लेमनग्रास से बंदरों को दूर रख मोटा मुनाफा कमा सकेंगे किसान

अमित माही ऊधमपुर जिले में अनेक ऐसे इलाके हैं जहां बंदरों के कारण किसान चाहकर भ

JagranWed, 23 Jun 2021 06:16 AM (IST)
लेमनग्रास से बंदरों को दूर रख मोटा मुनाफा कमा सकेंगे किसान

अमित माही, ऊधमपुर :

जिले में अनेक ऐसे इलाके हैं, जहां बंदरों के कारण किसान चाहकर भी अपनी उपजाऊ जमीनों पर खेती नहीं कर पा रहे। मगर अब इन इलाकों में भी किसान खेती कर अपनी जमीन में ऐसी फसल उगा सकेंगे, जिसे बंदर नुकसान नहीं पहुंचाएंगे और इस फसल को उगाकर किसान अच्छी-खासी आमदनी भी कमा सकेंगे।

जिले में कृषि विभाग सुंगंधित एवं औषधीय फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले के गर्म क्षेत्रों में लैमन ग्रास और सर्द इलाकों में लैवेंडर के फूलों की खेती शुरू करने जा रहा है। लैवेंडर की खेती के लिए तो अभी समय है, लेकिन लेमन ग्रास की खेती अगले माह के मध्य में हो जाएगी।

जिला कृषि विभाग इंडियन इंस्टीट्यूट आफ इंटाग्रेटिड मेडिसिन्स (आइआइआइएम) की मदद से जिले में सुंगंधित एवं औषधीय फसलों की खेती को बढ़ावा देने जा रहा है। इस योजना के तहत जिले के गर्म इलाकों में लेमन ग्रास की फसल लगाई जाएगी। लेमन ग्रास तेल व अन्य तरीकों से कास्मेटिक और औषधीय प्रयोग में लाया जाता है। इसकी अच्छी कीमत होने के साथ बंदर या अन्य जानवर भी इसे नहीं खाते। इस वजह से कृषि विभाग ने जिले के बंदरों से प्रभावित इलाकों में इसकी खेती की योजना बनाई है, ताकि बंदरों की वजह से प्रभावित कृषि भूमि में किसान इस फसल को लगाकर आय अर्जित कर सकें।

कृषि विभाग ने लेमन ग्रास की फसल के ट्रायल के लिए जिले के बंदरों की वजह से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र टिकरी, जिब और कघोट इलाके को चुना है। टिकरी में करीब 100 कनाल, जिब में 20 और कघोट में भी 20 कनाल में ट्रायल के तौर पर लेमनग्रास की खेती की जाएगी। करीब 40 से 50 किसान पहले चरण में ट्रायल के तौर पर खेती करेंगे, जबकि दूसरे चरण में जिले के मजालता, घोरड़ी और बरमीन इलाकों में लेमन ग्रास की खेती करने की योजना है। प्रति कनाल से 12 से 13,000 रुपये की हो सकती है आय

लेमन ग्रास की खेती कर किसान एक कनाल से करीब 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर सकते हैं। कृषि विभाग के मुताबिक एक कनाल में लेमन ग्रास की फसल दो बार प्राप्त होती है। औसतन चार से पांच टन लेमन ग्रास की पैदावार होती है। इसमें से दो फीसद तक तेल प्राप्त होता है। कुल मिलाकर एक कनाल जमीन से करीब 10 से 15 लीटर लेमन ग्रास आयल प्राप्त हो जाता है। इसकी कीमत मार्केट और तेल की गुणवत्ता के आधार पर एक हजार या इससे भी अधिक प्रति लीटर किसानों को मिल जाती है। लगाने का खर्च निकाल कर किसान को 12-13 हजार रुपये प्रति कनाल के हिसाब से आमदनी होती है, जो गेहूं, मक्की, धान की खेती कर प्राप्त होने वाली आमदनी से चार से पांच गुना और सब्जी की फसलों से करीब दो गुना है। आइआइआइएम की मदद से तेल निकालने के लिए डिस्टिलरी भी लगेगी

