Kashmir: सुरक्षा एजेंसियों का खुलासा, पढ़ाई के लिए पाकिस्तान जा रहे कश्मीरी युवा आतंकी बनकर लौट रहे

सुरक्षा एजेंसियों ने पाया की पाकिस्तान और बंगलादेश में पढ़ाई करने के लिए गए चालीय युवाओं में से 28 युवा आतंकी बन वापस लौटे। यही नहीं तीन साल में 100 कश्मीरी युवा ऐसे भी हैं जो कि पाकिस्तान में कम समय के लिए घुमने गए लेकिन वापस नहीं लौटे।

Rahul SharmaMon, 02 Aug 2021 08:08 AM (IST)
यह सभी भी वैध पासपोर्ट पर पाकिस्तान गए थे।

जम्मू, राज्य ब्यूरो: पाकिस्तान अब कश्मीर में पढ़ाई के लिए जा रहे कश्मीरी युवाओं को आतंक के दलदल में धकेल रहा है। कुछ दिन पहले कश्मीर में मुठभेड़ में आतंकी शकीर अल्ताफ भट की मौत ने सुरक्षा एजेंसियों को चौकस कर दिया है। वह साल 2018 में वैध पासपोर्ट पर पढ़ाई के पाकिस्तान गया था। लेकिन बाद में आतंकी बन वापस लौटा।

सुरक्षा एजेंसियों ने इसके बाद साल 2015 और 2019 के बीच जारी सभी पासपोर्ट की समीक्षा की। इसमें पाया की पाकिस्तान और बांग्लादेश में पढ़ाई करने के लिए गए 40 युवाओं में से 28 युवा आतंकी बन वापस लौटे। यही नहीं तीन साल में घूमने पाकिस्तान गए 100 कश्मीरी युवा वापस नहीं लौटे। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि यह युवा पाकिस्तान में बैठ कर आतंकी गतिविधियों के प्रसार में जुटे हैं।

पिछले महीने 24 जुलाई को बांडीपोरा में हुई मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए थे। इनमें एक अल्ताफ भट भी शामिल था। सुरक्षा एजेंसियों को शक था कि भट आतंकी से राजनेता बने उस्मान मजीद भट को निशाना बनाने आया था। पिछले साल एक से छह अप्रैल के बीच शोपियां, कुलगाम और अनतंनाग जिलों से कुछ युवा पाकिस्तान से घुसपैठ कर आए थे। यह सभी भी वैध पासपोर्ट पर पाकिस्तान गए थे।

सुरक्षा एजेंसियों ने इसके बाद वाघा सीमा और साथ ही नई दिल्ली हवाई अड्डे पर इमीग्रेशन अधिकारियों के साथ सुरक्षा एजेंसियों के साथ बड़े पैमाने पर मंथन किया था। इसमें यह पाया गया कि पढ़ाई के लिए बांग्लादेश या पाकिस्तान गए कम से कम 40 युवा लापता थे। कुछ दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह ने भी कहा था कि 69 युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए हें। उन्होंने कहा था कि पहले से अब कम युवा शामिल हो रहे हें लेकिन इस पर रोक लगाने के लिए सभी को काम करना होगा।

सात दिन से अधिक दिन के वीजा पर गए युवाओं से पूछताछ: अधिकारियों के अनुसार एहतियात के तौर पर घाटी के उन युवाओं से भी पूछताछ की गई, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में सात दिनों से अधिक की अवधि के लिए वैध वीजा पर यात्रा की थी। आंकड़ों की पड़ताल पर अधिकारी भौंचक्के रह गए। पता चला कि युवा कभी वापस नहीं लौटे और अन्य वापसी के बाद गायब हो गए। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूछताछ करने वालों से उनकी पाकिस्तान यात्रा के लिए एक वैध कारण पूछा गया था। इन सभी लोगों की पृष्ठभूमि की जांच की गई।

आइईडी बनाने का दिया जा रहा था प्रशिक्षण: अधिकारियों के अनुसार नए भर्ती होने वाले आतंकियों को छह सप्ताह का ट्रेनिंग कोर्स करवाया जाता है। यही नहीं कुछ युवाओं को आइईडी की एक सप्ताह की ट्रेनिंग दी जाती है। गायब होने वाले युवाओं में ज्यादातर मध्यमवर्गीय परिवारों से संबंध रखते हैं। यह सीमा पार से आने वाले हथियारों और गोला बारूद का इंतजार कर रहे हैं।

 

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