मानसर-सुरुईंसर झील सरंक्षण पर जवाब तलब

जेएनएफ, जम्मू : राज्य सरकार पर मानसर-सुरुईंसर झील के संरक्षण में विफल रहने का आरोप लगाते हुए दायर की गई जनहित याचिका में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य पर्यटन विभाग तथा सुरुईंसर-मानसर डेवलपमेंट अथॉरिटी को छह सप्ताह में पक्ष रखने का निर्देश दिया है। बेंच ने पूछा है कि रिपोर्ट में बताया जाए कि इन दोनों झीलों के सरंक्षण को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

जनहित याचिका में दो मुद्दों को मुख्य रूप से उजागर किया गया। पहले में कहा गया कि दोनों झीलें धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं लेकिन सरकार इनका संरक्षण करने में पूरी तरह से नाकाम रही है। सरकार की लापरवाही व उदासीनता के कारण आसपास के क्षेत्रों की गंदगी झील में आती है। इससे झील का ताजा पानी प्रदूषित हो गया है। दूसरा ये झीलें पर्यटन दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं लेकिन इस क्षेत्र के साथ भेदभाव किया गया और पर्यटन दृष्टि से भी इन्हें विकसित नहीं किया जा सका। जनहित याचिका में कहा गया कि जम्मू से 42 किलोमीटर दूर सुरुईंसर झील की खूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है और इसकी तुलना श्रीनगर की डल झील व नागिन झील से की जा सकती है। सुरुईंसर व मानसर झील को जुड़वा झील के रूप में देखा जाता है। मानसर झील जम्मू से 30 किलोमीटर दूर है। हिंदुओं की मान्यता है कि मानसर झील का महाभारत से संबंध है। ऐसा माना जाता है कि अर्जुन ने मानसर में तीर मारा था और सुरुईंसर में पानी का झरना निकला था। इसी से इन दोनों झील का निर्माण हुआ। इस धार्मिक महत्व के चलते भी लाखों लोग यहां पहुंचते हैं लेकिन आज तक सरकार इनका उचित संरक्षण व विकास नहीं कर पाई।

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