खतरनाक क्षेत्र में रहनेवाले सभी लोगों का होगा पुनर्वास : पीएमओ टीम

जागरण संवाददाता झरिया-तिसरा पीएमओ के निर्देश पर गृह मंत्रालय राष्ट्रीय आपदा और भू प्रबंध

JagranMon, 20 Sep 2021 07:15 PM (IST)
खतरनाक क्षेत्र में रहनेवाले सभी लोगों का होगा पुनर्वास : पीएमओ टीम

जागरण संवाददाता, झरिया-तिसरा : पीएमओ के निर्देश पर गृह मंत्रालय राष्ट्रीय आपदा और भू प्रबंधन की उच्च स्तरीय टीम ने सोमवार को बीसीसीएल के सीएमडी व अन्य वरीय अधिकारियों के साथ करमाटांड़, बेलगढिया पुनर्वास कालोनी के बाद अग्नि व भू धंसान प्रभावित घनुडीह, मोहरीबांध क्षेत्र का दौरा किया।

टीम के सदस्यों ने मोहरीबांध, घनुडीह, खटाल पट्टी जाकर स्थिति का जायजा लिया। उच्चस्तरीय टीम का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय भू संपदा विभाग के अवर सचिव हुकुम सिंह मीणा ने मोहरीबांध बिजली घर व घनुडीह खटाल पट्टी पहुंच कर लोगों से बात की। स्थानीय लोगों ने टीम को बताया कि हम लोग काफी कठिन परिस्थिति में रह रहे हैं। जल्द पुनर्वास कराया जाए। रोजगार के साथ घर मिलने पर हम लोग चले जाएंगे। स्थानीय लोगों ने जोरदार तरीके से रोजगार के साथ सुरक्षित जगह पर जल्द पुर्नवास करने की मांग की। स्थानीय वरुण कुमार वर्मा, श्याम हीरा भुइयां, आशा देवी, कुंती देवी ने टीम से कहा कि वर्षों से जान हथेली पर रखकर रह रहे हैं। हमलोगों का पुनर्वास नहीं किया जा रहा है। टीम के वरीय अधिकारी हुकुम सिंह मीणा व अन्य अधिकारियों ने कहा कि जल्द सभी को पुनर्वास किया जाएगा। खतरनाक इलाके में किसी को रहने नहीं दिया जाएगा। यहीं के शंकर रवानी अनिल चौहान, वरुण कुमार, बंसी भुइयां, महेंद्र भुइया, छोटेलाल भुइयां ने कहा कि बगल में ही भू धंसान के कारण कुछ साल पहले एक महिला की जान चली गई थी। यह काफी खतरनाक क्षेत्र है। सर्वे भी हो चुका है, लेकिन बीसीसीएल व जेआरडीए प्रबंधन हमलोगों को हटा नहीं रहा है। टीम ने बीसीसीएल व जेआरडीए के अधिकारियों को जमीनी आग से प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर बसाने का निर्देश दिया।

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कट आफ डेट 2004 का मुद्दा छाया रहा

पीएमओ की उच्चस्तरीय टीम के दौरे में कई लोगों ने पुनर्वास के लिए 2004 के कट आफ डेट को आधार बनाने का विरोध किया। कहा कि यहां जो लोग 2004 के पहले से रह रहे हैं और उनके पास प्रमाण भी हैं। उन्हें भी पुनर्वास नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा भी कई लोग रह रहे हैं। टीम ने कहा कि सबसे पहले जिनका 2004 का वोटर कार्ड या अन्य प्रमाण पत्र है। उनको पहले विस्थापित किया जाएगा। इसके बाद अन्य लोगों को विस्थापित करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। टीम ने बाकी बचे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य कोई योजना का लाभ देकर हटाने की बात कही।

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परियोजना विस्तारीकरण के समय बसाया, अब नहीं ले रहा सुध

यहां के लोगों ने बताया कि घनुडीह परियोजना विस्तारीकरण के समय 15 साल पूर्व प्रबंधन ने हर तरह की सुविधा देने की बात कह यहां बसाया था, लेकिन अब कोई सुविधा नहीं मिल रही है। तीन-चार साल पहले बगल में भू धंसान से एक महिला की मौत हो गई थी। इसके बाद कुछ लोगों को ही घर मिला। अभी भी 365 परिवार यहां रह रहे हैं। टीम के अधिकारी हुकुम सिंह मीणा ने कहा कि अग्नि प्रभावित क्षेत्र में जान जोखिम में डालकर रह रहे लोगों को पहले विस्थापन कैसे कराया जाए। इस कार्य में लगे हैं। खतरनाक इलाके में रह रहे सभी लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाना है। क्योंकि जिदगी महत्वपूर्ण है। वहीं बीसीसीएल के अधिकारी ने कहा कि सर्वे होने के बाद घर एलाटमेंट जेआरडीए के तहत होता है, लेकिन कई लोग यहां से नहीं जा रहे हैं।

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टीम के साथ ये अधिकारी थे साथ : टीम में सीएमडी पीएम प्रसाद, अधिकारी शेखर शरण, आइआइटी-आइएसएम के प्रो आरएम भट्टाचार्जी, कोयला मंत्रालय के प्रोजेक्ट एडवाइजर आनंदजी प्रसाद, डीएसपी सिदरी अभिषेक कुमार, लोदना क्षेत्र के जीएम अरुण कुमार, कुजामा के परियोजना पदाधिकारी केके सिंह, केएन जायसवाल, सपन मंडल व जिला प्रशासन, पुलिस व सीआइएसएफ के अनेक अधिकारी थे। घनुडीह से निकलने के बाद टीम न्यू गोधर कुसुंडा कोलियरी परियोजना का भी निरीक्षण किया। यहां लगी आग और कोयला उत्पादन को व्यू प्वाइंट से देखा। इसके बाद सेन्द्रा बांसजोड़ा कोलियरी की ओर रवाना हो गई।

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गोकुल पार्क में टीम ने किया पौधारोपण

उच्चस्तरीय टीम ने बाद में लोदना क्षेत्र के गोकुल पार्क में पौधारोपण किया। पार्क की हरियाली व आसपास परियोजना से निकल रहे कोयला को भी व्यू प्वाइंट से देखा। नीचे मां रक्षा काली धाम में रहने वाले लोगों से समस्याओं की भी जानकारी ली। बीसीसीएल के अधिकारियों ने पार्क के बारे में टीम को बताया कि परियोजना से निकलने वाले ओबी को समतल करके यह पार्क बनाया गया है, ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे। नीचे परियोजना विस्तार के बाद अग्नि प्रभावित क्षेत्र के लोगों को यहां लाकर बसाया गया।

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