जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्याओं के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, जम्मू में अवैध रूप से बसे रोहिंग्याओं की धरपकड़

अवैध मिले 168 रोहिंग्याओं को देर शाम बसों से हीरानगर जेल में बनाए गए होल्डिंग सेंटर में शिफ्ट किया गया।

जम्मू पुलिस ने रोहिंग्याओं को मौलाना आजाद (एमए) स्टेडियम में तलब कर उनके पहचान पत्रों व संयुक्त राष्ट्र उच्चायोग की ओर से जारी रिफ्यूजी कार्ड की जांच की। पहले दिन 250 से ज्यादा रोहिंग्याओं की जांच की गई।

Vikas AbrolSun, 07 Mar 2021 08:14 AM (IST)

जम्मू, जागरण संवाददाता : सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले अवैध रूप से जम्मू में बसे रोहिंग्याओं की धरपकड़ के लिए प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। शनिवार को जम्मू पुलिस ने रोहिंग्याओं को मौलाना आजाद (एमए) स्टेडियम में तलब कर उनके पहचान पत्रों व संयुक्त राष्ट्र उच्चायोग की ओर से जारी रिफ्यूजी कार्ड की जांच की। पहले दिन 250 से ज्यादा रोहिंग्याओं की जांच की गई। इनमें अवैध मिले 168 रोहिंग्याओं को देर शाम बसों से हीरानगर जेल में बनाए गए होल्डिंग सेंटर में शिफ्ट किया गया। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, अवैध रूप से रह रहे लोगों को म्यांमार डिपोर्ट किया जाएगा। जम्मू में रोहिंग्याओं की धरपकड़ आगे भी जारी रहेगी। केंद्र सरकार ने पहले ही साफ किया था कि अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को पूरे देश से बाहर किया जाएगा।

जम्मू पुलिस ने तड़के ही एमए स्टेडियम को सील कर दिया था। मुख्य गेट के बाहर पुलिस के साथ सीआरपीएफ की भी तैनाती कर दी गई। सुबह करीब नौ बजे 250 से अधिक रोहिंग्याओं को बुलाया गया था। सभी अपने पहचान पत्र व रिफ्यूजी कार्ड के साथ आए थे। कई रोहिंग्याओं को पुलिस खुद भी लेकर आई थी। स्टेडियम के अंदर जहां रोहिंग्याओं की जांच की जा रही थी, वहां पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों के अलावा किसी को भी जाने नहीं अनुमति नहीं थी।

बायोमीट्रिक जांच भी शुरू  

रोहिंग्याओं की बायोमीट्रिक जांच के साथ उनके पूरे रिकार्ड को शुरू से खंगाला जा रहा है। वह कहां से आए हैं? कौन उन्हें लाया और कुनबे में कितने लोग हैं, इन तमाम चीजों का लेखा-जोखा तैयार किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, इस दौरान अवैध मिले रोहिंग्याओं के पास वैध यात्रा दस्तावेज नहीं थे।

खाली करा ली थी हीरानगर जेल 

सूत्रों के अनुसार, कठुआ की हीरानगर जेल में करीब 175 कैदी थे, जिन्हें 24 फरवरी को कठुआ और जम्मू जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। पुलिस प्रशासन ने इस कार्रवाई के लिए पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी।

यह नियमित जांच है 

डीएसपी हेड क्वार्टर स्वाति शर्मा ने कहा कि यह नियमित जांच है। बारी-बारी से रोहिंग्याओं को बुलाकर उनके दस्तावेज जांचे जाएंगे। गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2017 और 2018 में भी पुलिस ने रोहिंग्याओं की वेरिफिकेशन की थी।

इसलिए शुरू हुई कार्रवाई 

रोहिंग्याओं की जांच के पीछे उस कड़ी को वजह माना जा रहा है जो कुछ दिन पहले पुलिस के हाथ लगी थी। करीब एक सप्ताह पहले ही जम्मू शहर के नरवाल में एक रोहिंग्या और उसके साथी को पकड़ा गया था, जो मौलवी बनकर रह रहे थे। पुलिस को उनसे फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड व पासपोर्ट भी मिला था।

देश विरोधी गतिविधियों में भी रहे हैं शामिल 

पहले भी म्यांमार से आए रोहिंग्याओं पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। कुछ साल पहले सुंजवां सैन्य शिविर में हुए आतंकी हमले में रोङ्क्षहग्याओं की संलिप्तता सामने आई थी। इसके अलावा ये रोहिंग्या चोरी, नशे की तस्करी व अन्य अपराधिक वारदात में भी शामिल पाए गए हैं।

सरकारी आंकड़ा में 6,523 व गैर सरकारी 25 हजार हैं रोहिंग्या 

वर्ष 2018 में विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू में रह रहे रोहिंग्याओं की संख्या 6,523 है। वहीं, गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यहां इनकी संख्या 25 हजार के करीब है।

बंगाल से जम्मू लाए गए हैं अधिकतर रोहिंग्या

सूत्रों के अनुसार, साजिश के तहत जम्मू में बसाए गए रोहिंग्याओं में से अधिकतर बंगाल के मालदा व उसके आसपास के शरणार्थी शिविरों से लाए गए हैं। जम्मू में रह रहे रोहिंग्या खुद भी सुरक्षा एजेंसियों के सामने कुबूल कर चुके हैं कि उन्हें कश्मीर की कोई गैर सरकारी संस्था यह कहकर यहां लाई थी कि जम्मू-कश्मीर में उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। यह भी सूचना है कि इन संस्थाओं को यूएई व पाकिस्तान से फंडिंग भी होती है, जिसके कुछ सुबूत भी मिले हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने में भी जुटी हुई हैं। 

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