Jharkhand: खनिज संपदा से भरपूर, फिर भी अपना प्रदेश गरीब; जानिए वजह

बिहार में कुपोषण के शिकार लोगों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। इसके बाद झारखंड मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ का नंबर है। मातृत्व स्वास्थ्य से वंचित आबादी स्कूल नहीं जाने रसोई ईंधन और बिजली से वंचित लोगों के मामले में भी बिहार की स्थिति सबसे खराब है।

MritunjaySat, 27 Nov 2021 11:47 AM (IST)
गरीब राज्यों में शुमार झारखंड राज्य (प्रतीकात्मक फोटो)।

जागरण संवाददाता, धनबाद। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा। बात जब खनिज और वन संपदा की चलती है तो झारखंड खूब इतराजा है। झारखंड अपने आप को खनिज और वन संपना में सबसे अमीर बताता है। लेकिन यहां के लोग गरीब हैं। यहां के लोगों की आय देश के सबसे नीचे के प्रदेश बिहार से एक पायदान ऊपर है। यह आश्चर्य करने वाली बात है न! नीति आयोग की रिपोर्ट जारी होने के बाद लोग कारणों को जानने में जुट गए हैं। आखिर झारखंड गरीब क्यों है? नीति आयोग ने अपनी पहली बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआइ) रिपोर्ट में कहा है कि बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश देश के सबसे निर्धन राज्यों में शामिल हैं। राज्यों के लिए ये आंकड़े चिंतित करने वाले हैं। इससे उबरने के उपाय होने चाहिए। सूचकांक के अनुसार, बिहार की 51.91 प्रतिशत आबादी गरीब है। इसके बाद झारखंड का नंबर है। वहां की 42.16 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर करती है। उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर है, जहां के 37.79 प्रतिशत लोग निर्धन हैं। मध्य प्रदेश में 36.65 प्रतिशत और मेघालय में 32.67 प्रतिशत लोग गरीब हैं।

केरल-गोवा अमीर राज्य

देश के जिन राज्यों में सबसे कम गरीबी है, उनमें केरल (0.71 प्रतिशत) शीर्ष पर है। इसके बाद गोवा (3.76 प्रतिशत), सिक्किम (3.82 प्रतिशत), तमिलनाडु (4.89 प्रतिशत) और पंजाब (5.59 प्रतिशत) का स्थान है। केंद्र शासित प्रदेशों में दादरा और नगर हवेली में सबसे ज्यादा गरीबी है। वहां 27.36 प्रतिशत लोग गरीब हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 12.58 प्रतिशत और दिल्ली में 4.79 प्रतिशत लोग गरीब हैं। बिहार में कुपोषण के शिकार लोगों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। इसके बाद झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ का नंबर है। मातृत्व स्वास्थ्य से वंचित आबादी, स्कूल नहीं जाने, रसोई ईंधन और बिजली से वंचित लोगों के मामले में भी बिहार की स्थिति सबसे खराब है।  बाल और किशोर मृत्यु दर श्रेणी में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे खराब है। इस मामले में इसके बाद बिहार और मध्य प्रदेश का स्थान है। स्वच्छता से वंचित आबादी के मामले में झारखंड की रैंकिंग सबसे खराब है।

जर्मनी के बाद सबसे ज्यादा झारखंड में खनिज संपदा

नीति आयोग ने राज्यों से जुड़ी रिपोर्ट जारी की है जिसमें देश के गरीब राज्यों में झारखंड को भी शामिल किया गया है। इस बारे में मनरेगा के पूर्व लोकपाल डॉ काशीनाथ चटर्जी का कहना है कि नीति आयोग ने जिस, माध्यम से एनालिसिस किया है वह बहुत सही नहीं भी हो सकता है। इसकी वजह यह है कि झारखंड खनिज संपदा से परिपूर्ण है और जर्मनी के बाद सबसे ज्यादा खनिज अगर कहीं है तो वह झारखंड राज्य के पास ही है। राज्यों की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट का आधार यहां के बाशिंदों का जीवन, औसत शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर होना चाहिए। अगर केरल की बात करें तो केरल में भी प्रति व्यक्ति आय कम है। बावजूद अन्य मामलों में उसकी तुलना विदेशों से की जा सकती है। झारखंड की जहां तक बात है तो झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध होने के बाद भी पिछड़ा हुआ है। हालांकि यह पिछड़ा ही रहेगा ऐसा नहीं है। इसके लिए इसके विकास के एजेंडे पर काम करना होगा। धनबाद का ही उदाहरण लें। धनबाद में वह सारी चीजें हैं जिससे विकास का खाका खींचा जा सकता है। पर इसके लिए मजबूत राजनीतिक आकांक्षा चाहिए जो नहीं दिखता है।

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