सनातन से बड़ा कोई धर्म नहीं और धर्म से बड़ा कोई सत्य नहीं

संवाद सहयोगी बिलावर मांडली में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के छह वें दिन वीरवार को संत सुभाष

JagranFri, 12 Nov 2021 04:13 AM (IST)
'सनातन से बड़ा कोई धर्म नहीं और धर्म से बड़ा कोई सत्य नहीं'

संवाद सहयोगी, बिलावर: मांडली में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के छह वें दिन वीरवार को संत सुभाष शास्त्री महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि सदा अपने धर्म का पालन करें। आध्यात्मिक जीवन का आधार ही धर्म है। धर्म किसी समय, अविधि, विशेष परिस्थिति पर निर्भर नहीं होता, बल्कि धर्म सिर्फ सत्य पर निर्भर रहता है। इसलिए कहा गया है कि सत्य के अलावा अन्य कोई धर्म नहीं।

उन्होंने कहा कि धर्म ऐसी वस्तु नहीं की दवा की गोली के समान निकल जाए। इसके लिए निरंतर तथा बड़े अभ्यास की आवश्यकता है, धीरे-धीरे तथा लगातार अभ्यास से मन काबू में लाया जा सकता है। इसे धर्म की ओर अग्रसर किया जा सकता है, परंतु सबसे बड़ी बात यह है कि धर्म पर पूर्ण श्रद्धा होना अति आवश्यक है। सबसे बड़ा सच यह है कि धर्म को यदि वास्तव में जाना है तो इसके लिए एक सद्गुरु की आवश्यकता पड़ती है। ऐसा सतगुरु, जिसने स्वयं धर्म को जानकर अपने जीवन में डाल रखा हो और केवल धर्म मार्ग पर ही चलता है। उन्होंने कहा कि जब तक आप सद्गुरु पर पूर्ण रूप से श्रद्धा नहीं रखेंगे, तब तक धर्म अर्थात भगवान को वास्तविकता से जान नहीं पाएंगे। यदि भगवान से हमारे मन को जोड़ने वाले व भगवान का ज्ञान देने वाले सद्गुरु है। यदि उनके प्रति हमारी श्रद्धा नहीं होगी तो हमें संत सद्गुरु भी अच्छे नहीं लगते और ना ही उनकी वाणी समझ में आएगी, इसलिए धर्म को जानना है तो अपने-अपने सद्गुरु के प्रति श्रद्धा करनी ही पड़ेगी। उन्होंने कहा कि शांति से बढ़कर कोई तप नहीं, संतोष से श्रेष्ठ कोई सुख नहीं, तृष्णा से बढ़कर कोई रोग नहीं और दया से बढ़कर कोई धर्म नहीं, इसलिए सदा अपने सनातन धर्म का अनुसरण करें और अपने इस लोक और परलोक को साकार कर लें।

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