शहर को स्वच्छ और बेहतर बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से हो रहा काम

शहर में आबादी और वाहनों के साथ कई समस्याओं में इजाफा हो रहा है। देविका प्रोजेक्ट के काम की वजह से शहर की सड़कें और गलियां बदहाल र्ह। रेहड़ी फड़ी वालों पर न तो नगर परिषद की कार्रवाई और न ही चेतावनी का कोई असर होता है। कैटल पांड और पार्किंग न होना भी एक बड़ी समस्या है। ऐसे में शहर को बेहतर बनाने के लिए नगर परिषद के समाने कई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से नगर परिषद के पास क्या योजना है इसको लेकर नगर परिषद ऊधमपुर के सीईओ अमित चौधरी के साथ दैनिक जागरण संवाददाता ऊधमपुर अमित माही की विशेष बातचीत..

JagranMon, 18 Oct 2021 07:43 PM (IST)
शहर को स्वच्छ और बेहतर बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से हो रहा काम

शहर में आबादी और वाहनों के साथ कई समस्याओं में इजाफा हो रहा है। देविका प्रोजेक्ट के काम की वजह से शहर की सड़कें और गलियां बदहाल र्ह। रेहड़ी फड़ी वालों पर न तो नगर परिषद की कार्रवाई और न ही चेतावनी का कोई असर होता है। कैटल पांड और पार्किंग न होना भी एक बड़ी समस्या है। ऐसे में शहर को बेहतर बनाने के लिए नगर परिषद के समाने कई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से नगर परिषद के पास क्या योजना है, इसको लेकर नगर परिषद ऊधमपुर के सीईओ अमित चौधरी के साथ दैनिक जागरण संवाददाता, ऊधमपुर अमित माही की विशेष बातचीत.. एक सीईओ के तौर पर ऊधमपुर में नगर परिषद के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

नगर परिषद शहर के विकास और बेहतरी के लिए काम करती है। इसमें नगर परिषद को समाज के हर वर्ग, हर संगठन और हर व्यक्ति के सहयोग की जरूरत है। ऊधमपुर में यह सहयोग कुछ हद तक मिल भी रहा है, मगर पूरी तरह से सहयोग नहीं मिल रहा। उम्मीद है कि हर आदमी जिम्मेदारी से नगर परिषद को पूर्ण सहयोग कर शहर को बेहतर बनाने में अपना योगदान देगा।

डोर-टू-डोर कचरा उठाने की फिर से शुरू की गई सेवा कैसी चल रही है?

नगर परिषद ने शहर में घर-घर से कचरा उठाने की सेवा को हाल ही में फिर से शुरू किया है। करीब डेढ़ माह तक बंद रहने पर ही लोगों को इस सेवा का महत्व समझ आ गया था। अब जब यह सेवा दोबारा शुरू की गई है तो कुछ लोग सेवा प्रदान करने वालों को सैनिटेशन चार्ज देने से मना कर रहे हैं। कुछ लोग कहते हैं कि वह उनको कचरा नहीं देते तो चार्ज क्यों दे। ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि वह भले ही अपना कचरा डोर-टू-डोर वालों को नहीं देते, मगर अपना कचरा किसी डस्टबीन, नाली या वार्ड में कहीं पर तो फेंकते हैं, जिसे अंतत: नगर परिषद ही उठाती है। इसलिए लोगों को गैरजिम्मेदारी भरा बर्ताव छोड़ कर शहर के जिम्मेदार नागरिक की तरह शहर को स्वच्छ और बेहतर बनाने में अपना योगदान देना चाहिए।

-कैटल पांड न होने की वजह से लावारिस मवेशियों की बड़ी समस्या है, कब तक हल किया जाएगा?

शहर में कैटल पांड को शुरू करने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। कैटल पांड में मवेशियों की सुविधा के लिए पानी, चारे और शेड सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए अनुमानित 14 लाख रुपये की योजना तैयार है। एक सप्ताह के अंदर इसका टेंडर निकाला जाएगा और इस माह में कैटल पांड का काम शुरू हो जाएगा।

-ऊधमपुर शहर पार्किंग विहीन है। शहर की यह पुरानी और बड़ी समस्या कैसे होगी?

-शहर में पार्किंग की सख्त जरूरत है। इसके लिए पार्किंग के दो तीन प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। मीट मार्केट में पार्किंग, एमसी ऑफिस में मल्टीलेवल पार्किंग की डीपीआर तैयार हो चुकी है, जिसे मंजूरी के लिए सचिवालय भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही टेंडर जारी किए जाएंगे। उसके बाद इसका काम शुरू हो जाएगा। उम्मीद है है अगले वर्ष शहर को पार्किंग की समस्या से निजात मिल जाएगी।

-अवैध रेहड़ी फड़ी पर शिकंजा कसने में नगर परिषद विफल क्यों हो रही है, क्या कोई असरदार कार्रवाई होगी ?

ऊधमपुर में कुल 410 पंजीकृत रेहड़ी फड़ी वाले हैं। नगर परिषद की टीम इसके अलावा अन्य रेहड़ी फड़ी वालों पर कार्रवाई करती है। जुर्माना किया जाता है, रेहड़ियां भी जब्त की जाती हैं। अभी तक करीब 50 ऐसी रेहड़ियां जब्त भी की जा चुकी हैं। नगर परिषद की मंशा किसी को नुकसान पहुंचाने की नहीं होती, मगर अवैध रेहड़ी फड़ी वालों की वजह से जाम और अन्य दिक्कतों के कारण ऐसा करना पड़ता है। काम करने का अधिकार हर किसी को है, लेकिन इसके लिए कुछ नियमों और शर्तों को मानना पड़ेगा। नगर परिषद ने शहर में कई जगह पर नो रेहडी फड़ी जोन बनाएं हैं, लोगों को मुनादी कर बताया भी गया, मगर फिर भी अवैध रेहड़ी लगाने वाले वाले मानने को तैयार नहीं। अवैध रूप से और मनमाने ढंग से काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके लिए नगर परिषद अवैध रेहड़ी फड़ी वालों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की योजना बना रही है।

राजस्व के बढ़ाने के लिए नगर परिषद क्या प्रयास कर रही है ?

नगर परिषद के पास राजस्व के सीमित स्रोत है। इनमें लारी अड्डा, पार्किंग, टैक्स कलेक्शन, दुकानों का सालाना किराया, नक्शे और एनओसी आदि शामिल हैं। डोर-टू-डोर सेवा प्रदान करने वालों से राजस्व प्राप्त करना शुरू किया है। कैटल पांड बना कर उसे ठेके पर देने का फैसला लिया गया है। पार्किंग बन जाने के बाद उसका भी ठेका दिया जाएगा। राजस्व के स्त्रोत बढ़ाने के लिए नगर परिषद प्रयास कर रही है।

पालीथिन प्रयोग की रोकथाम के लिए नगर परिषद किस तरह से काम कर रही है?

हर शहरवासियों को शहर ही नहीं धरती के प्रति भी जिम्मेदारी है। पालीथिन धरती और पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक है। इसलिए लोगों को स्वेच्छा से इसका प्रयोग बंद करना होगा। वैसे नगर परिषद तो नियमित रूप से प्रतिबंधित पालीथिन प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई कर रही है, आने वाले दिनों में कार्रवाई और व्यापक स्तर पर की जाएगी।

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