कश्मीर में आतंकियों के समूल नाश के लिए व्यूह रचना को दिया जा रहा है अंतिम रूप, अब चुन-चुनकर आतंकियों का होगा सफाया

जम्मू कश्मीर पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह और एनआइए के महानिदेशक कुलदीप सिंह व अन्य संबंधित अधिकारियों के बीच आज यानि मंगलवार सुबह हुई बैठक में वादी के समग्र हालात और आतंकी गतिविधियों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई है।

Vikas AbrolTue, 19 Oct 2021 03:51 PM (IST)
व्यूह रचना को अंतिम रुप देने के लिए पुलिस में थाना स्तर से आवश्यक फीडबैक प्राप्त किया जा रहा है।

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। गैर मुस्लिमों और अन्य राज्यों के नागरिकों की हत्याओं से उपजे हालात से निपटने और आतंकियों के समूल नाश की व्यूह रचना के लिए केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के लगभग दो दर्जन वरिष्ठ अधिकारी बीते एक सप्ताह से कश्मीर में डेरा डाले हुए हैं। सीआरपीएफ और राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआइए के महानिदेशक कुलदीप सिंह भी कश्मीर में हैं। इस बीच, श्रीनगर में चार गैर मुस्लिमाें समेत पांच नागरिक हत्याओं की जांच का जिम्मा एनआइए संभालने जा रही है जबकि कुलगाम और पुलवामा में उत्तर प्रदेश व बिहार के श्रमिकों की हत्या की जांच जम्मू कश्मीर पुलिस के पास ही रहेगी।

संबंधित सूत्रों ने बताया कि जम्मू कश्मीर पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह और एनआइए के महानिदेशक कुलदीप सिंह व अन्य संबधित अधिकारियों के बीच आज यानि मंगलवार सुबह हुई बैठक में वादी के समग्र हालात और आतंकी गतिविधियों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई है। बैठक में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दो अक्टूबर को हुई तीन हत्याओं मक्खन लाल बिंदरु, बिहार के गोल गप्पा विक्रेता वीरेंद्र पासवान और टैक्सी चालक मोहम्मद शफी की हत्या और उसके बाद सात अक्टूबर को श्रीनगर के एक स्कूल में दाे गैर मुस्लिम अध्यापकों सुपिन्द्र कौर और दीपक चंद की हत्या की साजिश की जांच का जिम्मा एनआइए को सौंपे जाने पर तथाकथित तौर पर अपनी सहमति प्रदान कर दी है। इसके अलावा कुलगाम और पुलवामा में हुई उत्तर प्रदेश व बिहार के तीन श्रमिकों की हत्या के अलावा दो अक्टूबर को श्रीनगर में हुई दो नागरिक हत्याओं की जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास ही रहेगी।

सूत्रों ने बताया एनआइए को जांच सौंपे जाने के संदर्भ में अंतिम फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार ही लिया जाएगा। फिलहाल, इस विषय में एनआइए के महानिदेशक और जम्मू-कश्मीर पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह अपने-अपने स्तर पर एक रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज रहे हैं।

उन्होंने बताया कि एनआइए और जम्मू-कश्मीर पुलिस महानिदेशक के बीच बैठक से पूर्व बीती शाम केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों, सेना के खुफिया विंग और जम्मू-कश्मीर पुलिस के खुफिया विंग के उच्चाधिकारियों की एक-एक साझा बैठक हुई है। इसमें कश्मीर में बीते एक माह के दौरान हुई विभिन्न आतंकी घटनाओं, विभिन्न स्रोतों से आतंकी गतिविधियों के संदर्भ में उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का समग्र रुप से आकलन किया गया है। इस बैठक में उन इलाकों को भी चिह्नित किया गया है, जहां आतंकियों और उनके ओवरग्राउंड वर्करों का प्रभाव ज्यादा है।

सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने वादी में बीते एक पखवाड़े के दौरान पूछताछ के लिए हिरासत में लिए आतंकियों के ओवरग्राउंड वर्करों, पूर्व आतंकियों, पत्थरबाजों व अलगाववादी कार्यकर्ताओं से मिली जानकारी की समग्र रिपोर्ट पर भी बातचीत हुई है। इसमें कहा गया है कि आतंकियों ने अपनी गतिविधियों में तेजी कश्मीर में अपने कैडर का मनोबल बनाए रखने और आम लोगों के बीच डर पैदा करने के लिए लायी है। आतंकी संगठन ऐसी वारदातों को अंजाम देना चाहते हैं, जिनसे न सिर्फ कश्मीर में डर का माहौल पैदा हो, बल्कि पूरे देश में तनाव भी बढ़े। बैठक में विभिन्न आतंकी संगठनों द्वारा सुरक्षाबलों के दबाव से बचने के लिए छोटे-छोटे नए आतंकी गुट, जिन्हें सिर्फ टारगेट किलिंग या किसी वारदात विशेष का जिम्मा रहेगा, तैयार किए जाने का तथ्य भी सामने आया है।

उन्होंने बताया कि इस बैठक के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिस पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 23 अप्रैल को श्रीनगर में प्रस्तावित एकीकृत मुख्यालय की बैठक में चर्चा होगी। इस रिपोर्ट में वादी में आतंकियों और उनके समर्थकों के अलावा उनके वित्तीय व हथियार आपूर्ति के नेटवर्क के समूल नाश का रोडमैप भी पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आतंकियों के खिलाफ तैयार किया जा रहा अभियान वर्ष 2017-19 तक जारी रहे सेना के ऑपरेशन ऑलआउट की अगली कड़ी रहेगा। फिलहाल, संबंधित अधिकारी इसे अंतिम प्रहार के तौर पर चलाने पर मंथन कर रहे हैं। इस अभियान की व्यूह रचना को अंतिम रूप देने के लिए पुलिस में थाना स्तर तक से आवश्यक फीडबैक प्राप्त किया जा रहा है।

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