जिले में स्प्रिंग सीजन में बिकी 4.47 करोड़ की कोकून

अमित माही ऊधमपुर ऊधमपुर में सेरीकल्चर विभाग में जारी कोकून मंडी संपन्न हो गई। 17 दि

JagranFri, 30 Jul 2021 06:43 AM (IST)
जिले में स्प्रिंग सीजन में बिकी 4.47 करोड़ की कोकून

अमित माही, ऊधमपुर :

ऊधमपुर में सेरीकल्चर विभाग में जारी कोकून मंडी संपन्न हो गई। 17 दिनों तक चली मंडी में 4.47 करोड़ रुपये की कोकून की बिक्री हुई। इस बार कोकून उत्पादकों को औसतन 876 रुपये प्रति किलोग्राम दाम मिले। बोली में ऊधमपुर सहित जम्मू कश्मीर के अलावा अन्य राज्यों से आए बोलीदाताओं ने हिस्सा लिया। इस बार पिछली बार से 38 लाख रुपये अधिक कोकून की बिक्री हुई है।

ऊधमपुर जिले के कोकून उत्पादकों के लिए यह साल अच्छा रहा है। पिछले सीजन की तुलना में इस बार कोकून का कम उत्पादन होने के बावजूद कोकून कीट पालकों को उनकी फसल की पिछली बार से 38 लाख रुपये अधिक कीमत वसूल हुई है। सेरीकल्चर विभाग के मुताबिक पिछले वर्ष जिले में कोकून उत्पादकों ने कोकून की 1.79 लाख किलोग्राम फसल का उत्पादन किया था। जिसकी बिक्री से 4.09 करोड़ रुपये की कीमत उत्पादकों को प्राप्त हुई।

इस वर्ष जिले में कोकून कीट पालकों ने 1.53 लाख किलोग्राम कोकून का उत्पादन किया। जिसकी बिक्री कर किसानों को 4.47 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई। कम उत्पादन के बावजूद अच्छी गुणवत्ता वाली फसल के अच्छे दाम मिलने के कारण यह संभव हो पाया है। 1050 रुपये प्रति किलोग्राम अधिकतम कीमत मिली

विभाग के मुताबिक इस बार कोकून का उत्पादन कर बिक्री करने वालों को अधिकतम 1050 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम प्राप्त हुए हैं, जबकि सबसे कमजोर डी ग्रेड की कोकून के भी 645 रुपये प्रति किलोग्राम उत्पादकों को प्राप्त हुए हैं। विभाग के मुताबिक इस वर्ष कोकून उत्पादकों को औसतन प्रति किलोग्राम 876 रुपये की कीमत मिली है। 26 बोलीदाताओं ने लिया नीलामी में हिस्सा

ऊधमपुर में स्पि्रंग सीजन की कोकून मंडी में कोकून की बिक्री के लिए लगी मंडी में कुल 26 बोलीदाताओं ने हिस्सा लिया। इनमें से ऊधमपुर से तीन, जम्मू से एक, श्रीनगर से एक, बेंगलुरु से तीन और मालदा, बंगाल से 17 बोलीदाताओं ने नीलामी में हिस्सा लिया। पिछले वर्ष कोरोना की वजह से मिले थे कम दाम

सेरीकल्चर विभाग के मुताबिक पिछली बार बेशक जिले में कोकून का उत्पादन अधिक हुआ था, मगर कोरोना महामारी की वजह से अन्य राज्यों से आने वाले बोलीदाता नहीं आ पाए थे। इससे कोकून उत्पादकों को अधिक पैदावार के बावजूद अच्छे दाम नहीं मिल पाए थे। मगर इस बार कम उत्पादन करने के बावजूद किसानों को कोकून के अच्छे दाम मिले हैं। इससे कोकून कीट पालक किसान संतुष्ट हैं।

- रविद्र कुमार, असिस्टेंट सेरीकल्चर अधिकारी

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