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Jammu Kashmir DDC Chunav: तब भी हमारे गांव की सड़कें कच्‍ची थीं, आज भी वैसी ही हैं, उम्‍मीद है मेरा यह वोट तकदीर बदलेगा

105 वर्षीय गुलाम अहमद गुरु ठंड की परवाह किए बिना लाठी के सहारे मतदान केंद्र की तरफ जाते हुए।

लोग की पूर्व की सरकारों से नाराजगी साफ दिख रही है। पूर्व सरकारों ने बेरोजगरी दूर करने के सब्जबाग दिखाए। इस बार इसी शर्त पर उसे वोट करने का फैसला किया जो विकास करवाएगा। उम्मीद है कि इस बार हमारा इलाका भी तरक्की की डगर पर चल पड़े।

lokesh.mishraFri, 11 Dec 2020 08:01 AM (IST)

रजिया नूर, श्रीनगर : कश्मीर में कड़ाके की ठंड में भी अवाम का जोश हिलोरे मार रहा है। युवा हो या अधेड़ या बुजुर्ग विकास की चाह में मतदान करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। जिला विकास परिषद के चुनाव के पांचवें चरण में कश्मीर में मतदान केंद्रों के बाहर लगी कतारें यह गवाही दे रही  थी कि आतंकवाद के दिन अब लद गए हैं। 

जिला विकास परिषद के अभी तक पांच चरण मुकम्मल हो गए हैं। अभी तक तमाम चरणों में वृद्धाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लेकर वादी में खुशहाली व तरक्की के लिए वोट दिए। श्रीनगर से 28 किमी  दूर गांदरबल जिले में झेलम दरिया किनारे आबाद वाकूरा में बुजुर्ग मतदाताओं का गजब का जोश देखा गया।

105 वर्षीय गुलाम अहमद गुरु हाड़ कंपाने वाली ठंड की परवाह किए बिना लाठी के सहारे कच्चे रास्तों पर सरकारी स्कूल में बने मतदान केंद्र की तरफ जा रहा थे। वोट डाल  अंगुली पर लगे निशान को दिखाते हुए गुरु ने कहा कि मैंने 1947 में हिंदुस्तान पाकिस्तान के बीच बंटवारा भी देखा है। मैं कबायली हमले का चश्मदीद हूं। गांव की कच्ची सड़क से मतदान केंद्र जाते समय वर्ष 1947 का वह दिन याद आया जब हम बचते बचाते श्रीनगर भाग आए थे। तब भी हमारे इस वाकूरा गांव की सड़कें ऐसी ही कच्ची पक्की थी और आज भी वैसी ही हैं।

हां नए मकान बनने से हमारे गांव का हुलिया थोड़ा बदला है। मुझे उम्मीद है कि यह चुनाव हमारे गांव की तकदीर बदलेगा। गुरु ने कहा कि गांव में 500 परिवार  हैं। लोग मेहनत मजदूरी करके अपना गुजारा करते हैं। सड़कें ठीक न होने की सूरत में दिक्कतें झेलनी पड़ती है। खासकर बीमारों और स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों को। किसी भी जगह या इलाके की तरक्की का दारोमदार उस इलाके की सड़कों पर होता है।

हमारा इलाका तरक्की के लिहाज से पिछड़ा हुआ है। पूर्व सरकारों ने तो बेरोजगरी दूर करने के लिए सिर्फ सब्ज बाग दिखाए। इस बार इसी शर्त पर उसे वोट करने का फैसला किया जो विकास करवाएगा। उम्मीद है कि इस बार हमारा इलाका भी तरक्की की डगर पर चल पड़े। 90 वर्षीय मो. इरफान कहते हैं कि आतंकवाद ने विकास को निगल लिया। इसका फायदा सियासतदानों ने उठाया। कभी विकास पर पैसा खर्च नहीं किया। 85 वर्षीय बीवी सुलताना ने कहा कि गांव की सड़क दिखती हुई नहीं है। सड़क पक्की होने के कई नेताओं ने वादे किए। उम्र भी बीत गई।

 

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