कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दाैरान चाल धंसी, एक की माैत Dhanbad News

मुगमा, जेएनएन। ईसीएल मुगमा क्षेत्र के कापासारा आउटसोर्सिग में सोमवार की देर रात अवैध उत्खनन के दौरान मिट्टी व पत्थर गिरने से एक व्यक्ति की घटनास्थल पर ही मौत हो गई व एक व्यक्ति घायल हो गया। आनन-फानन में उसके साथी शव तथा घायल को लेकर भाग गए। वहीं घायल व्यक्ति का इलाज अन्यत्र अस्पताल में गुपचुप तरीके से किया जा रहा है। हालांकि घटना की पुष्टि न तो आउटसोíसंग प्रबंधन कर रही है और न ही स्थानीय पुलिस।

कैसे हुई घटना : सोमवार की देर रात में दर्जनों लोग कापासारा आउटसोर्सिंग में कोयला का अवैध उत्खनन करने पहुंचे। वे लोग कोयला का उत्खनन कर रहे थे कि अचानक जोरदार आवाज के साथ मिट्टी व पत्थर भरभरा कर गिर गया, जिसमें वे लोग दब गए। इस घटना में बंगाल के सीतारामपुर का रहने वाले एक व्यक्ति की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जबकि दूसरा बेला भुईयां गंभीर रुप से घायल हो गया। इसके बाद उसके अन्य साथी मिट्टी व पत्थर को हटाकर किसी तरह मृतक को निकाल कर गए। जबकि मुगमा मोड़ निवासी बेला भूइयां नामक व्यक्ति घायल हो गया। वहीं मृतक को बंगाल से आए उसके अन्य साथी लेकर चले गए।

बंगाल से लोग आते है अवैध उत्खनन करने : कापासारा में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में सीतारामपुर, बराकर और कुल्टी के लोग आउटसोíसंग में कोयला का उत्खनन करने आते हैं। इनलोगों से स्थानीय कोयला कारोबारी झोड़ी के हिसाब से कोयला खरीदते हैं। जिसे बाद में आसपास के स्थानीय भट्ठों में आसानी से खपाया जाता है।

रात में होमगार्ड के जवान उत्खनन स्थल पर नहीं रहते : ईसीएल मुगमा क्षेत्र में अवैध उत्खनन को रोकने के लिए इन दिनों निजी सुरक्षा प्रहरियों को हटाकर ईसीएल ने होमगार्ड जवानों को तैनात किया है। लेकिन होमगार्ड जवान तत्परता से अपनी डयूटी नहीं निभाते हैं। जब सीआइएसएफ और ईसीएल सुरक्षा कर्मियों के आने का समय होता है तो होमगार्ड जवान अपनी ड्यूटी वाले स्थान पर चले जाते हैं। इसका फायदा रात में कोयला उत्खनन करने वाले बखूबी उठाते हैं। वहीं ईसीएल मुगमा क्षेत्र में कोयला चोरी रोकने के लिए जिला प्रशासन व स्थानीय प्रबंधन के बीच कई बार बैठक हो चुकी है। लेकिन अवैध उत्खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सितंबर माह में ग्रामीण एसपी अमन कुमार ने मुगमा क्षेत्र प्रबंधन के साथ बैठक कर कोयला चोरी रोकने को लेकर आपस में विचार विमर्श किया गया था। लेकिन आज तक कोयला चोरी रोकने में जिला प्रशासन व स्थानीय प्रशासन विफल साबित हुए।

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