सभी स्कूलों व आगनबाड़ी केंद्रों में एक माह में नल से जल के निर्देश

प्रदेश में सितंबर 2022 तक हर घर में नल से जल उपलब्ध होगा। मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता ने 30 सितंबर तक जलजीवन मिशन के दूसरे और तीसरे चरण को हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है।

JagranWed, 16 Jun 2021 05:50 AM (IST)
सभी स्कूलों व आगनबाड़ी केंद्रों में एक माह में नल से जल के निर्देश

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर: प्रदेश में सितंबर 2022 तक हर घर में नल से जल उपलब्ध होगा। मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता ने 30 सितंबर तक जलजीवन मिशन के दूसरे और तीसरे चरण को हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने अगले एक माह के भीतर सभी स्कूलों व आगनबाड़ी केंद्रों में नल से पेयजल आपूíत को सुनिश्चित बनाने के लिए भी कहा है। उन्होंने यह निर्देश उच्चस्तरीय बैठक में जल जीवन मिशन की मौजूदा स्थिति का जायजा लेते हुए दिए।

बैठक मे जल जीवन मिशन के तहत लंबित पड़ी परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के लिए परियोजना विकास एवं प्रबंधन सलाहकार (पीडीएमसी) को भी नियुक्त करने का फैसला किया गया। जम्मू और श्रीनगर संभाग के लिए अलग-अलग पीडीएमसी होंगे जो परियोजना के कार्यान्वयन, ठेका आवंटन, परियोजना प्रबंधन और बिल सत्यापन एवं उसकी जाच प्रक्रिया की निगरानी भी करेंगे।

बैठक में बताया कि वर्ष 2020-21 में प्रदेश में 2,15,511 मकानों में नए पेयजल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं जबकि मौजूदा वित्त वर्ष के पहले तीन माह के दौरान नौ हजार घरों को पाइप के जरिए जलापूíत की गई। विभाग ने इस योजना के तहत 92 फीसद स्कूल और 93 फीसद आगनबाड़ी केंद्रों में नल के जरिए जलापूíत को सुनिश्चित बनाया है। जल जीवन मिशन के पहले चरण के तहत श्रीनगर और गादरबल जिले में हर घर में नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है, जबकि रियासी और साबा में भी यह लक्ष्य जल्द ही हासिल कर लिया जाएगा।

मुख्य सचिव ने स्कूल सैनिटेशन कार्यक्रम को स्कूल शिक्षा विभाग के साथ समन्वय में जल्द शुरू करने का निर्देश दिया है। पेयजल गुणवत्ता के लिए उन्होंने ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड द्वारा निर्धारित 15 मानदंडों के आधार पर पेयजल की उसके स्त्रोत और फिल्ट्रेशन प्लाट पर 15 दिन के भीतर जाच करने को कहा। वितरण के विभिन्न चरणों पर जल की गुणवत्ता की नियमित जाच के लिए वाटर क्वालिटी मैनेजमेंट तंत्र भी तैयार किया जाए। उन्होंने जल नियामक प्राधिकरण को जलशक्ति विभाग द्वारा विभिन्न गावों में गठित पानी समितियों में से 100 समितियों की जाच करने को कहा ताकि उनकी स्थिति का आकलन किया जा सके। उन्होंने जल शक्ति विभाग को निर्देश दिया कि सभी 20 जिलों में जल की गुणवत्ता की जाच के लिए स्थापित प्रयोगशालाएं एनएबीएल के मानदंडों के अनुरूप हों।

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