2002 से आयोजित अखंड महाकीर्तन की मनी 19वीं वर्षगांठ

संवाद सहयोगी इटखोरी (चतरा) ऐतिहासिक मां भद्रकाली मंदिर परिसर में वर्ष 2002 से आयोजित अखंड महाकीर्तन का 19वां वर्षगांठ मनाया गया।

JagranTue, 21 Sep 2021 07:42 PM (IST)
2002 से आयोजित अखंड महाकीर्तन की मनी 19वीं वर्षगांठ

संवाद सहयोगी, इटखोरी (चतरा): ऐतिहासिक मां भद्रकाली मंदिर परिसर में वर्ष 2002 से आयोजित अखंड महाकीर्तन की 19वीं वर्षगांठ सादगी पूर्ण माहौल में मनाई गई। इस मौके पर उपस्थित कीर्तन समिति के सदस्यों तथा श्रद्धालु भक्तों ने हरे राम-हरे कृष्ण का कीर्तन आगे भी निरंतर जारी रखने का निर्णय लिया। अखंड महाकीर्तन की 19वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम की शुरुआत कीर्तन समिति के दिवंगत संस्थापक अध्यक्ष रामसेवक सिंह तथा दिवंगत संचालक सूरज बाबा के चित्र पर पुष्पांजलि के माध्यम से श्रद्धांजलि देकर हुआ। कीर्तन समिति के अध्यक्ष शिव सेवक सिंह, सचिव श्याम प्रसाद सिंह, कुमार यशवंत नारायण सिंह, सीताराम सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, डा. दुलार हजाम, लक्ष्मी सिंह समेत कीर्तन के वर्षगांठ कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु भक्तों ने दिवंगत आत्माओं के चित्र पर फूल माला चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। तत्पश्चात कीर्तन समिति के सचिव श्याम प्रसाद सिंह ने सदस्यों तथा श्रद्धालु भक्तों के बीच कीर्तन समिति के आय व खर्च का ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने उपस्थित जनों को बताया कि इस वर्ष कीर्तन के संचालन में हुए खर्च के अनुरूप आय नहीं हो पाई है। कोरोना महामारी की वजह से कीर्तन की आय भी प्रभावित हुई है। लेकिन इस आर्थिक नुकसान को शीघ्र पाट लिया जाएगा। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि जो भी श्रद्धालु भक्त कीर्तन समिति का सदस्य बनना चाहते हैं वह अपनी स्वेच्छा से अपने नाम का प्रस्ताव समिति के समक्ष रखें। कीर्तन की वर्षगांठ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कीर्तन समिति के अध्यक्ष शिव सेवक सिंह ने अस्वस्थता की वजह से अध्यक्ष का पद छोड़ने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि युवा लोग अब इस कीर्तन का संचालन करें। ताकि हरे राम-हरे कृष्ण का अखंड कीर्तन लगातार जारी रह सके। मालूम हो कि पूरी के क्षेमपूरी मठ के मठाधीश स्वामी रामानंद जी महाराज की प्रेरणा से वर्ष 2002 में माता के दरबार में अखंड महाकीर्तन का संचालन शुरू हुआ था। तब से लेकर आज तक अखंड महाकीर्तन निरंतर जारी है। कीर्तन के वर्षगांठ कार्यक्रम में भाजपा के जिला महामंत्री मृत्युंजय सिंह, शंकर चंद्रवंशी, सेवानिवृत्त शिक्षक शालिग्राम सिंह, संत सिंह आदि उपस्थित थे।

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