माइनस 50 डिग्री में भी मुस्तैद रहेंगे जवान

माइनस 50 डिग्री में भी मुस्तैद रहेंगे जवान

नवीन नवाज श्रीनगर पूर्वी लद्दाख और खासकर गलवन घाटी में तनाव कम होने की पुष्टि के बावजूद भारतीय से

Publish Date:Tue, 07 Jul 2020 08:33 AM (IST) Author: Jagran

नवीन नवाज, श्रीनगर : पूर्वी लद्दाख और खासकर गलवन घाटी में तनाव कम होने की पुष्टि के बावजूद भारतीय सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चौकसी में कमी नहीं लाने जा रही है। अतीत से सबक लेते हुए सíदयों में भी चौकसी का उच्च स्तर बनाए रखने की तैयारी शुरू कर दी है। शून्य से 50 डिग्री नीचे का तापमान हो या फिर बर्फीले तूफान हमारे जवान एलएसी के पास निगरानी चौकियों पर मुस्तैद रहेंगे। सíदयों में जवानों को विपरीत हालात से बचाने के लिए सेना ने विशेष तंबुओं के अलावा सैन्य वर्दी व जूतों को खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) को यह ऑर्डर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय लद्दाख के मौसम के अनुरूप सैन्य साजोसामान की खरीद के लिए कुछ यूरोपीय देशों के भी संपर्क में है। प्रयास है कि सितंबर माह तक सामान सेना को उपलब्ध हो जाए।

सामान्य परिस्थितियों में सितंबर माह के अंत में एलएसी के अति दुर्गम इलाकों में भारत और चीन के सैनिक गश्त बंद कर देते हैं। कई अग्रिम निगरानी चौकिया भी पीछे हटा ली जाती हैं। सर्दियों में भीषण ठंड और बर्फीले तूफानों के कारण इन इलाकों में गश्त करना दुष्कर होता है। सैन्य सूत्र बताते हैं कि गलवन में कुछ जगहों पर भले ही चीन को कदम पीछे खींचने पर मजबूर होना पड़ा पर तनाव अभी समाप्त नहीं हुआ है। गतिरोध जारी है और अक्टूबर माह के अंत तक यही स्थिति कायम रहने की आशका है। इसलिए अग्रिम इलाकों में तैनात जवानों के लिए लद्दाख की सíदयों के लिए आवश्यक साजोसामान चाहिए।

उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने कुछ वर्षो के दौरान चीन की सेना द्वारा पूर्वी लद्दाख में एलएसी के अतिक्रमण की घटनाओं का अध्ययन किया है। चीनी सैनिक कई बार सíदयों में भी एलएसी का उल्लंघन करते रहे हैं। इसके अलावा मौजूदा हालात में चीन के व्यवहार से अंदेशा बना हुआ है कि वह सíदयों में कोई नई साजिश रच सकता है। इसलिए रक्षा मंत्रालय ने सíदयों में एलएसी पर चीन से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में भारतीय सेना चौकसी और निगरानी के स्तर को सíदयों में कम नहीं करना चाहती है। खून जमा देने वाली हवा है बड़ी चुनौती :

लद्दाख में एलएसी से सटे ज्यादातर क्षेत्रों में सíदयों में तापमान -25 से -40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। कुछ स्थानों पर यह -50 डिग्री तक पहुंच जाता है। भारी बर्फ के बीच आगे बढ़ना नामुमकिन रहता है। इसके अलावा 40 किलोमीटर प्रति घटे की गति से नियमित बर्फीली हवाएं चलती रहती हैं। वहीं, बर्फीले तूफान आफत और बढ़ा देते हैं। 80 हजार जोड़ी ड्रेस चाहिए :

जवानों को इस विपरीत स्थिति में फिट रखने के लिए विशेष ड्रेस और तंबुओं की आवश्यकता है। इसीलिए ओएफबी को तिहरी परत के साथ ईसीसी (एक्सट्रीम कोल्ड क्लोदिंग) से बनी 80 हजार जोड़ी ड्रेस उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके साथ ही विपरीत हालात से बचाने वाले तंबू भी चाहिएं। एक अधिकारी ने बताया कि यह थ्री-लेयर ईसीसी सूट और जूते लद्दाख में तैनात जवानों के पास पहले से उपलब्ध वर्दी और जूतों से वजन में हल्के और ठंड को झेलने में ज्यादा कारगर हैं। राशन व ईंधन का पर्याप्त भंडार :

