Reasi Fraud Case: फर्जी बिल व तस्वीर से सरकार से 10 लाख रुपये लेने की भिड़ा दी जुगत

कुछ दिन पहले शपानू गांव के एक सेल्फ हेल्प ग्रुप ने 10 लाख रुपये की मशीनरी लेने के लिए रियासी में संबंधित विभाग के कार्यालय में आवेदन दिया था। इसके लिए औपचारिकताएं निभाई गईं। एक औपचारिकता यह भी थी कि समूह को पहले 10 लाख रुपये की मशीनरी खरीदनी होगी।

Rahul SharmaWed, 07 Apr 2021 07:45 AM (IST)
चीफ हार्टिकल्चर आफिसर बृज वल्लभ गुप्ता को कुछ गड़बड़ मालूम हुई।

रियासी, राजेश डोगरा: रियासी जिले में केंद्र सरकार की बागवानी से संबंधित योजना का गलत तरीके से लाभ उठाने की कोशिश का मामला सामने आया है। फर्जी बिल बनाकर 10 लाख रुपये हड़पने की कोशिश की गई है। जालसाजी के इस मामले में रियासी के ही हार्टिकल्चर डेवलपमेंट आफिसर नजरान खान पर मिलीभगत के आरोप हैं। उनसे अब स्पष्टीकरण मांगा गया है।

यह मामला रियासी जिले की कांजली पंचायत के शपानू गांव का है। यहां किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने इस्टेब्लिशमेंट आफ कस्टम हार्यंरग सेंटर नाम से योजना चला रखी है ताकि किसान ट्रैक्टर, थ्रेशर जैसी कृषि मशीनें खरीद कर कृषि व बागवानी कर अधिक मुनाफा कमा सकें। इस योजना के तहत किसानों को 10 लाख रुपये दिए जाते हैं। अगर कोई एक व्यक्ति इस योजना के तहत 10 लाख रुपये लेता है तो उसे 40 फीसद सब्सिडी मिलती। अगर कुछ लोग समूह बनाकर 10 लाख रुपये लेते हैं तो उन्हें 80 फीसद सब्सिडी देने का प्रावधान है।

कुछ दिन पहले शपानू गांव के एक सेल्फ हेल्प ग्रुप ने 10 लाख रुपये की मशीनरी लेने के लिए रियासी में संबंधित विभाग के कार्यालय में आवेदन दिया था। इसके लिए औपचारिकताएं निभाई गईं। एक औपचारिकता यह भी थी कि समूह को पहले 10 लाख रुपये की मशीनरी खरीदनी होगी। असके बाद समूह के सदस्यों को उस मशीनरी के साथ फोटो खिंचवाना होगा। इस मशीनरी का बिल और संबंधित फोटो विभाग कार्यालय में जमा करानी होगी। उक्त समूह ने ये सभी औपचारिकताएं पूरी कर मशीनरी का बिल और फोटो चीफ हार्टिकल्चर आफिसर के कार्यालय में जमा करवा दिए गए। इसके बाद विभाग की तरफ से 10 लाख रुपये उस ग्रुप के खाते में जमा करवाने थे, लेकिन उससे पहले ही चीफ हार्टिकल्चर आफिसर बृज वल्लभ गुप्ता को कुछ गड़बड़ मालूम हुई। इसके बाद वह जांच के लिए मौके पर जा पहुंचे।

फर्जी बिल जमा किया गया: जांच में पता चला कि उनके पास जमा करवाया गया मशीनरी का बिल फर्जी है। यही नहीं, जिस ट्रैक्टर और अन्य मशीनरी के साथ ग्रुप के सदस्यों का फोटो जमा किया गया है, असल में वह मशीनरी उस ग्रुप ने नहीं खरीदी थी, बल्कि किसी और के ट्रैक्टर आदि खड़े कर फोटो खिंचवा लिया था। इसमें खास बात यह है कि हार्टिकल्चर डेवलपमेंट आफिसर नजरान खान ने न केवल उस सेल्फ हेल्प ग्रुप की औपचारिकताएं निभाने में साथ दिया, बल्कि ग्रुप द्वारा खुद की बताई गई किसी और की मशीनरी के साथ खिंचवाई फर्जी फोटो में हार्टिकल्चर डेवलपमेंट आफिसर खुद भी खड़े हैं। इस मामले में यदि चीफ हार्टिकल्चर आफिसर बृज वल्लभ गुप्ता सतर्कता न दिखाते तो जालसाजी का यह प्रयास सफल हो जाता। सेल्फ हेल्प ग्रुप के खाते में जाने के बाद 10 लाख रुपये में किसका कितना हिस्सा होना था यह जांच का विषय है। इस संबंध में जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही इस संबंध में कार्रवाई होगी।

10 लाख रुपये की योजना का लाभ उठाने की सारी औपचारिकताएं उनके कार्यालय में जमा करवाई गई थीं, जिसकी जमीनी स्तर पर जांच करने के लिए जब वह मौके पर गए तो उस ग्रुप द्वारा खरीदी गई कोई भी मशीनरी नहीं पाई। ऐसे में औपचारिकताओं में शामिल मशीनरी का बिल भी फर्जी है। उन्होंने हार्टिकल्चर डेवलपमेंट आफिसर से जवाब मांगा है। इसी के साथ जिला उपायुक्त के संज्ञान में मामला लाया गया है। - बृज वल्लभ गुप्ता, चीफ हार्टिकल्चर आफिसर रियासी मामला उनके संज्ञान में आया है। विभाग के सीनियर ने जवाबदेही मांगी है। जवाब आने के बाद अगला कदम उठाया जाएगा। - अजय कुमार, डीसी रियासी 

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