..अब आलू की बोरियों की आड़ में किए जा रहे पशु तस्करी

जागरण संवाददाता कठुआ जिला पुलिस द्वारा आए दिन पशु तस्करी के मामले को विफल करने के बाद

JagranWed, 16 Jun 2021 12:31 AM (IST)
..अब आलू की बोरियों की आड़ में किए जा रहे पशु तस्करी

जागरण संवाददाता, कठुआ: जिला पुलिस द्वारा आए दिन पशु तस्करी के मामले को विफल करने के बाद भी तस्कर बाज नहीं आ रहे। मंगलवार को प्रदेश के प्रवेश द्वार लखनपुर में एक फिर एक ऐसा ही तस्करी का मामला पुलिस ने विफल किया, जिसमें तस्करों ने बेजुबान पशुओं को इस भीषण गर्मी में क्रूरता से आलू की लदी बोरियों की आड़ में बनाए गए विशेष केबिन में छिपा कर तस्करी को अंजाम देने का प्रयास कर रहे थे।

तस्करी को अंजाम देने के लिए तस्करों ने बड़े ट्राले का इस्तेमाल किया था, जिसके सामान लोड करने वाले हिस्से के बीच 20 पशुओं को छिपाकर लाने के लिए आसपास आलू की बोरिया पूरी डिजाइन करके लोड की गई थी, ताकि बाहर से चेक करने वाले को उसमें आलू की बोरियां लोड की हुई दिखे, लेकिन तस्कर शायद भूल गए है कि इससे पहले भी ऐसे ही एक ट्राले में विशेष डिजाइन करके आलू की बोरियों की आड़ में छिपाकर तस्करी के प्रयास को लखनपुर पुलिस ने ही विफल किया था। इससे पहले तेल व पानी के टैंकर को भी डिजाइन करके उसमें छिपाकर तस्करी के प्रयास हीरानगर पुलिस द्वारा विफल किया जा चुका हैं। इसके बाद भी तस्कर बाज नहीं आ रहे हैं।

मंगलवार को लखनपुर पुलिस ने पीबी46एच-9987 नंबर के ट्राले को शक के आधार पर गहन तलाशी शुरू की तो बाडी के आसपास आलू की बोरियां लदी थी, लेकिन जब कुछ बोरियों को हटाकर चेकिग की गई तो अंदर ही बाडी में तस्करी के लिए बनाए गए विशेष केबिन में 20 बेजुवान पुश बरामद हुए। उसी समय लखनपुर पुलिस के थाना प्रभारी सुमित शर्मा ने एसएसपी के निर्देश पर पशुओं को मुक्त कराया और ट्राले के चालक के साथ सहयोगी को दबोच लिया, जिसकी पहचान गुलाबदीन पुत्र अब्बी निवासी हंदेचक मढ़ीन हीरानगर के रूप में हुई है। इसी बीच राजबाग में भी एक पुलिस ने 5 पशुओं को मुक्त कराया है। बाक्स----

कठुआ पुलिस डेढ़ माह में 400 पशु करा चुकी है तस्करों से मुक्त

बीते करीब डेढ़ माह में कठुआ पुलिस 400 से ज्यादा पशुओं को तस्करों से मुक्त करा चुकी है। इसमें 50 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए और दो दर्जन के करीब तस्करों को गिरफ्तार भी कर चुकी है। बाक्स---

तस्करों को मिलती है पशुओं की मुंह मांगी कीमत

इस धंधे में सक्रिय एक विशेष समुदाय के ज्यादा लोग संलिप्त है,जो बार-बार पकड़े जाने के बाद छूटने पर फिर से इस धंधे में लग जाते हैं। बताया जाता है कि तस्करी के पशु कश्मीर में ले जाए जाते हैं,जहां पर तस्करों को मुंह मांगी कीमत मिलती है। जिसके चलते भारी मुनाफे वाला धंधे होने पर तस्कर बार-बार इस धंधे में सक्रिय हो जाते हैं। बाक्स---

कठुआ पुलिस ने पंजाब पुलिस के समक्ष क्षी उठाया मामला

अक्सर पंजाब से तस्करी कर लाये जाने वाले पशुओं का मामला पठानकोट के एसएसपी के समक्ष कठुआ एसएसपी आर सी कोतवाल पिछले दिनों उठा चुके है। कोतवाल ने बताया कि लखनपुर में वाहनों या पैदल पशु पंजाब से लाए जाते हैं। ऐसे में अगर उनकी पुलिस भी सख्ती करें तो काफी हद तक तस्करी पर लगाम लगाई जा सकती है। गौर है कि ज्यादातार मामले लखनपुर या रावी दरिया से पैदल पंजाब से ही तस्करी कर लाए जाते हैं। गत 12 जून को पंजाब पुलिस ने पशु तस्करी पर लगाम कसने के लिए ऐसे ही एक मामले पर सख्त कार्रवाई करते हुए धारा 8 के तहत काउ स्लाटर एक्ट 1955 का इस्तेमाल करते हुए तस्करों के खिलाफ तारागढ़ में मामला दर्ज किया। इस धारा के तहत तस्कर के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान है। जबकि जम्मू कश्मीर में ऐसा सख्त एक्ट नहीं है, जिसके तहत तस्कर को कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि दोबारा वे इस धंधे से तौबा कर ले। यहां पर 188 के तहत मामला दर्ज होता है।

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