उन्होंने बताया कि सेना ने सíदयों के लिए लद्दाख में ईधन व राशन का भंडार भी जमा करना शुरू कर दिया है। जम्मू से सड़क के रास्ते रोजाना 70-80 ट्रक करगिल व लेह के लिए पेट्रोल, डीजल, केरोसीन तेल, दालें, आटा व चावल लेकर जा रहे हैं। एक वरिष्ठ सैन्याधिकारी ने बताया कि लद्दाख में भारतीय सेना को सíदयों के लिए अपनी सारी तैयारी गíमयों में ही पूरी करनी होती है। चीनी सैनिक भी हमारी ही तरह पहाड़ों पर तैनात हैं, लेकिन उनकी चौकियों तक उनके वाहनों की आवाजाही सुगम है। तिब्बत तक उनका रेल नेटवर्क भी है। चीन को कभी न भूलने वाला सबक मिला

राज्य ब्यूरो, जम्मू: पूर्वी लद्दाख के गलवन में इस बार चीन को कभी न भूलने वाला सबक मिला है। चीन समझ चुका है कि अब वह न तो भारतीय सेना से सामने की लड़ाई लड़ सकता है और न ही पीठ पर छुरा घोंपने की उसकी नीति काम आएगी। इस हालात में उसके पास पीछे हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

प्रदेश के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दुश्मन देश भले ही इस समय अपने तेवर नरम कर रहा है, लेकिन उसे कभी हलके से नहीं लिया जा सकता। चीन की फितरत रही है कि वह कई बार नरम तेवर दिखाने के बाद भी वार कर देता है। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता का कहना है कि इस बार चीन को कड़ा संदेश मिला है। पहले गलवन में उसे मुंहतोड़ जवाब मिला और अब फिर मुंह की खानी पड़ेगी। ऐसे में उसका नरम तेवर दिखाना स्वाभाविक है। यह तय है कि चीन युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं है। उनका कहना है कि इस साल तो चीन कोई हिमाकत करने के बारे में नहीं सोचेगा। अगले साल उसका रवैया क्या होगा, यह कहा नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति सामान्य बनाने की मुहिम के दौरान कड़ी सर्तकता बरतना जरूरी है। चीन पीछे हटने को राजी हुआ जो पंद्रह जून से पहले करना था। गलवन में उपजे हालात से इस प्रकिया में करीब एक महीने की देरी हुई। उन्होंने बताया कि अब हुए फैसले के अनुसार पहले चरण में वास्तविक नियंत्रण रेखा से सेनाएं कुछ पीछे हटेंगी। इसके बाद तनाव के माहौल में लाए गए हथियार हटाए जाएंगे। तीसरे चरण में अपने-अपने इलाकों में लाए गए अतिरिक्त जवानों को वापस भेजना है। 72 घंटे तक पुष्टि करने के बाद ही अगली कार्रवाई की जाएगी।

वर्ष 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में वीर चक्र जीतने वाले कर्नल वीरेंद्र साही का कहना है कि चीन, माउंटेन वारफेयर में अपनी ताकत दिखाने वाली भारतीय सेना के सामने कोई टिक नहीं सकता है। भारतीय सेना को लद्दाख के सियाचिन में माउंटेन वारफेयर का करीब चालीस दशकों का अनुभव है। चीन को दुर्गम पहाड़ों पर लड़ाई करने का अंदाजा नहीं है। ऐसे में इस बार जब चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कड़े तेवर व भारतीय सेना का आक्रामक रुख देखा तो उसके पास हालात बेहतर बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसके बावजूद हमें सतर्क रहना होगा। सोची समझी रणनीति के तहत चीन विवाद पैदा करता है, वह युद्ध करने की स्थिति में नहीं है। गलवन घाटी में तनाव के दो माह

5 मई, 2020 :

पूर्वी लद्दाख के पैंगांग त्सो में भारत और चीन के सैनिकों में झड़प। चीन के सैनिकों की पत्थरबाजी में भारतीय सेना के एक कमान अधिकारी समेत 70 सैनिक घायल। 6 मई :

