Kathua minor murder case: विशाल की मौजूदगी साबित करने के लिए गढ़े गए थे सुबूत

जम्मू, जागरण संवाददाता। कठुआ मामले में पठानकोट की विशेष अदालत से बरी हुए विशाल जंगोत्रा की वारदात के वक्त कठुआ में मौजूदगी विशेष टीम (एसआइटी) साबित नहीं कर पाई थी। हालांकि इस मामले में जांच टीम ने कई सुबूत गढ़े पर अदालत में यह साबित हो गया कि वारदात के दौरान वह उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में था।

विशाल वारदात के समय उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिला के गांव रसूलपुर स्थित आकांक्षा कॉलेज में परीक्षा दे रहा था। उसके मकान मालकिन सुमन शर्मा के बयान ने उसकी बेगुनाही में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा मीडिया में आई एटीएम की वीडियो ने भी अहम भूमिका निभाई।

17 मार्च 2018 को एसआइटी ने विशाल जंगोत्रा को हिरासत में लिया था। विशाल बीएससी कृषि की पढ़ाई कर रहा था। उसने खतौली के केके जैन कॉलेज में 12 जनवरी 2018 को सुबह 10 बजे से एक बजे तक परीक्षा दी थी।  एसआइटी ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में कहा था कि उपस्थिति पंजिका से विशाल के हस्ताक्षर मेल नहीं खाते हैं। उसकी जगह किसी दूसरे ने परीक्षा दी है। विशाल मीरापुर कस्बे में पुरानी सब्जी मंडी स्थित सुमन शर्मा के मकान में किराये पर रहता था। सुमन के बयान पठानकोट की विशेष अदालत में दर्ज हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि विशाल 10 से 16 जनवरी 2018 तक मीरापुर में था।

14 जनवरी को उनका और 16 जनवरी को पौत्री आस्था शर्मा का बर्थ-डे था, जिसमें विशाल भी शामिल हुआ था। उस वक्त के फोटो भी कोर्ट में पेश किए गए। विशाल के मीरापुर के एटीएम से कैश निकालने की फुटेज और बैंक रिकॉर्ड की डिटेल भी विशाल की रिहाई का बड़ा सुबूत बने। कोर्ट में बैंक अफसरों और परीक्षा केंद्र केके जैन डिग्री कॉलेज खतौली के प्राचार्य अरविंद कुमार के भी बयान अहम रहे।

कॉलेज में तथ्य जुटाने गई थी एसआइटी: एसआइटी ने खतौली के कालेज में विशाल जंगोत्रा के परीक्षा देने के दावे की जांच के लिए दो दिन तक घंटों जांच पड़ताल की थी। हालांकि उस कक्ष में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था। कॉलेज में निगरानी के लिए लगे 11 सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को चेक किया गया था। एसआइटी टीम ने चार बार कॉलेज में जांच पड़ताल करके साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया। खतौली के केके जैन डिग्री कॉलेज में 10, 12, 15, 17, 19, 24, 27, 29 व 30 जनवरी 2018 को विशाल जंगोत्रा ने परीक्षाएं दीं। एसआइटी ने परीक्षाओं के दौरान तत्कालीन प्राचार्य डॉ. अरविंद कुमार के अलावा कक्ष निरीक्षकों से भी पूछताछ की थी।

विशाल पर थे यह आरोप: एसआइटी की ओर से दाखिल की गई चार्जशीट के मुताबिक 10 जनवरी को नाबालिग आरोपित ने आठ साल की बच्ची का अपहरण किया और उसे बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद 11 जनवरी को नाबालिग आरोपित ने विशाल जंगोत्रा को मुजफ्फरनगर में फोन किया और उसे बच्ची के अपहरण के बारे में बताया। इसके बाद अगले दिन 12 जनवरी 2018 को सुबह छह बजे विशाल कठुआ पहुंच गया। क्राइम ब्रांच की चार्जशीट के मुताबिक, इसके बाद विशाल ने बच्ची के साथ 13 जनवरी को दुष्कर्म किया। बाद में बच्ची की हत्या कर उसके शव को जंगल में फेंकने के बाद विशाल 15 जनवरी को शाम चार बजे तक कठुआ में ही था। क्राइम ब्रांच की चार्जशीट के मुताबिक, विशाल 12 जनवरी से 15 जनवरी की शाम चार बजे तक कठुआ में ही था।

