संक्रमित की मौत के बाद शव को लेने से किया इन्कार

जागरण संवाददाता बोकारो लोगों को मर्यादा व अन्य शिक्षा देने वाले शिक्षक ही पथ से विचलित हो ज

JagranFri, 07 May 2021 11:11 PM (IST)
संक्रमित की मौत के बाद शव को लेने से किया इन्कार

जागरण संवाददाता, बोकारो : लोगों को मर्यादा व अन्य शिक्षा देने वाले शिक्षक ही पथ से विचलित हो जाय तो दूसरे को क्या कहा जाए। शुक्रवार को यह बोकारो में देखने को मिला। बोकारो स्टील सिटी कॉलेज के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर ने अपने ही ससुर का शव लेने से इन्कार कर दिया। प्रोफेसर ने कहा कि उनका परिवार कोरोना संक्रमित है। ऐसे में प्रशासन उसके ससुर के शव को लावारिश घोषित कर उसका अंतिम संस्कार करा दे। सुबह चार बजे प्रोफेसर के ससुर पीके सेन की कोरोना से सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद शाम चार बजे तक प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के कर्मी फोन करते रहे लेकिन प्रोफेसर का दिल नहीं पसीजा। वे दिवंगत ससुर के अंतिम दर्शन को नहीं आए और न ही किसी को अस्पताल भेजा।

मजबूरी में सीओ चास दिलीप साहू की अध्यक्षता में गठित लावारिश शव के अंतिम संस्कार करने वाली टीम ने किसी तरह शव को लपेटा। वन विभाग ने लकड़ी दी और नगर निगम के कर्मियों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया। यह पहली घटना नहीं है। अब तक छह ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने परिवार के सदस्यों व पहचान वालों की कोरोना से मृत्यु होने के बाद शव लेने से इंकार कर दिया है। छह में से दो सामान्य लोग थे एक होटल का कर्मचारी था तो दूसरा भिक्षुक था। होटल के कर्मचारी को मालिक ने काम लिया , बीमार पड़ने पर भर्ती कराया और जब कर्मचारी मर गया तो उसका शव लेने कोई नहीं पहुंचा।

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पहली घटना : आशा देवी उम्र 54 वर्ष दुगदा की रहने वाली महिला थी । 27 अप्रैल को भर्ती कराया गया था। 28 को मौत हो गई। इसके बाद कोई लेने नहीं आया।

दूसरी घटना : छाया मोहित पंडित उम्र 55 वर्षीय महिला जिसे मानव सेवा आश्रम के माध्यम से भर्ती कराया गया। 22 को भर्ती कराया गा 26 को मौत हो गई पर कोई लेने नहीं आया।

तीसरी घटना : कालाटोर पारवां उम्र 63 वर्षीय सेक्टर -1 निवासी 16 अप्रैल को भर्ती कराया गया और 26 अप्रैल को मौत हो गई ।

चौथी घटना : पीके सेन उम्र 100 वर्ष सेक्टर-चार जी चार मई को भर्ती कराया गया सात मई को मौत हो गई ।

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ऐसे लोगों को करेंगे कार्रवाई

चास के अंचलाधीकारी दिलीप साहू का कहना है कि यह अमानवीय कृत्य है। यदि हम लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ ऐसा करेंगे तो समाज कैसे चलेगा। जिला प्रशासन उन लावारिश शवों का अंतिम संस्कार कर सकता है जिनका कोई नहीं है। यदि संपन्न लोग भी इस प्रकार अपने घर के बुजुर्गों को अस्पताल में भर्ती कराकर छोड़ देंगे तो अव्यवस्था कायम हो जाएगी। ऐसे लोगों पर विधि सम्मत कार्रवाई के लिए वरीय अधिकारियों से विचार विमर्श करेंगे।

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