लखनपुर में लगे पशुधन मेले में पशु खरीदने पर मिली सब्सिडी

जागरण संवाददाता कठुआ प्रदेश के मुख्य प्रवेश द्वार लखनपुर में पहला पशुधन मेला लगा। इस मौके पर

JagranPublish:Mon, 06 Dec 2021 04:56 AM (IST) Updated:Mon, 06 Dec 2021 04:56 AM (IST)
लखनपुर में लगे पशुधन मेले में पशु खरीदने पर मिली सब्सिडी
लखनपुर में लगे पशुधन मेले में पशु खरीदने पर मिली सब्सिडी

जागरण संवाददाता, कठुआ: प्रदेश के मुख्य प्रवेश द्वार लखनपुर में पहला पशुधन मेला लगा। इस मौके पर पशु खरीदने वालों को 50 फीसद सब्सिडी भी मिली, जिसे पशु पालन विभाग की ओर से पशु पालको को दिया जा रहा है।

इससे पहले पशु एवं भेड़ पालन विभाग के प्रधान सचिव नवीन चौधरी ने रविवार को लखनपुर में आयोजित पहले पशुधन मेले के उद्घाटन करते हुए कहा कि डेयरी उद्योग को मिल रही सफलता के चलते वर्ष 2022 तक जम्मू कश्मीर में दूध उत्पादन में आत्म निर्भर बन जाएगा। मौजूदा समय में जितनी तेजी से प्रदेश में डेयरी उद्योग फलफूल रहा है, उससे आने वाले समय में रोजगार के भी अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पशु मेला आयोजित करने की शुरुआत नगरी से की गई थी, जहां पशुपालकों द्वारा दिखाई गई रूची के बाद हीरानगर में आयोजित किया गया। नगरी से भी ज्यादा पशुपालकों ने रिस्पांस दिखाया। इसे देखते हुए प्रदेश के मुख्य प्रवेश द्वार लखनपुर में पहली बार मेला आयोजित किया गया, जहां पिछले दो मेलों से और अधिक रिस्पांस आया है। अब विभाग यहां पर प्रत्येक रविवार को मेला आयोजित करेगा, उसके बाद महीने के आखिरी रविवार को एक बार आयोजित करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में पिछले 50 सालों में 10 हजार डेयरियां खुल पाई हैं, लेकिन अब रोजाना दर्जन से ज्यादा डेयरी उद्योग लगाने के लिए पशुपालक आवेदन कर रहे हैं। विभाग ने पशुपालकों की सुविधा को देखते हुए ही ऐसे मेले आयोजित किए, ताकि यहां के पशु पालकों को पंजाब, हरियाणा या राजस्थान आदि राज्य में जाकर पशु खरीदने के झंझट से छुटकारा मिल सके। इससे किसानों का एक तो 7 से 10 हजार रुपये पशु लाने और जाने का खर्च बचेगा। साथ ही परेशानी भी नहीं होगी। ऐसे मेले के आयोजन से उन्हें अब घर द्वार पर ही हर नस्ल और अपनी पसंद का पशु मिलेगा, खरीदने के बाद घर तक लाने के लिए खर्च भी नहीं करना पड़ेगा। यह सब विभाग ने पशुपालकों द्वारा दिखाए जा रहे उत्साह के बाद व्यवस्था की है। तेजी से बढ़ता डेयरी उद्योग जम्मू कश्मीर की आर्थिक स्थिति मतबूत बनने में अहम साबित होगा।

मौके पर पशु पालन विभाग के प्रधान सचिव नवीन चौधरी ने मेले में पशु खरीदने वाले पशुपालकों को 41.25 लाख रुपये की सब्सिडी के चेक एकीकृत डेयरी विकास योजना के तहत वितरित किए। गौर हो कि सरकार पशुपालकों को प्रोत्साहन के लिए मौजूदा समय में 50 फीसद सब्सिडी दे रही है। उन्होंने बताया कि विभाग ने इस वर्ष 10 करोड़ रुपये सब्सिडी के तौर पर पशुपालकों को जारी किए है, जबकि इस वर्ष किसानों को डेयरी उद्योग सहित अन्य उपकरण खरीदने के लिए 70 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। बाक्स---

दूधारु पशुओं के साथ कड़क नाथ मुर्गा भी मेले में बने आकर्षण

अभी तक पशु मेले में दूधारु पशुओं की विभिन्न नस्लों को ही अन्य राज्यों के व्यापारी पशुपालकों को बेचने के लिए ला रहे थे, लेकिन इस बार भेड़ों एवं कड़कनाथ यानि काले रंग के मुर्गे को भी लाया गया, जो वहां पर आकर्षण बने रहे। हालांकि, पशुपालकों ने वहां पर ज्यादा उत्साह दूधारु पशु खरीदने में दिखाया, जिसमें गिर, हालस्टेन फ्रिजिन, जरसी, साहिवाल आदि नस्ल की गाय मेले में व्यापारियों द्वारा बेचने के लिए लाई गई थी, जिनकी कीमत 50 हजार से शुरु होकर एक लाख से भी ऊपर तक रही। मेले में विभिन्न नस्लों की 90 के करीब गायें, 70 भेड़ें और 12 कड़कनाथ (काले रंग) मुर्गे लाए गए थे।