Kashmiri Pandits: कश्मीरी पंडितों के दिलों को छू गया होसबोले का संबोधन, कहा- कश्मीरी पंडितों को हौंसला मिला

भाषण में 15 वी सदी में वैद्यचार्य श्रेया भट्ट का जिक्र हुआ।

Kashmiri Pandits राजा ललिता दित्य का जिक्र बखूबी से हुआ। कश्मीरी पंडितों का बहुत गहन संस्कृति व इतिहास रहा है। आज हमें यह सब बातें ताजा हो गई। निवरेह के संकल्प को दोहराया गया कि कश्मीरी पंडित वापिस घाटी जाएंगे।

Rahul SharmaThu, 15 Apr 2021 09:21 AM (IST)

जम्मू, जागरण संवाददाता: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का संबोधन कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों के दिलों को छू गया। आनलाइन 45 मिनट के इस संबोधन में उन्होंने कश्मीरी पंडितों की सराहना की जिन्होंने संकट के दौर से गुजरकर भी अपनी संस्कृति को संजोए रखा। शाम सात बजे चले इस भाषण को कश्मीरी पंडितों ने फेसबुक पर आन लाइन सुना। जबकि संजीवनी शारदा केंद्र बोहड़ी में तो एक बड़ी सक्रीन पर होसबोले का संबोधन दिखाया गया।

संजीवनी शारदा केंद्र जम्मू के प्रमुख अवतार कृष्ण त्रकु ने कहा कि जो बातें आज होसबोले ने उठाई, से कश्मीरी पंडितों को बड़ा हौंसला मिला है। जो बातें कही गई, उनका बड़ा वजन है। दत्तात्रेय ने कश्मीरी पंडितों के दर्द को करीब से महसूस किया है।

पनुन कश्मीर के प्रधान वीरेंद्र रैना ने अपने निवास पर ही सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का संबोधन सुना। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों के इतिहास पर बखूबी को बखूबी से भाषण में पिरोया गया। भाषण में 15 वी सदी में वैद्यचार्य श्रेया भट्ट का जिक्र हुआ।

वही राजा ललिता दित्य का जिक्र बखूबी से हुआ। कश्मीरी पंडितों का बहुत गहन संस्कृति व इतिहास रहा है। आज हमें यह सब बातें ताजा हो गई। निवरेह के संकल्प को दोहराया गया कि कश्मीरी पंडित वापिस घाटी जाएंगे। लेकिन कैसे वापसी होगी, इस पर कोई योजना पर जिक्र हाे जाता तो और अच्छा हो जाता।

कश्मीरी पंडित किंग सी भारती ने संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का आभार व्यक्त किया जिन्होंने कश्मीरी पंडितों के लिए अपनी गंभीरता दिखाई। अब उम्मीद बनती नजर आ रही है कि सरकार पर भी दवाब बनेगा और कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी के लिए कदम उठेंगे।

कश्मीरी पंडित पिछले 30 साल से विस्थापित होकर यहां वहां रह रहा है, लेकिन इनकी संस्कृति तो कश्मीर में है। इसलिए हर कश्मीरी पंडित घाटी जाने को तैयार है। इसके लिए इन लोगों ने इस बार संकल्प भी लिया है। वहीं रविंद्र थपलू ने कहा कि कश्मीरी पंडितों का इतिहास और संस्कृत बहुत ही मजबूत है। इतने साल अपने घरों से दूर रहने पर भी हमने अपनी संस्कृति की विरासत को संभाल कर रखा है। इसी का जिक्र भाषण में भी हुआ। हमें एक हौंसला मिला है और ऐसा लगता है कि अब हम अगले साल का नवरेह घाटी में ही मनाएंगे।

ईशा भारती दत्तात्रेय होसबोले के भाषण से बहुत प्रसन्नचित हुई। कहा कि कश्मीर की भरपूर जानकारी मिली और वहीं हौंसले भी मजबूत हुए।

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