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जमीनी पानी खारा, पेयजल संकट गहराया

संवाद सहयोगी, हीरानगर: सीमावर्ती क्षेत्र में पीएचई के ट्यूबवेलों से पानी की नियमित सप्लाई नहीं होती, जिसके कारण अधिकांश लोग छैलो हैंडपंपों का ही पानी पीते थे, लेकिन अब उक्त पानी खारा निकल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि पीएचई विभाग को सीमावर्ती पांच किलोमीटर पट्टी में लगे हैंडपंपों के पानी की जांच के लिए टीम भेजनी चाहिए, ताकि पता लग सके कि पानी खारा क्यों हो रहा है। स्वास्थ्य के लिए कहीं नुकसान दायक तो नहीं। कोट्स--

सीमावर्ती क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए पीएचई विभाग ने नौ चक, रघुनाथपुरा, करोल कृष्णा, लडवाल आदि गांवों में टयूबवेल लगा रखे हैं, जिनसे नियमित सप्लाई नहीं होती। ऐसे में लोग घरों में छैलों हैंड पंपों का पानी पीते थे, लेकिन वो भी अब खारा हो चुका है। पीएचई विभाग को पानी की जांच करवानी चाहिए।

-पुरुषोत्तम लाल। कोट्स--

गांवों में लगे छैलो हैंडपंप बीस से 70 फुट की गहराई में लगे हुए हैं। दो तीन सालों से पानी खारा निकल रहा है जो पीया नहीं जाता और न ही उससे कपड़े धोए जा सकते हैं। संबंधित विभाग को पानी की जांच करवानी चाहिए।

-तिलक राज।

कोट्स---

पीएचई विभाग के नौचक टयूबवेल से एक साल से सप्लाई नहीं हो रही और रघुनाथपुरा से भी छह माह से बंद है। छैलो हैंडपंप से भी निकल रहे पानी भी खारे हो गए हैं, जिसके कारण ग्रामीण पानी नहीं पी रहे। विभाग को गांवों में टीम भेज कर जांच करवानी चाहिए।

-तरसेम लाल। कोट्स---अधिकारी पानी की जांच के लिए हीरानगर में कोई लेबोरेटरी नहीं है। क्षेत्र के जेई को भेज कर कुछ गांवों के सेंपल भरवा कर कठुआ लेबोरेटरी भेजेंगे।

-गोपाल शर्मा, एईई, पीएचई सब डिवीजन हीरानगर।

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