बेकारबांध... नहीं नहीं... अब सुंदरबांध तालाब कहिए जनाब

धनबाद, जेएनएन। बेकारबांध तालाब। जैसा नाम वैसा ही काम। एक-दो महीने पहले वह दाैर था जब यहां से गुजरने पर सड़ांध स्वागत करती थी। बदबू से हर इंसान नाक-मुंह सिकोड़ने लगता था। लुबी सर्कुलर रोड से गुजरने वाले लोगों के जेहन में तालाब के सड़े पानी से उठने वाली बास रच बस जाती थी। बावजूद पुरानी कहावत है घूरे के भी दिन फिरते हैं जो इस मामले में सटीक बैठती है। धनबाद नगर निगम को लोगों का दर्द दिखा बस तालाब के कायाकल्प की योजना बन गई। जो शानदार अंदाज में धरातल पर उतरी तो तालाब का साैंदर्य खिल उठा। पूरी रंगत ही बदल गई। जहां बदबू से स्वागत होता था वहां फूलों की महक और रात में चंद्र रश्मियां आपका इस्तकबाल कर रही हैं। इस तालाब की सूरत और सीरत दोनों बदल गई है। इस बदलाव को देखने के लिए लोग खिंचे चले आ रहे हैं। तालाब को देख उनके मुंह से अनायस ही निकल पड़ता है-बेकारबांध नहीं, अब सुंदरबांध तालाब कहिए जनाब! 

तालाब के तट पर शाम को पिकनिक स्पॉट सा नजाराः धनबाद शहर के बीच एक भी कोई ऐसा स्थान नहीं था जहां लोग बैठकर सुकून के दो पल गुजार सके। इस कमी को अब यह तालाब पूरा कर रहा है। 22 फरवरी 19 को राज्य के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने मेगा स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स धनबाद से इसका ऑनलाइन उद्घाटन किया। इस माैके मंत्री ने तालाब का कायाकल्प करने के लिए धनबाद नगर निगम के मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल की पीठ थपथपाई। उद्घाटन के बाद यह तालाब पिकनिक स्पॉट बन गया है। धनबाद जेल से सटे तालाब के किनारे पर बनाया गया पार्क इसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहा है। पार्क में फूल-पत्ती तो हैं ही म्यूजिकल फाउंटेन आकर्षण का केंद्र बन गया है। इस मनोरम और मनभावन दृष्य को देखने के लिए शाम को क्या बच्चे, क्या बड़े और क्या बूढ़े सब के सब जमे रहते हैं। 

जैसे तालाब में उतर आया हो झिलमिल सितारों सा आसमानः करीब 13 एकड़ में फैले तालाब की प्रकाश व्यवस्था दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। ऐसा लगता है जैसे तालाब में चांद उतर आया हो। तालाब में प्रकाश का ऐसा बिंब उभरता है जैसे झिलमिल सितारों सा आसमान हो। तालाब के चारों तरफ जॉगिंग ट्रैक का निर्माण किया गया है। इस ट्रैक पर सैकड़ों की संख्या में लोग सेहत बनाने के लिए सुबह-शाम जॉगिंग करते हुए दिख जाते हैं। इसकी सीढ़ियों को बनाने का काम चल रहा है। इस निर्माण के बाद तालाब की सुंदरता में और निखार आएगा। इस बदलाव पर करीब दस करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। 

झारखंड-बिहार में पहली बार किसी तालाब में लगा एसटीपीः पहले इस तालाब में धनबाद जेल का गंदा पानी सीधे गिरता था। इसके साथ ही आस-पास के गली-मोहल्ले की नाली का पानी भी तालाब में ही गिरता था।यह गंदे पानी ही तालाब से बास उठने का सबसे बड़ा कारण था। नालियों के गंदे पानी की सफाई के लिए तालाब के तट पर सीवरवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है। इसकी क्षमता 2.50 लाख लीटर प्रति दिन है। नालियों का गंदा पानी पहले एसटीपी में पहुंचता है। अब साफ पानी तालाब में गिर रहा है। इस तालाब में लगा एसटीपी भी गाैरव की बात है। क्योंकि पहली बार झारखंड-बिहार के किसी तालाब में एसटीपी लगा है। 

विवाद और आलोचना के बाद आखिर हो ही गया कायाकल्पः बेकारबांध तालाब जिसे कभी राजेंद्र सरोवर का भी नाम दिया गया था, पर धनबाद जिला परिषद का स्वामित्व है। लेकिन, शहर के बीच होने के कारण इसके कायाकल्प करने का बीड़ा धनबाद नगर निगम ने उठाया। तालाब जीर्णोधार और साैंदर्यीकरण का ठेका मेसर्स प्रधान कंस्ट्रक्शन कंपनी को साैंपा गया। इस दाैरान जिला परिषद और नगर निगम के बीच स्वामित्व को लेकर काफी विवाद हुआ। मामला राज्य सरकार तक पहुंचा। इससे कार्य में विलंब हुआ। विलंब को लेकर निर्माण एजेंसी और नगर निगम को राजनीतिक आलोचना का भी सामना करना पड़ा। हालांकि धनबाद नगर निगम के मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने हार नहीं मानी। और अब परिणाम सामने है। 

बेकारबांध तालाब जीर्णोद्धार और साैंदर्यीकरण से धनबाद की सुंदरता में चार चांद लग गए हैं। इसी तरह यह तालाब हमेशा सुंदर और साफ रहे, इसके लिए नगर निगम हमेशा मुस्तैद रहेगा। जनता का सपना था कि इस तालाब की रंगत निखरे उसे हमने पूरा किया। पार्यावरण संरक्षण के लिए नगर निगम भविष्य में भी ऐसे कदम उठाता रहेगा। 

-चंद्रशेखर अग्रवाल, मेयर, धनबाद नगर निगम। 

 

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