मूर्ति स्थापना से पूर्व कलश यात्रा निकाली

संवाद सहयोगी नौशहरा ठाकुरद्वारा नौशहरा से रविवार को कलश यात्रा निकाली गई जिसमें भ

JagranMon, 11 Oct 2021 06:48 AM (IST)
मूर्ति स्थापना से पूर्व कलश यात्रा निकाली

संवाद सहयोगी, नौशहरा : ठाकुरद्वारा नौशहरा से रविवार को कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कलश यात्रा में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर संतोष दास मौनी जी महाराज रथ पर सवार थे।

ठाकुरद्वारा नौशहरा से कलश यात्रा आरंभ हुई और झूला पुल से होते हुए थाथी से मनावर तवी पर पहुंची। यहां पर पूजा-अर्चना करने के बाद सबने अपने कलश में जल भरा, जिसके बाद कलश यात्रा वापस रघुनाथ मंदिर से झंगड़ चौक से होते हुए ठाकुरद्वारा में संपन्न हुई। कलश यात्रा में छोटे बच्चे, महिलाएं, पुरुष, साधु-संत मौजूद थे। कलश यात्रा दिन मे 11 बजे आरंभ हुई और शाम चार बजे संपन्न हुई। कलश यात्रा में सब लोग नाचते गाते नजर आए। पूरा नौशहरा उपनगर जय श्री राम, मौनी जी महाराज की जय के जयकारों से गूंज उठा। ठाकुरद्वारा नौशहरा में 10 से 22 अक्टूबर तक विशाल संत सम्मेलन, मूर्ति स्थापना, राम कथा, होने जा रही है। उसी उपलक्ष्य में पहले दिन कलश यात्रा निकाली गई। वहीं, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। इस मौके पर मौनी जी महाराज ने सभी लोगों से इस संत सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया और कहा कि सभी लोग बढ़-चढ़कर इस संत सम्मेलन में आएं और राम कथा का आनंद लें। जिला राजौरी में पहली बार इतना विशाल संत सम्मेलन होने जा रहा है, जिसमें देश के अलग-अलग जगहों से संत पहुंचेंगे और राम कथा होगी। दोपहर को राम कथा और रात्रि को रामलीला होगी।

वहीं, सुंदरबनी उपनगर से लगभग 12 किलोमीटर पूर्व की ओर जम्मू-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग के पास ही क्षेत्र के सुप्रसिद्ध मंदिर अमृतेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में नवरात्र के पावन अवसर के दौरान हनुमान जी मूर्ति प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर सुंदरबनी सहित इसके आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों से भारी संख्या में हनुमान जी के उपासक और सनातन धर्मावलंबियों ने मंदिर में माथा टेका और हनुमान जी की मूर्ति प्रतिष्ठा कार्यक्रम में श्रद्धापूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर वैदिक आचार्यो द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ हनुमान जी की मूर्ति को पहले जलाधिवास, पुष्पादिवास वस्त्रादिवास, घृतादिवास करवाया गया। उसके बाद विधिवत वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हनुमान जी के श्री विग्रह स्वरूप को हमेशा के लिए इस मंदिर परिसर में प्रतिष्ठित कर दिया गया।

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