मार्क्सवादी युवा मोर्चा ने धनबाद में मनाई गई चंद्रशेखर आजाद की जयंती

मार्क्सवादी युवा मोर्चा ने शुक्रवार को बेकार बांध पॉलिटेक्निक रोडधनबाद में चंद्र शेखर आजाद की जयंती मनाया। इस अवसर पर मार्क्सवादी युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष पवन महतो ने चंद्र शेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन पुनर्गठन किया ।

Atul SinghFri, 23 Jul 2021 06:00 PM (IST)
मार्क्सवादी युवा मोर्चा ने शुक्रवार को बेकार बांध में चंद्रशेखर आजाद की जयंती। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

 जागरण संवाददाता, धनबाद: मार्क्सवादी युवा मोर्चा ने शुक्रवार को बेकार बांध ,पॉलिटेक्निक रोड,धनबाद में चंद्र शेखर आजाद की जयंती मनाया। इस अवसर पर मार्क्सवादी युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष पवन महतो ने चंद्र शेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उक्त कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मायुमो जिलाध्यक्ष पवन महतो ने कहा का शहीद चन्द्रशेखर आजाद का जीवन काल 23 जुलाई 1906 से 27 फरवरी 1931 के बीच था । ज्यादातर वे आजाद के नाम से लोकप्रिय थे । वे एक भारतीय क्रान्तिकारी थे।जिन्होंने हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापक राम प्रसाद बिस्मिल और तीन मुख्य नेता रोशन सिंह, राजेंद्र नाथ लाहरी ओर अशफकुला खान के मृत्यु के बाद नये नाम हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन पुनर्गठन किया ।

चन्द्र शेखर आजाद जब 15 साल के थे ।उस समय गांधी जी ने असहकार आंदोलन की घोषणा की थी ।उक्त आन्दोलन मे चंद्र शेखर आजाद शामिल हो गये थे,परिणाम स्वरूप उन्हे कैद कर लिया गया ।जब चंद्र शेखर आजाद को जज के सामने लाया गया । उनसे उनका नाम पूछने पर चन्द्र शेखर ने अपना नाम आजाद बताया था ओर पिता का नाम स्वतंत्र ओर निवास स्थान जेल बताया था ।उसी दिन से चन्द्रशेखर लोगों के बीच चंद्र शेखर आजाद के नाम से लोकप्रिय हुए ।

1922 मे जब गांधी जी ने चंद्र शेखर आजाद को असहकार आंदोलन से निकाल दिया तो आजाद क्रोधित होकर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन से जुड़ गए ओर वे वहां सक्रिय सदस्य बन गए एसोसिएशन के लिए चंदा सरकारी तिजोरियों को लुट कर जमा कर रहे थे ।जो समाजिक तत्वों पर आधारित हो आजाद 1925 के काकोरी ट्रेन लुट मे भी शामिल थे ।ब्रिटिश भारतीयों की क्रांतिकारी गति विधियों से डर चुके थे।अल्लाहबाद के अल्फ्रेड पार्क मे 27 फरवरी 1931 को ब्रिटिश पुलिस ने घेर लिया, आजाद अपनी बहादुरी से कई पुलिस कर्मी को मार गिराया । लंबे समय तक गोलीबारी के बाद आजाद नही चाहते थे कि वे ब्रिटिशों के हाथ लगे ओर पिस्तौल मे आखिरी गोली बची तो खुद को ही मार दी । आजाद का वह पिस्तौल हमे आज भी अल्लाहबाद म्यूजियम मे देखने को मिलता है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से सुरेश महतो, दुलाल बाउरी,किशन महतो,मनोज महतो,शंकर प्रमाणिक आदि शामिल थे।

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