यहां एसआइटी ने खाई मार: विशाल की बेगुनाही साबित करने के लिए सुबूत के तौर पर बैंक अकाउंट की स्टेंटमेंट, परीक्षा की उत्तर पुस्तिका, अटेंडेंस शीट और कुछ वीडियो पेश किए गए, जिनकी वजह से क्राइम ब्रांच की चार्जशीट झूठी साबित हुई। पहला वीडियो मुजफ्फरनगर के मीरापुर के कॉरपोरेशन बैंक के एटीएम के बाहर का था। यह वीडियो 12 जनवरी 2018 का था। दोपहर तीन बजकर 47 मिनट 18 सेकेंड पर विशाल एटीएम के अंदर दाखिल होता है। दूसरा वीडियो एटीएम के अंदर का था। तीन बजकर 47 मिनट 24 सेकेंड पर विशाल अपना कार्ड एटीएम में डालता है, लेकिन पैसे नहीं निकलते। इसके बाद वह एटीएम को अपने पर्स में रखकर तीन बजकर 48 मिनट तीन सेकेंड पर एटीएम से बाहर चला जाता है। विशाल के वकील ने इस वीडियो के हवाले से दावा किया था कि अगर विशाल 12 जनवरी को दोपहर तीन बजकर 48 मिनट पर मुजफ्फरनगर के मीरापुर में था तो फिर क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में यह क्यों लिखा गया कि 12 जनवरी को वह सुबह छह बजे कठुआ पहुंच गया था। इसका मतलब है कि क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच ठीक से नहीं की।

सीबीआइ जांच न करवाने पर अड़ी रही थी महबूबा

कठुआ मामले के बाद तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी भाजपा व पीडीपी में पहली बार खुलकर टकराव सामने आया। महबूबा इस मामले में सीबीआइ जांच की मांग को लगातार टालती रही इससे भी लोगों में नाराजगी दिखी। वह अंत तक इस मुद्दे पर अड़ी रही। दोनों पार्टियों में इससे दूरियां बढ़ती गईं और अंत में 19 जून 2018 को भाजपा ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया। पीडीपी ने मामले को सांप्रदायिक रंग देते हुए प्रचार किया कि जम्मू के लोग आरोपितों का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन जम्मू वासियों ने कभी भी आरोपितों का समर्थन नहीं किया। वह मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआइ से जांच करवाने की मांग कर रहे थे। इस मांग को जान-बूझकर दरकिनार किया गया और जांच क्राइम ब्रांच को सौंप अपने विश्वस्त अफसर लगा दिए। सियासत ने इसे जम्मू बनाम कश्मीर की लड़ाई का रंग दे दिया।

बाद में इस मामले में सांझी राम व साथियों की गिरफ्तारी हुई और आरोप लगाया गया कि देवस्थान में पीडि़ता के साथ चार दिन तक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई। इस पर सीबीआइ जांच करवाने की मांग को लेकर हिंदू एकता मंच का गठन हुआ और जम्मू में जगह-जगह असली दोषियों को पकडऩे के लिए सीबीआइ जांच करवाने की मांग ने जोर पकड़ा। जब चारों ओर से कठुआ मामले की जांच सीबीआइ से करवाने की मांग उठने लगी तो भाजपा भी इसके समर्थन में आई और तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के समक्ष यह मांग रखी। महबूबा ने सीबीआइ जांच से साफ इन्कार कर दिया।

भाजपा को हटाने पड़े अपने मंत्री

भाजपा-पीडीपी सरकार के मंत्रियों चौधरी लाल सिंह व चंद्रप्रकाश गंगा के सीबीआइ जांच की मांग को लेकर धरने में शामिल होने के बाद पीडीपी ने भाजपा पर भारी दबाव बनाया। ऐसे हालात में पार्टी को अपने कैबिनेट मंत्रियों चौधरी लाल सिंह व चंद्रप्रकाश गंगा को मंत्रिमंडल से बाहर करना पड़ा।

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