BCCL: धरी रह गई बंद कोयला खदानों में मछली पालन की योजना, डीएमएफटी फंड के जरिए करना था काम

जिला के कोयला खदानों में मछली पालन की योजना कागज पर ही सिमट कर रह गई। खदानों में मछली पालन कि योजना शुरू नहीं हो पाने से लगभग 400 मछुआरे बेरोजगार हो गए। कोयला खदान जिनसे कोयला खनन का कार्य पूरा कर लिया गया है

Atul SinghTue, 28 Sep 2021 04:49 PM (IST)
जिला के कोयला खदानों में मछली पालन की योजना कागज पर ही सिमट कर रह गई। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

जागरण संवाददाता, धनबाद : जिला के कोयला खदानों में मछली पालन की योजना कागज पर ही सिमट कर रह गई। खदानों में मछली पालन कि योजना शुरू नहीं हो पाने से लगभग 400 मछुआरे बेरोजगार हो गए। खुली खान परियोजना के तहत आने वाले कोयला खदान जिनसे कोयला खनन का कार्य पूरा कर लिया गया है। ऐसे खदानों में मछली पालन के लिए जिला मत्स्य कार्यालय ने सरकार के निर्देश पर योजना बनाई थी। इसके लिए राशि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट यानी डीएमएफटी धनबाद से लेना था। मगर अब तक यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई बरसात के मौसम में ही इस कार्य को पूरा कर देना था।

गौरतलब है कि पालन को बढ़ावा देने को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विभिन्न खन्न कार्यों के बाद बंद पड़ी खदानों का उपयोग मछली पालन के लिए उपयोग करने की बात कही थी। इस आदेश के बाद विभाग ने अपने सभी जिला कार्यालायों से योजनाएं मांगी थी। बताते चले की कोयला खदानों में मछली पालन करने की योजना वर्ष 2011 में भी शुरू की गई थी। निरसा प्रखंड के कई खदानों को उपयोग इस कार्य के लिए किया गया था लेकिन कोयला खनन कंपनियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण या योजना बंद हो गई थी। मामले में मत्स्य पदाधिकारी मुजाहिद अंसारी ने बताया कि अभी तक उन्हें बंद खदानों की सूची भी नहीं मिली है। सूची मिलने के बाद उन्हें बीसीसीएल से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी चाहिए ताकि बाद में मछली पालन होने के बाद कोई रुकावट ना हो सके। सारी चीजें हो जाने के बाद ही डीएमएफटी से उन्हें इस कार्य के लिए फंड दिया जाएगा।

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