वूली नेकेड स्टार्क को भा रही बार्डर की खामोशी

आरएसपुरा में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बनी खामोशी प्रवासी मेहमान परिदों को बुला रही है। खासकर बड़े आकार वाले वूली नेकेड स्टार्क को ये इलाके खूब पसंद आ रहे हैं। यही वजह है कि इन दिनों वे तारबंदी के निकट डेरा जमाने लगे हैं। सर्दियां बिताने के लिए जम्मू कश्मीर के इस इलाके में पहुंचे ये खूबसूरत पक्षी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।

JagranTue, 23 Nov 2021 06:00 AM (IST)
वूली नेकेड स्टार्क को भा रही बार्डर की खामोशी

गुलदेव राज, जम्मू

आरएसपुरा में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बनी खामोशी प्रवासी मेहमान परिदों को बुला रही है। खासकर बड़े आकार वाले वूली नेकेड स्टार्क को ये इलाके खूब पसंद आ रहे हैं। यही वजह है कि इन दिनों वे तारबंदी के निकट डेरा जमाने लगे हैं। सर्दियां बिताने के लिए जम्मू कश्मीर के इस इलाके में पहुंचे ये खूबसूरत पक्षी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।

तारबंदी वाले इलाके में कोई आता-जाता नहीं है। ऐसे में वहां पूरी खामोशी रहती है। शांत वातावरण सारस प्रजाति के पक्षियों को खास पसंद है। यही वजह है कि वूली नेकेड स्टार्क इस क्षेत्र में डेरा जमा रहे हैं। बैंगनी रंग वाले इन वूली नेकेड स्टार्क का आकार 75 से 92 सेमी तक हो सकता है। ऐसे में वे बहुत दूर से इंसान को नजर आ जाते हैं। आरएसपुरा के सीमावर्ती क्षेत्र में तकरीबन 30 वूली नेकेड स्टार्क का ग्रुप यहां पहुंचा है। सीमा पार पाकिस्तान वाले क्षेत्र में भी यह पक्षी डेरा जमाते हैं। दिन में इनका सीमा के आर-पार आना-जाना लगा रहा है। यह इंसान द्वारा बनाई गई सरहदों को नहीं पहचानते। इसलिए ऊंची उड़ान भरते हुए सीमा के दोनों ओर वे चक्कर काटते हैं।

शिकार नहीं होने से घराना में ज्यादा आते हैं प्रवासी परिदे

इसी प्रजाति के ब्लैक स्टाक भी सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। वे भी वूली नेकेड स्टार्क की तरह ही विचरण कर रहे हैं। वूली नेकेड स्टार्क को घराना के तालाब वाला इलाका खास पसंद है। यह इलाका तारबंदी से महज तीन सौ मीटर दूर है। हालांकि घराना वेटलैंड के तालाब के आसपास लोगों का आना-जाना रहता है, लेकिन सदियों से यहां उतरते रहे ये प्रवासी पक्षी जानते हैं कि घराना में उनके लिए कोई खतरा नहीं होता है। वहीं, सीमा पार प्रवासी पक्षियों का शिकार भी किया जाता है, जबकि भारतीय क्षेत्र में ऐसा नहीं होता। इसलिए ज्यादातर स्टार्क घराना व इसके आसपास ही डेरा जमाते हैं। जम्मू से घराना घूमने आए महेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने भी इन नायब पक्षियों को देखा है। उनका बड़ा आकार और खूबसूरती सभी को आकर्षित करती है।

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