आमाघाटा प्रकरण : कारोबारी कुंभनाथ सिंह, पप्पू सिंह सहित अन्य पर प्रशासन का शिकंजा

आमाघाटा प्रकरण : कारोबारी कुंभनाथ सिंह, पप्पू सिंह सहित अन्य पर प्रशासन का शिकंजा

आमाघाटा में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मामले में लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं। कारोबारी कुंभनाथ सिंह बिल्डर्स अनिल सिंह पप्पू सिंह समेत कई लोगों ने जिस बंदोबस्ती का हवाला देकर जमीन खरीदा है। वह प्रथम दृष्टया में प्रशासन को फर्जी लग रहा है।

JagranThu, 04 Mar 2021 05:33 AM (IST)

जागरण संवाददाता, धनबाद : आमाघाटा में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मामले में लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं। कारोबारी कुंभनाथ सिंह, बिल्डर्स अनिल सिंह, पप्पू सिंह समेत कई लोगों ने जिस बंदोबस्ती का हवाला देकर जमीन खरीदा है। वह प्रथम दृष्टया में प्रशासन को फर्जी लग रहा है। इस संबंध में एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) चंदन कुमार ने भूमि सुधार उप समाहर्ता को पत्र लिखकर आमाघाटा में कोका मोची को दी गई बंदोबस्ती अभिलेख की जांच करने का निर्देश दिया है। एडीएम ने अंदेशा जताया है कोका मोची के परिवार जिस बंदोबस्ती कागजात को दिखा रहे हैं, वह कागजात संदिग्ध हैं। एडीएम ने तीन दिनों के अंदर जांच करके रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। वहीं जांच के निर्देश के बाद जमीन कब्जाधारियों में हड़कंप मचा हुआ है। जानें क्या है बंदोबस्ती में

एडीएम ने लिखा है कि 1955- 56 आमाघटा मौजा 9, खाता नंबर 28, प्लॉट नंबर 187, रकबा 70 डिसमिल जमीन की बंदोबस्ती पूरन रविदास उर्फ मंगल रविदास साकिम सुगियाडीह दिखा रहे हैं। यह बंदोबस्ती 1955- 56 में कोका मोची के नाम से दिखाया गया है। लेकिन कागजात में कई त्रुटियां हैं। प्रथम दृष्टया में क्या-क्या गड़बड़ी 1-कथित बंदोबस्ती पर्चा पर कार्यालय का नाम अनुमंडल कार्यालय धनबाद अंकित है, परंतु इस पर्चा पर मोहर अथवा सील अंचल कार्यालय धनबाद का लगा हुआ है। 2-कथित बंदोबस्ती पर्चा के शीर्षक में हुकुमनामा लिखा हुआ है, जो कि राजा या जमीदार द्वारा दिया जाता था, ना कि अंचल अधिकारी या अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा 3-बंदोबस्ती पर्चा के अनुसार कोका मोची को प्लॉट नंबर 187 में 70 डिसमिल तथा प्लॉट नंबर 161 में 1.50 एकड़ अर्थात कुल 2.2 एकड़ बंदोबस्ती का दावा है। जबकि प्लॉट नंबर 187 और प्लॉट नंबर 161 एक दूसरे से सटे हुए प्लॉट नहीं है। प्लॉट नंबर 187 काफी बड़ा (13.39) एकड़ का प्लॉट है, जो पूरी बंदोबस्ती इसमें ना कर दूर के किसी अन्य प्लॉट की बंदोबस्ती इस पर्चे में करना संदेह उत्पन्न करता है। 4-बंदोबस्ती का स्वरूप अहस्तांतरणीय होता है। लेकिन इस 70 डिसमिल बंदोबस्ती भूमि को आधार बनाकर अनिल सिंह (लेमन चिल्ली), कुंभनाथ सिंह, पप्पू सिंह तथा अन्य कई व्यक्तियों के साथ कई एकड़ भूमि का हस्तांतरण (खरीद बिक्री) प्लॉट संख्या 187 में किया गया है। 5-इसी क्रम में मौजा आमाघाटा के गैर आबाद खाता संख्या 28 में 2 एकड़ भूमि का एक बंदोबस्ती पर्चा कोका मांझी के नाम से उनके वंशजों द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो अपर समाहर्ता धनबाद से कार्यालय से निर्गत बताया गया है। इस कथित शीर्षक में भी हुकुमनामा लिखा हुआ है। जबकि बंदोबस्ती पर्चा ना तो अपर समाहर्ता निर्गत करते हैं और ना ही किसी राजस्व अधिकारी द्वारा हुकुमनामा निर्मित किया जाता है। 6- वंशजों द्वारा द्वारा वर्ष 1955-56 से 2008-09 तक के लिए निर्गत लगान राशि की छाया प्रति भी उपलब्ध कराई गई है। जबकि किसी भी भूमि का 50 से 52 वर्षों का एकमुश्त लगान वसूल करने हेतु वरीय अधिकारियों का आदेश अनिवार्य होता है। इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन राजस्व कर्मचारी की भूमिका भी अधिक संदिग्ध प्रतीत होती है।

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