अब पांच की बजाय सात विस क्षेत्र बनाए जाने की उठी मांग

जागरण संवाददाता कठुआ जम्मू पहुंचे परिसीमन आयोग से जिले के विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने वीरवा

JagranFri, 09 Jul 2021 06:26 AM (IST)
अब पांच की बजाय सात विस क्षेत्र बनाए जाने की उठी मांग

जागरण संवाददाता, कठुआ: जम्मू पहुंचे परिसीमन आयोग से जिले के विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने वीरवार को मिलकर जिला कठुआ में मौजूदा विधान सभा क्षेत्रों की संख्या बढ़ाए जाने की मांग की। इसमें जिला कठुआ से कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल जिला प्रधान डॉक्टर मनोहर लाल शर्मा के नेतृत्व में आयोग से मिला।

प्रतिनिधिमंडल में पूर्व एमएलसी एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी सदस्य सुभाष गुप्ता और पूर्व स्पीकर हैदर मलिक के अलावा देवेंद्र सिंह बिदु, कुलभूषण कुमार आदि शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल में शामिल डॉक्टर मनोहर लाल शर्मा और सुभाष गुप्ता ने आयोग को कठुआ में दो और विधानसभा क्षेत्र गठित करने की मांग की। प्रतिनिधि मंडल ने आयोग को बताया कि जिले की सीमाएं पाकिस्तान, पंजाब, हिमाचल, डोडा, सांबा और ऊधमपुर से मिलती हैं। भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से क्षेत्रफल काफी बड़ा है, जिसके पांच ही विस क्षेत्र हैं और उनकी सीमाएं और क्षेत्रफल व आबादी भी ज्यादा है। इसमें काफी वषों से एक कंडी विस क्षेत्र बनना चाहिए, जो हर पैमाने पर सही बनता है। इसे प्राथमिकता से गौर किया जाए। इससे कंडी के लोगों को अपना प्रतिनिधि मिलेगा, जो उनकी लंबित समस्याएं विशेष रूप से हल करने में सक्षम बनेगा। मौजूदा समय में कंडी के कुछ क्षेत्र बिलावर, बसोहली, हीरानगर, कठुआ से जुडे़ हैं। ऐसे में अलग विस क्षेत्र बनाकर उनके साथ राजनीतिक भेदभाव दूर किया जा सकता है। इससे कंडी में विकास की शुरूआत होगी, जो अभी तक नहीं हो पाई है।

इसी तरह, बिलावर, बसोहली और बनी से एक अलग विस क्षेत्र बनाया जाए, जिससे बनी, बिलावर और बसोहली के लोगों को अपने विस क्षेत्र के अलावा प्रशासनिक मुख्यालय की दूरी कम हो जाए और उनकी परेशानियां कम हों। कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि पूर्व में जिला कठुआ के 5 विधानसभा क्षेत्रों के साथ ऐसे इलाके जोड़ दिए गए हैं, जिनका विधानसभा क्षेत्र मुख्यालय की दूरी काफी पड़ती है और उन्हें उसी विधानसभा क्षेत्र के साथ मुख्यालय के साथ जोड़ा जाए,जो वहां के प्रशासनिक मुख्यालय भी नजदीक हो। इसी तरह बिलावर, बसोहली और बनी जिला का एक ऐसा पहाड़ी क्षेत्र है, जहां की आबादी बिखरी हुई है और वहां के प्रतिनिधियों को प्रतिनिधि करने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर अपने विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचना पड़ता है, यह सब पूर्व में पाई गई विसंगतियां है लिहाजा आयोग इस पर गंभीरता से गौर करके अब से दूर करके जनता को राहत पहुंचाए।

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