चीन के सैनिकों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब सड़क निमार्ण का विरोध करने के साथ पैंगांग त्सो के फिंगर टू इलाके में भारतीय सेना के जवानों की पेट्रोलिंग रोकी। गलवन के साथ हाट सप्रिंग, फिंगर एरिया में तैनाती बढ़ाई। भारतीय सेना की चौदह कोर ने भी मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी शुरू की। 12 मई :

चीन के हेलीकॉप्टर उड़ान भरते हुए वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब आ गए। जवाब में भारतीय वायुसेना के फाइटर विमानों ने उड़ान भरकर चीनी हेलीकॉप्टरों को खदेड़ा। क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती शुरू। 23 मई :

थलसेना प्रमुख एमएम नरवाने का लद्दाख दौरा। वास्तविक नियंत्रण रेखा के सुरक्षा हालात जाने। 26 मई :

थलसेना प्रमुख, उत्तरी कमान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पूर्वी लद्दाख के हालात के बारे में जानकारी दी। इससे कुछ घटे पहले वे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से भी मिले। 27 मई :

चीन सेना ने तनाव बढ़ाते हुए गलवन इलाके में सैन्य तैयारिया तेज कीं। स्थायी बुनियादी ढाचा विकसित करने के लिए की कार्रवाई। 01 जून :

पूर्वी लद्दाख में चीन के फाइटर विमानों की गतिविधियों में तेजी। जवाब में भारतीय वायुसेना ने भी सक्रियता बढ़ाई। 02 जून :

पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने के लिए दोनों ओर के सेनाओं के बीच मेजर जनरल स्तर की वार्ता। 06 जून :

सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली उत्तरी कमान की 14 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हरिद्र सिंह की चीन सेना के मेजर जनरल लियु लिन के साथ बैठक। भारतीय सेना ने स्पष्ट किया कि पूर्वी लद्दाख में बुनियादी ढाचा विकसित करने की मुहिम जारी रहेगी। 13 जून :

थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने ने कहा, पूर्वी लद्दाख में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में। सैन्य स्तर पर बातचीत जारी। 15 जून :

गलवन व हाट सप्रिंग इलाकों में भारत व चीन की सेना के बीच ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता। देर शाम को दोनों ओर के सैनिकों के बीच हिसंक झड़पें। 16 जून : भारतीय सेना ने गलवन में चीन सेना की हिसंक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवानों के शहीद होने की पुष्टि की। झड़प में कई चीनी सैनिक भी मारे गए। 18 जून :

चीन सेना ने भारतीय सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल, तीन मेजरों समेत 10 भारतीय सैनिकों को रिहा किया। 19 जून :

चीन सरकार ने कड़े तेवर बरकरार रखते हुए पूरे गलवन इलाके को अपना बताया। 20 जून :

भारत की पूर्वी लद्दाख में बड़े पैमाने पर तैनाती तेज। अतिरिक्त सैनिकों के साथ एम777 होवित्जर तोपें, क्विक रिएक्शन एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम स्थापित। 22 जून :

सेना की उत्तरी कमान की 14 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हरिन्द्र सिंह की चीन सेना के मेजर जनरल लियु लिन के साथ दूसरी बैठक।

23 जून :

सेना की ऑपरेशनल तैयारियों को तेजी देने के लिए थलसेना प्रमुख एमएम नरवाने का तीन दिवसीय लेह दौरा शुरू। 25 जून :

लद्दाख में संचार सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 54 मोबाइल टावर स्थापित करने की मुहिम तेज। 26 जून :

पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना का संयुक्त सैन्य अभ्यास। फाइटर विमानों के साथ ट्रासपोर्ट विमानों ने भी हिस्सा लिया। 30 जून :

पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने को सेना की 14 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हरिन्द्र सिंह की चीन सेना के मेजर जनरल लियु लिन के साथ तीसरी बैठक। तनाव कम करने को सैनिकों को पीछे हटाने पर चर्चा।

03 जुलाई :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेह दौरा कर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सैनिकों का हौसला बढ़ाया। 06 जुलाई :

दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में सेना को पीछे हटाने का फैसला। चीन ने सेना पीछे हटाने को लेकर शुरू की कार्रवाई।

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