गैर मुस्लिमों की हत्याओं से चिंतित हैं, लेकिन घाटी लौटने के इरादे डिगे नहीं हैं

घाटी के हालात कैसे भी रहें कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी की तमन्ना हमेशा बनी रहेगी। हालांकि वर्तमान हालात में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को घाटी से जम्मू अपने परिवार के पास आना पड़ा। इससे कश्मीरी पंडित समुदाय दुखी जरूर हैं लेकिन घाटी लौटने के सपने कहीं धूमिल नहीं हुए हैं।

Lokesh Chandra MishraSun, 17 Oct 2021 02:46 PM (IST)
घाटी नहीं जाना होता तो कश्मीरी पंडित घाटी को भूल चुके होते, लेकिन कश्मीर घाटी हमारी मातृ भूमि है।

जम्मू, जागरण संवददाता : घाटी में गैर मुस्लिम लोगों की हत्याओं से कश्मीरी पंडित परेशान जरूर हैं, लेकिन घाटी लौटने के उनके इरादे डगमगाए नहीं हैं। 1990 में आतंक के कारण पलायन को मजबूर हुए इन कश्मीरी पंडितों का कहना है कि कश्मीर उनकी जन्म भूमि है, संस्कृति है। इससे वे कैसे दूर हो सकते हैं। इसलिए घाटी के हालात कैसे भी रहें, कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी की तमन्ना हमेशा बनी रहेगी। हालांकि वर्तमान हालात में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को घाटी से जम्मू अपने परिवार के पास आना पड़ा। इससे कश्मीरी पंडित समुदाय दुखी जरूर हैं, लेकिन घाटी लौटने के उनके सपने कहीं धूमिल नहीं हुए हैं।ये बातें रविवार को कश्मीरी पंडितों ने गैर मुस्लिमों की हत्या के विरोध में प्रदर्शन के दौरान जम्मू में कहीं।

विस्थापित कश्मीरी पंडितों के हक की लड़ाई लड़ रहे शादी लाल पंडिता का कहना है कि घाटी के हालात पिछले 30 साल से खराब चल रहे हैं। अगर घाटी नहीं जाना होता तो कश्मीरी पंडित घाटी को कब का भूल चुके होते, लेकिन कश्मीर घाटी हमारी मातृ भूमि है। वह पहचान है। इससे हम किनारा नहीं कर सकते। सरकार से हमने बार-बार कहा है कि घाटी में श्रीनगर, बारामूला व अनंतनाग में सैटेलाइट कालोनियां बनाई जाएं, जहां सरकार का सुरक्षा का घेरा हो। एक कालोनी में 40 हजार कश्मीरी पंडित रह सकेंगे। अगर सरकार ऐसा कर देती है तो कश्मीरी पंडित हर हालात में घाटी में रह सकेंगे।

वहीं, पनुन कश्मीर के प्रधान वीरेंद्र रैना का कहना है कि अभी जो हालात घाटी में चल रहे हैं, वह ठीक नहीं हैं। रोजगार पैकेज योजना पर लगे कश्मीरी पंडित कर्मचारी जम्मू अपने परिवार के पास आ चुके हैं। इससे हमें निराशा जरूर हुई है, लेकिन कश्मीरी पंडितों की घर वापसी का सपना अभी मरा नहीं है। कश्मीरी पंडित अपने घर जाने को तैयार हैं, लेकिन सरकार को पहले कश्मीरी पंडितों से बातचीत तो करनी होगी। बातचीत से ही पता चल सकेगा कि आखिर कश्मीरी पंडितों के दिल के अंदर क्या है।

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