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सरकारी कार्यालयों को एक छत के नीचे लाने की योजना अधर में

संवाद सहयोगी, बिलावर: उपजिला के ज्यादातर सरकारी दफ्तर किराये के मकानों में चल रहें है, जिन्हें एक छत के नीचे लाने की मांग बिलावरवासियों की एक दशक से चली आ रही है। प्रशासन द्वारा बिलावर के वार्ड 6 कूट में करीब 158 कनाल जमीन को चिन्हित कर करीब 58 करोड़ की डीपीआर बनाकर सचिवालय भेजी थी, ताकि बिलावर में मिनी सचिवालय के निर्माण के प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाया जा सके।

रियासत के निजाम में कई प्रकार के आये बदलाव के बाद अभी तक मिनी सचिवालय बनाने के लिए हुए प्रयासों पर अमल नहीं हुआ है जो समय की मांग के साथ-साथ जरूरत भी है। यहां बिलावर की जनता जिले की मांग दशकों से करती आ रही है। ऐसे में एडीसी बिलावर में बैठते है, जिन्हें जिला स्तर कार्यालय के साथ-साथ सुविधाएं भी मिलेगी। एडीसी का पद मिलने से लोगों की मांग जोर पकड़ने लगी है।

लोगों का कहना है जम्मू कश्मीर केंद्र प्रशासति प्रदेश बनाने के बाद क्या सरकारी फाइलों में चल रहे मिनी सचिवालय बनाने के प्रोजेक्ट को मूर्त रूप मिलेगा या फिर पुरानी व्यवस्था का शिकार बिलावर मिनी सचिवालय का प्राजेक्ट सपना ही बनकर रह जाएगा।

दरअसल, बिलावर की जनता वर्ष 2006 से सारे सरकारी दफ्तरों को एक ही छत के नीचे लाने की मांग कर रही है, ताकि हजारों रुपये किराये के नाम पर जो सरकारी खजाने से निकल रहे है वह बचे। इससे लोगों को कठुआ सचिवालय की तरह सभी विभागों के अधिकारी एक छत के नीचे बैठेंगे, जिससे काफी राहत होगी। लोगों को एक काम के लिए अलग-अलग स्थानों की गणेश परिक्रमा नहीं करनी पड़ेगी। साथ में किराये के नाम पर खर्च हो रहे लाखों रुपये विकास योजनाओं पर खर्च होंगे।

पूर्व कमेटी अध्यक्ष राकेश चंदेल, बी आर उपाध्याय, कुलदीप बसोत्रा, रविकांत मिश्रा का कहना है एक तो किराये के मकानों में चल रहे सरकारी कार्योलयों पर खर्च होने वाले लाखों रुपये बचेंगे, दूसरा जनता को सारे कार्यालय एक छत के नीचे मिलने से राहत मिलेगी। बाक्स---

ये दफ्तर चल रहे हैं किराये के मकान में

डिप्टी सीइओ, जेडइओ बिलावर, समाज कल्याण विभाग के तहसील कार्यालय, सीडीपीओ बिलावर, सीडीपीओ मल्हार, एईई बिजली विभाग, फिशरी विभाग, जम्मू कश्मीर बोर्ड के असिस्टेंट सेक्रेटरी का कार्यालय किराये के मकानो में चल रहे है। इनके सलाना किराये पर लाखों का खर्च अतिरिक्त बोझ के रूप में सरकारी खजाने पर पड़ता है।

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