सांबा के कराडकी गांव में तालाब का पानी पी रहे ग्रामीण, 15 दिन में मिलता है महज एक टैंकर पानी

कराडकी गांव के सरपंच जसवीर सिंह ने बताया कि वे कई बार जलशक्ति विभाग और प्रशासन के अधिकारियों के पास पानी की समस्या के समाधान के लिए गए लेकिन कुछ नहीं हुआ। पिछले तीन साल से अधिकारी एक ही जवाब दे रहे हैं कि आपके गांव में जल्द ट्यूबवेल लगेगा।

Rahul SharmaFri, 18 Jun 2021 10:50 AM (IST)
कराडकी गांव में आज तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप नहीं डाली गई है।

सांबा, निश्चिंत संबयाल: जम्मू कश्मीर में सरकार हर घर में नल से जल देने की योजना पर काम कर रही है। राज्य के दूरदराज के इलाकों में कई ऐसे गांव हैं, जहां अभी तक ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल पहुुंचाने के लिए पाइप नहीं बिछाई गई है। ऐसे में वहां रहने वाले लोग पीने के पानी के लिए प्राकृतिक स्रोतों पर ही निर्भर हैं। इसमें सबसे ज्यादा समस्या कंडी इलाकों में है, जहां के ग्रामीण पूरी तरह पेयजल सप्लाई पर ही निर्भर हैं। सांबा जिले में ऐसा ही एक गांव कराडकी है। यह गांव जिले के घगवाल ब्लाक की सुराड़ा पंचायत में आता है। यहां आज तक सरकार पानी की पाइप नहीं बिछा पाई है। ऐसे में गांव के लोग तालाब का गंदा पानी पीने को मजबूर हैैं। दिनभर गांव की महिलाओं और बच्चों को गांव से दो किलोमीटर दूर पहाडिय़ों के बीच में प्राकृतिक रूप से बने तालाब से पानी लेने के लिए आवाजाही करते हुए देखा जा सकता है।

कराडकी गांव में दो तालाब हैं। मई-जून की गर्मी में इसमें से एक तालाब का पानी सूख गया है, जबकि दूसरे तालाब के बीच में ही पानी बचा है। इसी तालाब से कराडकी गांव की महिलाएं और बच्चे पीने के लिए पानी लाते हैं। इस गांव की पूजा देवी ने बताया कि सरकार भले ही हर घर में नल का पानी देने की बात करती है, लेकिन कराडकी के लोगों की तकदीर में तो तालाब का पानी पीना है लिखा है। यहां आज तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप नहीं डाली गई है। ऐसे में गांव में भोजन पकाने और अन्य काम के लिए महिलाएं दिनभर सिर पर बाल्टी रखकर पानी ढोती रहती हैं। बच्चे भी पढ़ाई छोड़कर उनकी मदद करते हैं। ग्रामीणों की इस तकलीफ को अब तक किसी नेता या अधिकारी ने नहीं जानने का प्रयास किया। यही वजह है कि अब कराडकी के लोग इसे अपनी नियति मानने लगे हैं।

सरपंच की बदौलत 15 दिन में मिलता है महज एक टैंकर पानी: कराडकी गांव में रहने वाली पूजा देवी ने बताया कि गांव के बुजुर्गों ने क्षेत्र के हर नेता से इसके लिए फरियाद की, लेकिन वे तो सिर्फ चुनाव के समय ही नजर आते हैं। जलशक्ति विभाग के अधिकारियों के अलावा प्रशासन से भी इस समस्या के बारे में बताया गया, लेकिन पेयजल सुविधा मिलना तो दूर आज तक गांव में हमारी समस्या जानने के लिए कोई भी अधिकारी नहीं आया। कुछ अन्य महिलाओं ने बताया कि उनकी तकलीफ को देखकर गांव के सरपंच ने पानी के टैंकर की सुविधा शुरू करवाई है, लेकिन वह भी 15 दिन में एक ही बार आता है। इससे पूरे गांव का काम नहीं चल पाता है। इसलिए उनके लिए आखिरकार तालाब का ही सहारा है।

उपराज्यपाल से हर घर में नल से जल देने की गुहार: कराडकी गांव के सरपंच जसवीर सिंह ने बताया कि वे कई बार जलशक्ति विभाग और प्रशासन के अधिकारियों के पास पानी की समस्या के समाधान के लिए गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। पिछले तीन साल से अधिकारी एक ही जवाब दे रहे हैं कि आपके गांव में जल्द ट्यूबवेल लगेगा, लेकिन आज तक हमने ट्यूबवेल नहीं देखा। जसवीर सिंह ने बताया कि कराडकी में 22 घर हैं। किसी के घर में अब तक नल नहीं लग पाया है। पानी की पाइप बिछाने की प्रक्रिया भी नहीं शुरू हो पाई है। ऐसे में जनप्रतिनिधि होने पर भी मैं मजबूर हूं। मेरे गांव के लोग तालाब का पानी पीने को मजबूर हैं, लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रहा हूं। उन्होंने उपराज्यपाल से गुहार लगाई है कि वे ग्रामीणों की तकलीफ को समझें और पानी की पाइप बिछवाकर हर घर में नल से जल देने के लिए कदम उठाएं।

जलजीवन मिशन के तहत 203.15 लाख रुपये का टेंडर किया गया है। उसकी आखिरी तारीख 21 जून है। पूरी उम्मीद है कि टेंडर खुलने के बाद कराडकी गांव में पानी की समस्या का समाधान होगा। गर्मी बहुत ज्यादा होने से कई जगहों पर पानी नहीं पहुंच पा रहा है। विभाग टैंकर से ऐसे क्षेत्रों में पानी पहुंचा रहा है। जल्द कराडकी गांव के लिए भी टैंकर से पानी की सप्लाई शुरू की जाएगी।  -सुनील शर्मा, कार्यकारी अभियंता, जल शक्ति विभाग  

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