देश पर मर मिटने वाले पुलिस के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि

जागरण संवाददाता, जम्मू : बीते एक साल में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जम्मू कश्मीर पुलिस तथा अ‌र्द्धसैनिक बलों के जवानों को राष्ट्रीय पुलिस शहीदी दिवस पर सोमवार को 'जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी..' गीत की धुन पर नम आंखों से श्रद्धांजलि दी गई। राष्ट्रीय पुलिस शहीदी दिवस का जम्मू में मुख्य कार्यक्रम गांधी नगर स्थित पुलिस स्टेडियम गुलशन ग्राउंड में हुआ। समारोह स्थल पर ही शहीदी स्मारक बना कर शहीद जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इससे पूर्व रेलवे स्टेशन के सामने बने शहीदी स्मारक में अमर जोत के आगे शहीदों को नमन किया गया।

जम्मू जोन के इंस्पेक्टर जरनल ऑफ पुलिस मुकेश सिंह ने 21 अक्टूबर 2018 से 20 अक्टूबर 2019 के बीच देशभर में शहीद हुए 269 सुरक्षाकर्मियों के नाम पढ़े। शहादत पाने वालों में राज्य पुलिस के 24 जाबांज भी शामिल हैं। आइजीपी ने राष्ट्रीय पुलिस शहीदी दिवस के महत्व और कारणों के बारे भी जानकारी दी। शहीदों को जवानों ने मार्चपास्ट और पुलिस बैंड की धुन पर अपने हथियारों को झुका कर सलामी दी। शहीदों की आत्म की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया। कार्यक्रम के अंत में ग्राउंड में बनाए गए शहीदी स्मारक पर लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर रिटायर्ड डीजीपी एमएम खजूरिया, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविद्र रैना, पूर्व एमएलसी विक्रम रंधावा, मंडलायुक्त संजीव वर्मा, जिला आयुक्त सुषमा चौहान के अलावा पुलिस के कई अधिकारी व सेवानिवृत्त अधिकारियों के साथ शहीदों के परिजनों के अलावा कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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रक्तदान शिविर भी लगाया

राष्ट्रीय पुलिस शहीदी दिवस के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस बार भी गुलशन ग्राउंड स्टेडियम के साथ लगते ऑडिटोरियम में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इसमें पुलिस के अलावा टीम जम्मू के सदस्यों ने रक्तदान किया। आला अधिकारियों ने उम्मीद जताई की शिविर में एक हजार के करीब पुलिसकर्मी अपना रक्तदान करेंगे।

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मोमबत्ती जला कर दी श्रद्धांजलि

देश के दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए पुलिस व अ‌र्द्ध सैनिक बलों के जवानों को उनके साथियों व शहरवासियों ने जम्मू रेलवे स्टेशन के बाहर बने शहीदी स्मारक में मोमबत्तियां जला कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर स्मारक को विशेष तौर पर सजाया गया था। रविवार देर शाम को आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारी अपने परिवार के सदस्यों के साथ शहीदी स्मारक पहुंचे। आइजीपी का कहना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को शहादत का असली मतलब बताना है।

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राष्ट्रीय पुलिस दिवस का इतिहास

21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख की सेना से लोहा लेते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के दस कर्मी शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद से देश भर में शहीद होने वाले पुलिस तथा अ‌र्द्ध सैनिक बलों की शहादत को सलाम करने के लिए हर वर्ष 21 अक्टूबर को राष्ट्रीय पुलिस दिवस मनाया जाता है।

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