कश्मीर के दो खच्चरवालों की ईमानदारी की कहानी, 70 किलोमीटर का सफर कर गुजराती परिवार के खोये गहने लौटाए

सूरत से एक परिवार बीते सप्ताह पहलगाम घूमने गया था। रविवार को यह परिवार श्रीनगर लौटा तो उस समय परेशान हो गया जब एक महिला सदस्य को पता चला कि उसके गहने गायब हो गए हैं। इससे पूरा परिवार सदमे में आ गया। सभी परेशान थे।

Vikas AbrolWed, 24 Nov 2021 09:07 AM (IST)
अमानत उसके मालिक को मिल गई, यही उनके लिए इनाम और सुकून की बात है।

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो : आप कहीं घूमने जाएं और वहां आपके पैसे गुम हो जाएं या कीमती गहने खो जाएं और मिलने की उम्मीद न रहे... तो आपकी क्या हालत होगी, अंदाजा लगाया जा सकता है। फिर अचानक ही खोया सामान मिल जाए तो ऐसा लगेगा कि जैसे सारा जहां मिल गया हो। सूरत से कश्मीर घूमने आए एक परिवार के साथ बीते दिनों कुछ ऐसा ही हुआ। उनके खोये आभूषण लौटाने के लिए पहलगाम से दो खच्चरवाले 70 किलोमीटर दूर श्रीनगर आए। उन्होंने सामान लौटाते हुए सिर्फ यही कहा कि यह आपकी अमानत है जो आपके हवाले की जा रही है। हम कश्मीरियों को पास सिर्फ ईमानदारी, प्यार और भाईचारा है, हमें यही चाहिए और हम यही बांटते हैं।

सूरत से एक परिवार बीते सप्ताह पहलगाम घूमने गया था। रविवार को यह परिवार श्रीनगर लौटा तो उस समय परेशान हो गया जब एक महिला सदस्य को पता चला कि उसके गहने गायब हो गए हैं। इससे पूरा परिवार सदमे में आ गया। सभी परेशान थे। परिवार के मुखिया ने टैक्सी चालक ताहिर को अपनी मुश्किल बताई। उन्होंने कहा कि पहलगाम में शायद कहीं गहने गिर गए हैं, वहां पता करो शायद कुछ बात बन जाए। ताहिर ने उन्हें उम्मीद बंधाते हुए कहा कि अगर पहलगाम में गहने गिरे हैं और किसी स्थानीय को मिले होंगे तो मिल जाएंगे।

ताहिर ने पहलगाम में उन रेस्तरां संचालकों और होटल मालिकों से संपर्क किया, जहां उक्त परिवार गया था। उसने वहां कुछ दुकानदारों से भी बात की। फिर उसने उन खच्चरवालों रफीक और अफरोज का भी पता लगाया, जिन्होंने परिवार के सदस्यों को पहलगाम की वादियों में घुमाया था। रफीक और अफरोज से जैसे ही ताहिर ने गहनों के बारे में पूछा, उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा, भाईजान हम खुद परेशान हैं कि इन्हें कैसे लौटाएं। हमारे पास पता नहीं था, नहीं तो आपको फोन करने की जहमत भी नहीं करनी पड़ती। गहने हमें मिले हैं, हमारे पास महफूज हैं। हम श्रीनगर आ रहे हैं, आप होटल में ही इंतजार करना।

कुछ ही घंटों के बाद रफीक और अफरोज गहनों के साथ श्रीनगर पहुंच गए। गहने मिलने से खुश गुजराती परिवार ने अफरोज और रफीक के प्रति आभार जताते हुए उन्हें इनाम भी देना चाहा, लेकिन दोनों यह कहकर मना कर दिया कि वह तो उनकी अमानत लौटाने आए हैं। अमानत उसके मालिक को मिल गई, यही उनके लिए इनाम और सुकून की बात है। 

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