पेड़-पौधों के बिना मनुष्य जीवन संभव नहीं: डीसी

संवाद सहयोगी सुंदरबनी केंद्रीय रिजर्व पुलिस की 72वीं बटालियन मुख्यालय सुंदरबनी में रविवार क

JagranMon, 26 Jul 2021 12:47 AM (IST)
पेड़-पौधों के बिना मनुष्य जीवन संभव नहीं: डीसी

संवाद सहयोगी, सुंदरबनी : केंद्रीय रिजर्व पुलिस की 72वीं बटालियन मुख्यालय सुंदरबनी में रविवार को मेगा राष्ट्रीय पौधारोपण कार्यक्रम में डीसी राजौरी राजेश कुमार शवन मुख्य अतिथि रहे। बटालियन मुख्यालय परिसर के खाली मैदान में डीसी राजौरी राजेश कुमार शवन ने पौधारोपण अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा मनुष्य तथा पर्यावरण दोनों परस्पर एक दूसरे के इतने संबंधित है कि उन्हें अलग करना कठिन है। जिस दिन पर्यावरण का अस्तित्व मिट गया उस दिन मानव जाति का अस्तित्व ही मिट जाएगा, यह आधारभूत सत्य है। पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूकता, सजगता तथा अपने दायित्वों का पूर्ण इमानदारी से हर इंसान को निर्वाहन करना होगा। तभी पर्यावरण को बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया पर्यावरण को बचाने के लिए राजौरी प्रशासन द्वारा कई अहम कदम उठाए गए हैं और इस बरसात के मौसम में राजौरी जिले के विभिन्न हिस्सों में पंचायतों के सहयोग से पौधरोपण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं । उन्होंने राजौरी जिले के आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए राजौरी प्रशासन और वन विभाग का पूरा सहयोग करें। इस बरसात के मौसम में अधिक से अधिक पेड़ पौधे अपने आसपास और खाली पड़ी जमीनों पर लगाने का पूरा प्रयास करें।

वहीं, पौधारोपण अभियान कार्यक्रम में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल मुख्यालय परिसर के अंदर जामुन, नीम, चीड़, कलयाड, सेब, आंवला आदि के पेड़ पौधे इस कार्यक्रम में लगाए गए। पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए जम्मू कश्मीर पंचायत कान्फ्रेंस के संभागीय अध्यक्ष बीडीसी चेयरमैन अरुण शर्मा ने कहा पेड़-पौधे ही पर्यावरण के रक्षक होने के साथ उनको स्वच्छ भी बनाते हैं। इसके बिना कोई भी अपने जीवन की संभावना नहीं कर सकता है। इसलिए लोगों को पेड़-पौधों को लगाने के लिए आगे आना चाहिए, लेकिन वर्तमान में लोग अपने भौतिक सुख-सुविधाओं के लिए जंगल काटकर इस धरती को पेड़ विहीन बना रहे हैं।

कमांडेंट राम मीणा ने कहा कि लोगों का कर्तव्य है कि वह अपने जीवन में कम से कम पांच पौधे जरूर लगाएं। साथ ही लगाए गए पौधों की तब-तक सुरक्षा करें जब-तक वे बड़े नहीं हो जाते हैं। यह सब काम समाज को जागरूक किए बगैर नहीं हो सकता है। उन्होंने कि यदि प्रकृति को ईश्वर का दूसरा रूप कहा जाए तो कदापि गलत नहीं होगा। पेड़ों पर प्रकृति निर्भर करती है। पेड़ लगाना प्रकृति का संरक्षण व संवर्धन है और प्रकृति का संरक्षण व संवर्धन ईश्वर की श्रेष्ठ आराधना है। एक पेड़ लगाने से असंख्य जीव-जंतुओं के जीवन का उद्धार होता है और उसका अपार पुण्य सहजता से हासिल होता है। एक तरह से पेड़ लगाने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। भारतीय संस्कृति में भी पौधारोपण को अति पुण्यदायी माना गया है।

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