उगने वाली लेमन ग्रास से तेल निकालने के लिए किसानों को कोई मशक्कत भी नहीं करनी होगी। कृषि विभाग आइआइआइएम की मदद से डिस्टिलरी भी लगाएगा। जहां पर किसान द्वारा उगाई जाने वाली लेमनग्रास से तेल निकाल कर दिया जाएगा। ट्रायल के दौरान तो किसानों से डिस्टिलरी में तेल निकालने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। मगर भविष्य में बेहद कम दामों पर किसान डिस्टिलरी में लेमनग्रास तेल निकलवा सकेंगे। प्रति कनाल ढाई हजार रुपये आता है फसल लगाने का खर्च

लेमन ग्रास की एक सैंपलिंग करीब एक रुपये में आती है। प्रति कनाल में करीब 900 तक सैपलिग लगती है। इसके अलावा खाद व लगाने का खर्च मिलाकर ढाई हजार रुपये प्रति कनाल आता है। एक बार फसल लगाने के बाद पांच साल तक फसल प्राप्त होती है। लेमन ग्रास की फसल लगाने के बाद रखरखाव की लागत भी कम है और अन्य फसलों की तुलना में मजदूरी की लागत भी कम रहती है। ट्रायल के लिए किसानों को निश्शुल्क सैपलिग व अन्य चीजें विभाग उपलब्ध कराएगा। सर्द पहाड़ी इलाकों में लगेगा सुंदर और सुगंधित लैवेंडर

गर्म इलाकों में जहां लेमन ग्रास की खेती होगी, वहीं पहाड़ों के सर्द इलाके वाले क्षेत्रों में लैवेंडर की खेती की जाएगी। हालांकि इसकी खेती अक्टूबर और नवंबर तथा फरवरी और मार्च दो सीजन में होती है। खेती के लिए कृषि विभाग ने कुद, लाटी और बसंतगढ़ के सर्द इलाकों को चुना है। हर जगह पर 30 से 35 कनाल जमीन पर लैवेंडर की खेती की जाएगी। यह भी काफी लाभदायक खेती है। लैवेंडर के तेल पांच हजार या इससे अधिक कीमत पर प्रति लीटर बिकता है। खेती करने के बाद दूसरे ही वर्ष फसल मिलने लगती है। प्रति कनाल से तीन लीटर तक तेल प्राप्त हो जाता है और इसकी खेती में भी तीन से साढ़े तीन हजार रुपये प्रति कनाल खर्च आता है। एक बार फसल लगाने पर 12 साल तक फसल प्राप्त की जा सकती है। इस फसल को लगाकर भी किसान 12 से 13 हजार रुपये प्रति कनाल मुनाफा कमा सकते हैं। आइआइआइएम के सहयोग से जिले में सुगंधित और औषधीय फसलों की खेती करने की दिशा में काम किया जा रहा है। जुलाई माह लेमनग्रास की खेती के लिए उपयुक्त है, इसलिए जिले के टिकरी, जिब और कघोट में 140 से 150 कनाल भू भाग में ट्रायल के तौर पर जुलाई मध्य तक लेमनग्रास की खेती की जाएगी। लेमन ग्रास की खेती के लिए उन जगहों को चुना गया है, जहां पर बंदर फसलों को तबाह करते हैं और इस वजह से वहां पर किसान खेती नहीं करते। लेमन ग्रास को न तो बंदरों और न ही मवेशी से खतरा है। यदि ट्रायल सफल रहा तो बंदरों से प्रभावित इलाकों में किसानों को जागरूक कर लेमनग्रास की खेती बड़े पैमाने पर की जाएगी। इसी तरह सर्द इलाकों में लैवेंडर की खेती की जाएगी। इसकी खेती अक्टूबर-नवंबर और फरवरी-मार्च दो सीजन में होती है। दोनों में काफी समय है। समय आते ही पहाड़ी सर्द इलाकों में कुद, लाटी और बसंतगढ़ में 100 कनाल जमीन पर लैवेंडर की खेती की जाएगी। ट्रायल सफल रहा तो किसानों को पारंपरिक खेती से चार से पांच गुना अधिक और सब्जियों की फसलों से दो गुना अधिक मुनाफा प्रति कनाल में होगा। रखरखाव का खर्च भी न के बराबर रहेगा।

- सुभाष चंद्र शर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी ऊधमपुर

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