Dhanbad Scam: 2 साल पहले बहे बरबेंदिया पुल में 22 करोड़ का घपला

बराकर नदी पर अधूरे बने बरबेंदिया पुल के निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई थी। 12 वर्ष बाद जाकर इस पर अब कार्रवाई होने जा रही है। जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही होती रही है। इस मामले में ग्रामीण विकास सचिव मनीष रंजन को तलब किया जाएगा।

Atul SinghSat, 24 Jul 2021 11:54 AM (IST)
बराकर नदी पर अधूरे बने बरबेंदिया पुल के निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई थी। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

आशीष स‍िंह, धनबाद: बराकर नदी पर अधूरे बने बरबेंदिया पुल के निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई थी। 12 वर्ष बाद जाकर इस पर अब कार्रवाई होने जा रही है। अभी तक जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही होती रही है। इस मामले में ग्रामीण विकास सचिव मनीष रंजन, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के मुख्य अभियंता समेत उस समय परियोजना से जुड़े सभी पदाधिकारियों को तलब किया जाएगा। बरबेंदिया पुल में 22 करोड़ रुपये का घपला सामने आया है। गुरुवार को झारखंड सरकार की विधानसभा प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति की समीक्षा बैठक में यह बात निकल कर सामने आई। ग्रामीण विकास प्रमंडल के पदाधिकारियों ने यह जानकारी दी कि उस समय परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों का पांच-पांच इंक्रीमेंट काटा गया है। साथ ही ठेकेदार को डिबार कर दिया गया है। इस पर सभापति रामदास सोरेन ने कहा कि अधिकारियों पर की गई कार्रवाई की संचिका समिति के समक्ष पेश किया जाए। साथ ही डिबार किए गए ठेकेदार किसी अन्य फर्म के नाम से काम कर रहा है या नहीं या उसका डिबार खत्म हो गया, इसकी भी जानकारी दें। निर्माण के समय भुगतान की गई राशि की वसूली के लिए अब तक क्या कार्यवाही की गई है, इसकी भी जानकारी समिति ने तलब की है।

निरसा प्रखंड के अंतर्गत 2008-09 में बराकर नदी पर बरबेंदिया पुल का निर्माण 36 करोड़ 87 लाख से शुरू हुआ था। एक वर्ष बाद ही 25 अगस्त 2009 को नदी के बहाव से दो पिलर ध्वस्त होकर पानी में बह गए। तीन पिलर झुक कर टेढ़े हो गए। एक बरसात भी पुल नहीं झेल पाया। इसके बाद से निर्माण अधूरा है। अब तक ठेकेदार को 22 करोड़ दस हजार रुपये का भुगतान भी हो चुका है। बरबेंदिया पुल से जामताड़ा जिले के वीरगांव की दूरी मात्र एक किलोमीटर है, यहां तक पहुंचने के लिए 53 किलोमीटर का सफर कर बंगाल होकर जाना पड़ता है। इस पुल के बन जाने से जामताड़ा, देवघर, दुमका के कई प्रखंडों के लाखों लोगों का आवागमन का माध्यम आसान हो जाता। ग्रामीण आवागमन के लिए पश्चिम बंगाल का सड़क मार्ग अपनाने के साथ ही नाव या बांस के पुल का इस्तेमाल करते हैं। समिति में सभापति रामदास सोरेन घाटशिला, दशरथ गागराई तमाड़, राजेश कच्छप खिजरी, समरी लाल कांके शामिल थे।

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