Jammu Kashmir: श्रद्धा का महासावन: भगवान शिव को बहुत प्रिय है श्रावण मास

सावन चतुर्मास के दिनों में आता है। जब जगत के पालनहार माने जानेवाले भगवान विष्णु चार माह के लिए विश्राम पर चले जाते हैं और उनके पीछे जगत के पालन-संरक्षण का कार्य भगवान शिव और माता पार्वती संभालते हैं। क्योंकि श्रावण का मास उन्हें विशेष प्रिय होता है।

Vikas AbrolThu, 29 Jul 2021 03:02 PM (IST)
मान्यता यह भी है कि सावन चतुर्मास के दिनों में आता है।

जम्मू, जागरण संवाददाता। सनातन धर्म में सावन महीने का खास महत्व है। भगवान शिव ने स्वयं अपने मुख से ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनत कुमार से कहा कि मुझे 12 महीनों में सावन विशेष प्रिय है। जब सनत कुमारों ने भगवान शिव से पूछा कि उन्हें सावन मास इतना प्रिय क्यों है तो शिव ने बताया कि देवी सती ने जब अपने पिता दक्ष के घर में योग शक्ति के रूप में शरीर त्याग किया था। उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति रूप में पाने का प्रण किया था।अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर जन्म लिया।

पार्वती ने युवावस्था में एक माह निराहार रहकर कठोर व्रत किया।शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया। जिसके बाद से ही यह माह मुझे सभी मास में अत्यंत प्रिय हो गया। सावन का महीना ऐसा महीना है। जिसमें छह ऋतुओं का समावेश होता है। शिवधाम पर इसका महत्व सबसे ज्यादा होता है।

मान्यता यह भी है कि सावन चतुर्मास के दिनों में आता है

इसके अलावा मान्यता यह भी है कि सावन चतुर्मास के दिनों में आता है। जब जगत के पालन हार माने जानेवाले भगवान विष्णु चार माह के लिए विश्राम पर चले जाते हैं और उनके पीछे जगत के पालन-संरक्षण का कार्य भगवान शिव और माता पार्वती संभालते हैं। क्योंकि श्रावण का मास उन्हें विशेष प्रिय होता है। इसलिए इस माह की शिवरात्रि पर उनकी पूजा-अर्चना करना उन्हें जल्दी प्रसन्न करता है।

श्रावण मास में सोमवार या पूरे मास विधिपूर्वक व्रत रखने पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, फूल, शुद्ध वस्त्र, बिल्व पत्र, धूप, दीप, नैवेध, चंदन का लेप, ऋतुफल, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किए जाते हैं।

श्रावण मास मे शिव पूजन, शिव पुराण, रुद्राभिषेक, शिव कथा, शिव स्तोत्रों व ॐ नम: शिवाय: का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता हैं।

श्रावण मास मे शिव पूजा जो जन करता है। उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। श्रावण मास में शिव पूजा सभी पापों का क्षय करने वाला है। श्रावण मास के सोमवार या पूरे मास व्रत को रखने वालों को उपवास के पूरे दिन, भगवान शिव शंकर का ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। अगर शिव मंदिर में पूजन, जाप करना संभव न हों तो घर में, किसी शांत स्थान पर जाकर पूजन, जाप किया जा सकता हैं।

- पंडित रोहित शास्त्री 

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.