, दुर्गापुर। देश में आतंकियों का नेटवर्क मजबूत करने को पाकिस्तान से आतंकी फंडिंग हो रही है। बंगाल के दुर्गापुर के भी इस नेटवर्क से तार जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस ने आठ वर्ष पुराने ऐसे ही एक मामले में दुर्गापुर इस्पात संयंत्र (डीएसपी) के पूर्व कर्मचारी राजू खान को रविवार की रात दुर्गापुर बी-जोन महिष्कापुर स्थित उसके क्वार्टर से गिरफ्तार किया है। सोमवार को उसे दुर्गापुर कोर्ट में पेश करने के बाद तीन दिनों की ट्रांजिट रिमांड पर पुलिस ले गई। इस मामले में रायपुर जिला कोर्ट ने 25 नवंबर को ही आतंकी संगठन सिमी और इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े धीरज साव, जुबैर हुसैन, आयशा बानो और पप्पू मंडल को 10-10 साल की सजा सुनाई है। यह मामला रायपुर के खमतराई थाने में 25 दिसंबर 2013 में दर्ज हुआ था। राजू खान की गिरफ्तारी के बाद धनबाद पुलिस भी सतर्क हो गई है। धनबाद से दुर्गापुर की दूरी करीब 90 किलोमीटर है।

2013 से फरार था राजू खान

पुलिस सूत्रों ने बताया कि रायपुर पुलिस राजू को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेगी। दरअसल, 2013 खमतराई थाने में आतंकी फंडिंग का यह मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने राजू को यूएपीए एक्ट, धोखाधड़ी, आइपीसी-419, 66 सी आइटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया है। वर्ष 2013 में जांच में राजू खान की संलिप्तता सामने आई थी। उसकी तलाश पुलिस कर रही थी। वह फरार था, गुप्त सूचना पर रायपुर से आए पुलिस उपाधीक्षक विश्वदीपक त्रिपाठी व उनकी टीम ने उसे पकड़ा। राजू के बैंक खाते में काफी रुपया आया था।

नौकरी से इस्तीफा दे चुका है राजू

राजू दुर्गापुर इस्पात संयंत्र में कर्मचारी था। वर्ष 2016 में उसने नौकरी छोड़ दी थी। उसका कैसे इन अपराधियों से संपर्क हुआ, उसका इस नेटवर्क में क्या काम था, उसने अब तक कहां कहां पैसा पहुंचाया, उसका संपर्क किन किन लोगों से है, कितना पैसा उसके पास अब तक आया है, पुलिस यह पता करेगी।

ठेले वाले की गिरफ्तारी से खुला था आतंकी फंडिंग का राज

आतंकी फंडिंग का यह मामला 2013 में एक ठेले वाले ने खोला था। दरअसल, बिहार के जमुई जिले का धीरज साव रायपुर में अंडा-चिकन का ठेला लगाता था। उसे गुप्त सूचना पर पुलिस ने गिरफ्तार किया। उसने बताया था कि पाकिस्तान के एक आतंकी के संपर्क में वह है। आतंकी संगठन से उसके पास रुपये आते थे। उन रुपयों में से 13 फीसद कमीशन काटकर बाकी पैसा वह जुबैर, आयशा, राजू खान समेत अन्य के बैंक खाते में डालता था।